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आज 4.30 से 6.00 के बीच भूल कर भी न करें कोई शुभ कार्य, होगा बड़ा नुकसान

Updated: IST Aaj ki kundli
द्वादशी भद्रा संज्ञक तिथि रात्रि 2.26 तक, तदन्तर त्रयोदशी जया संज्ञक तिथि प्रारम्भ हो जाएगी

द्वादशी भद्रा संज्ञक तिथि रात्रि 2.26 तक, तदन्तर त्रयोदशी जया संज्ञक तिथि प्रारम्भ हो जाएगी। द्वादशी तिथि में यथा आवश्यक सभी चर-स्थिर, मांगलिक, जनेऊ व अलंकारादिक कार्य शुभ रहते हैं। पर तेल लगाना व यात्रा नहीं करना चाहिए। त्रयोदशी तिथि में जनेऊ को छोड़कर यात्रा, प्रवेश, वस्त्र तथा अन्य मांगलिक कार्य शुभ होते हैं।

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वि.सं. 2074, संवत्सर नाम: साधारण, अयन: उत्तरायण, शाके: 1939, हिजरी: 1438, मु.मास: रज्जब-25, ऋतु: ग्रीष्म, मास: वैशाख, पक्ष: कृष्ण।

नक्षत्र: पूर्वाभाद्रपद 'उग्र व अधोमुख' संज्ञक नक्षत्र रात्रि 1.40 तक, तदुपरान्त उत्तराभाद्रपद 'ध्रुव व ऊध्र्वमुख' संज्ञक नक्षत्र है। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में कारीगरी, कृषि, पशुओं का बेचना, कुआं, तालाब, विद्या व सगाई-संबंध आदि कार्य शुभ कहे गए हैं।

विशिष्ट योग: त्रिपुष्कर शुभाशुभ योग सूर्योदय से रात्रि 1.40 तक है। इस योग में कोई भी शुभाशुभ या लाभ-हानि का कार्य घटित हो तो वैसा ही शुभाशुभ या लाभहानि का कार्य दो बार और घटित होता है। बुद्धिमान जन शुभ कार्यों के लिए इसकी प्रतीक्षा में रहते हैं।

चंद्रमा : सायं 7.58 तक कुम्भ राशि में, इसके बाद मीन राशि में प्रवेश करेगा।

वारकृत्य कार्य : रविवार को राज्याभिषेक, औषध निर्माण व मंत्रोपदेश आदि कार्य करने योग्य हैं।

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दिशाशूल : रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा में दिशाशूल रहता है। पर आज सायं 7.58 तक कुम्भ राशि के चंद्रमा का वास पश्चिम दिशा की यात्रा में सम्मुख रहेगा। यात्रा में सम्मुख चंद्रमा धनलाभ कराने वाला व शुभप्रद माना गया है।

श्रेष्ठ चौघडि़ए

आज प्रात: 7.36 से दोपहर 12.25 तक क्रमश: चर, लाभ व अमृत तथा दोपहर बाद 2.02 से अपराह्न 3.38 तक शुभ के श्रेष्ठ चौघडि़ए हैं एवं दोपहर 11.59 से दोपहर 12.51 तक अभिजित नामक श्रेष्ठ मुहूर्त है, जो आवश्यक शुभकार्यारम्भ के लिए अत्युत्तम हैं।

राहुकाल

सायं 4.30 बजे से सायं 6.00 बजे तक राहुकाल वेला में शुभ कार्यारंभ यथासंभव वर्जित रखना हितकर है।

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