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आज बने ये अशुभ योग, भूल कर भी न करें ये काम

Updated: IST aaj ki kundali
षष्ठी तिथि में मांगलिक विवाहादि, वास्तु व युद्धादि कार्य करने चाहिए

षष्ठी नंदा संज्ञक तिथि अपराह्न 3.16 तक, तदुपरांत सप्तमी भद्रा संज्ञक तिथि प्रारंभ हो जाएगी। षष्ठी तिथि में मांगलिक विवाहादि, वास्तु व युद्धादि कार्य करने चाहिए। पर पितृकर्म, काष्ठकर्म व यात्रा वज्र्य है। सप्तमी तिथि में विवाह, संगीत, यात्रा, गृहप्रवेश, उपनयन व वधू आमंत्रण से संबंधित कार्य शुभ कहे गए हैं। अभी मीन का मलमास दोष है।

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शुभ वि.सं. 2074, संवत्सर: साधारण, अयन: उत्तरायण, शाके: 1939, हिजरी: 1438, मु.मास: रज्जब-3, ऋतु: बसन्त, मास: चैत्र, पक्ष: शुक्ल।

नक्षत्र: मृगशिर 'मृदु व तिर्यंकमुख' संज्ञक नक्षत्र रात्रि 1.14 तक, तदन्तर आद्रा 'तीक्ष्ण व ऊर्ध्वमुख' संज्ञक नक्षत्र है। मृगशिरा नक्षत्र में विवाह, यज्ञोपवीत, यात्रा, देवप्रतिष्ठा, वास्तु और कृषि सम्बंधी समस्त कार्य शुभ होते हैं। शुभ व मांगलिक कार्यादि के लिए अभी समय शुद्ध नहीं है।

विशिष्ट योग: द्विपुष्कर नामक शुभाशुभ योग व राजयोग नामक शुभ योग अपराह्न 3.16 से रात्रि 1.14 तक, तदन्तर दोष समूह नाशक रवियोग नामक शक्तिशाली शुभयोग है। चंद्रमा : दोपहर बाद 2.01 तक वृष राशि में, फिर मिथुन राशि में रहेगा।

वारकृत्य कार्य : रविवार को सामान्य रूप से स्थिर संज्ञक कार्य, पदारूढ़ होना, हवाई यात्रा करना, ललित कला सीखना, पशु क्रय तथा मंत्रोपदेश आदि कार्य शुभ व सिद्ध होते हैं। विशिष्ट योग: सूर्योदय से सम्पूर्ण दिवारात्रि दोष समूह नाशक रवियोग शुभयोग है। दिशाशूल : रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा में दिशाशूल रहता है। चंद्र स्थिति के अनुसार आज उत्तर दिशा की यात्रा लाभदायक व शुभप्रद रहेगी।

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श्रेष्ठ चौघडि़ए

आज प्रात: 7.53 से दोपहर 12.31 तक क्रमश: चर, लाभ व अमृत तथा दोपहर बाद 2.03 से अपराह्न 3.35 तक शुभ के श्रेष्ठ चौघडि़ए हैं एवं दोपहर 12.06 से दोपहर 12.55 तक अभिजित नामक श्रेष्ठ मुहूर्त है, जो आवश्यक शुभकार्यारम्भ के लिए अत्युत्तम हैं।

राहुकालः सायं 4.30 बजे से सायं 6.00 बजे तक राहुकाल वेला में शुभ कार्यारंभ यथासंभव वर्जित रखना हितकर है।

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