। आंगनबाड़ी केंद्रों में दर्ज बच्चों में से दो गरीब निर्धन बच्चों को गर्म कपड़े वितरण में मनमानी का मामला सामने आया है। बताया गया कि जो कपड़े कड़ाके की ठंड के समय बांटे जाने थे, उन्हें अब बच्चों को देकर औपचाकिता पूरी की जा रही हैं। उक्त कपड़ों की खरीदी के लिए प्रति कार्यकर्ता गत जनवरी माह में ग्राम स्वाथ्य तदर्थ समिति के माध्यम से अन्न प्राशन योजना के तहत एक-एक हजार रुपए लिया गए थे।
महिला बाल विकास परियोजना मझौली द्वारा गत बुधवार अन्नप्राशन कार्यक्रम के तहत सेक्टर सुपरवाइजर मंजू मिश्रा के अगुआई में परियोजना अधिकारी मझौली सुधाकर सिंह के निर्देशन में मड़वास सेक्टर के प्राथमिक शाला रामपुर में एक मीटिंग का आयोजन किया गया था, जिसमें मड़वास सेक्टर अंर्तगत 48 आगनवाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ता उपस्थित रहीं।
दरअसल यह बैठक आंगनवाड़ी केंद्रों मे अति गरीब बच्चों को कड़ाके की ठंड मिटाने के लिए गर्म कपड़े वितरित करने के लिए रखी गई थी। जो नवंबर में प्रत्येक आगनबाड़ी में दर्ज ऐसे दो गरीब निर्धन बच्चों को दी जानी थी, जिनके माता-पिता अपने बच्चों को गर्म कपड़े नहीं खरीद सकते थे। अब सर्दी का मौसम लगभग बीत जाने के बाद एक-एक सेट गर्म कपड़े और मल्टीविटामिन सीरप, आयरन की गोली की एक-एक डिबिया सुपरवाइजर को दी गई। सूत्रों की मानें तो शासन द्वारा गर्म कपड़े वितरण का आदेश दिसंबर-जनवरी माह के दरमियान का था
कपड़ों की क्वालिटी पर भी सवाल
सूत्रों के मुताबिक अक्टूबर 2015 में जिला प्रशासन ने निर्देश दिया था कि तदर्थ समितियों से एक-एक हजार रूपए आहरित कर आगंनबाड़ी केन्द्रों में दर्ज 0-6 वर्ष तक के दो अति गरीब छात्र-छात्राओं को ठंडी से बचने के लिए गर्म कपड़े वितरित किए जाएं। मझौली जनपद के महिला बाल विकास के अधिकारियों द्वारा निर्देश के तत्काल बाद ही समितियों से राशि तो वसूल कर ली गई एवं जिन समितियों द्वारा राशि नही दी गई उनको चिह्नित कर नोटिस भी थमाकर जवाब तलब कराया गया था, कपड़े वितरण का कार्य अब ठंड बीतने के बाद किया जा रहा है। बता दें कि महिला बाल विकास परियोजना मझौली अंतर्गत तेरह सेक्टर व 323 आंगनबाडी केंद्र संचालित हैं और सभी कार्यकर्ताओंं से एक-एक हजार रुपए लिए गए थे। लगभग 100 रुपए कीमत के कपड़े क्रय कर इसमें भी कमीशन लिए जाने के आरोप लग रहे हैं।