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ऐसे करें आंवला एकादशी का व्रत, दूर हो जाएंगे सारे कष्ट

Updated: IST bhagwan vishnu
फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को आंवला एकादशी या आमलकी एकादशी कहा जाता है

सनातन धर्म के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को आंवला एकादशी या आमलकी एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से समस्त पापों का नाश हो जाता है। इस व्रत को करने से सौ गायों को दान करने जितना पुण्य मिलता है।

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ऐसे आरंभ हुआ था आंवला एकादशी का व्रत

विष्णु पुराण में बताया गया है कि एक बार विष्णुजी के मुख से चन्द्रमा के समान प्रकाश बिंदु प्रकट होकर पृथ्वी पर गिरा। इसी से आमलत अर्थात आंवले के पेड़ की उत्पत्ति हुई। इस कारण आंवले के वृक्ष को उत्तम मान कर उसकी पूजा की जाती है। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को आंवला एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति का दुर्भाग्य दूर होकर सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

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आंवला एकादशी कथा

कहा जाता है कि प्राचीन काल में एक नगर में सभी लोग भक्ति भाव से भगवान विष्णु की पूजा किया करते थे। एक बार एकादशी व्रत के समय सभी लोग मंदिर में जागरण कर रहे थे। उसी समय एक शिकारी आया जो भूखा था। लोगों के कीर्तन की वजह से शिकारी को भोजन चुराने का अवसर नहीं मिल पाया और उसे भी रात्रि जागरण करते हुए कीर्तन सुनते हुए बितानी पड़ी। प्रातःकाल शिकारी सहित सभी लोग अपने-अपने घरों को चले गए।

कुछ समय बाद शिकारी की मृत्यु हो गई और अनजाने में ही आमलकी एकादशी का व्रत करने के प्रभाव से उसका जन्म एक राजा के यहां हुआ। एक दिन शिकार खेलते हुए वह डाकुओं के बीच फंस गया। डाकू उसे मारने के लिए प्रहार करने लगे परन्तु स्वयं ही आपस में लड़-भिड़ कर नष्ट हो गए। इस पर राजा ने पूछा कि इस प्रकार मेरी रक्षा करने वाला कौन है।

राजा के प्रश्न के जवाब में भविष्यवाणी हुई कि तेरी रक्षा स्वयं भगवान विष्णु कर रहे हैं। तुमने पिछले जन्म में आमलकी एकादशी व्रत को किया था, ये उसी का फल है। इस पर राजा ने स्वयं को भगवान के चरणों में अर्पित कर दिया और भक्ति भाव से सेवा-पूजा करते हुए मृत्यु के पश्चात मोक्ष को प्राप्त हुआ।

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