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UP Election 2017

नेता जी ने इस बाहुबली को दिया साइकिल का सिंबल, कैंट विधानसभा में अब होगा दंगल!

Updated: IST
सपा के इस बाहुबली के चुनावी दंगल में उतरने से काफी समय से शांत पड़े गैंग फिर से सक्रिय हो सकते हैं।

विनोद निगम

कानपुर. यूपी विधानसभा चुनाव के लिए बुधवार को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह ने अतीक पहलवान को साइकिल का सिंबल देकर चुनावी मैदान में उतार दिया। अतीक के टिकट फाइनल होते ही यह तय हो गया कि गंगा के किनारे बसी कैंट विधानसभा सीट का चुनावी दंगल यूपी की अन्य विधानसभा से कुछ अलग होगा। नेता जी का आशीर्वाद मिलते ही अतीक अहमद ने सबसे पहले टिकट मिलने की जानकारी फजल महमूद को दी। फजल महमूद से अतीक अहमद ने कैंट क्षेत्र की मतदाता सूची, वार्ड संख्या, मोहल्ले, दलित बस्तियां, पॉश इलाकों में रहने वालों के नाम की पूरी सूची बनाकर जल्द भिजवाने के आदेश दिए हैं। सूत्र बताते हैं कि अतीक अहमद बाबूपुरवा में रहकर चुनाव प्रचार करेंगे। यहीं पर एक हाईटेक चुनावी दफ्तर खोला जाएगा। इस दफ्तर में आधा दर्जन कम्प्यूटर के जानकारों को बैठाया जाएगा। कैंट के एक-एक मतदाता पर अतीक इन्हीं के जरिए नजर रखेंगे। साथ ही दो दर्जन कार्यालय अलग से खोले जाएंगे। यहां पर अतीक के खास लोग बैठाए जाएंगे। यह लोग अखिलेश गुट के सपाइयों पर नजर रखेंगे और पल-पल की जानकारी अतीक के भाई अशरफ को पहुंचाएंगे। कार्यालयों में लोकल सपा कार्यकर्ता नहीं होंगे।इलाहाबाद से अतीक की पूरी फौज जनवरी में कानपुर में डेरा जमा लेगी।

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BSP ने की हाई प्रोफाइल बैठक

बीएसपी जिलाध्यक्ष के साथ ही कैंट से कैंडीडेट डॉक्टर असीम अहमद ने कार्यालय में बैठक की। यह बैठक गोपनीय थी, इसमें कल्याणपुर, बिठूर, महाराजपुर, कैंट, सीसामऊ, गोविन्द नगर, किदवई नगर के उम्मीदवारों को बुलाया गया था। बैठक की अध्यक्षता कोआर्डिनेटर नौशाद अली ने की। नौशाद अली ने अतीक को घेरने के लिए खास रणनीति बनाई। कैंट से बसपा के कैंडीडेट डॉक्टर असीम अहमद से नौशाद अली ने कहा कि क्षेत्र में होर्डिंग बैनर लगवाएं और अतीक के एक-एक आपराधिक कारनामों को इसी के जरिए जनता तक पहुंचाएं। सूत्र बताते हैं कि बैनर के जरिए लेदर कारोबारी व टेनरी मालिकों को भी अतीक के इतिहास के बारे में रुबरु कराया जाएगा।

गैंगवार की हो सकती है शुरुआत

अतीक अहमद के कानपुर से चुनावी दंगल में उतरने से काफी समय से शांत पड़े गैंग फिर से सक्रिय हो सकते हैं। चमनगंज निवासी रहमान मलिक ने बताया कि जिस दिन अतीक अहमद कानपुर आए थे क्षेत्र में कई क्रिमिनल खुलेआम चाय और गुटखा की दुकानों में दिखे थे। वहीं टेनरी मालिक ने कहा कि अतीक अहमद के यहां से चुनाव लड़ने से हफ्ता और चंदा देने की परंपरा फिर से शुरु हो सकती है। गीता नगर निवासी समाजसेवी राजेन्द्र खरे ने बताया कि कैंट विधानसभा चुनाव प्रशासन के लिए चुनौती भरा हो सकता है। जिस तरह से अतीक अहमद का अतीत है तो वह चुनाव जीतने के लिए साम, दाम, दंड और भेद सब आजमा सकता है।

चार मुस्लिम चेहरे देंगे असली टक्कर

कैंट विधानसभा चुनाव में अतीक अहमद का असली मुकाबला तो भाजपा के सिटिंग विधायक रघुनंदन भदौरिया से है। लेकिन उसे बसपा के डॉक्टर आसीम अहमद, कांग्रेस के रुस्तम, ओवैसी और सपा के ही पर्वेज अंसारी से पहले असली मुकाबला होगा। कैंट विधानसभा में 3,34,385 लाख मतदाता हैं, जिसमें महिला 1,48,221 और पुरूष 1,86,129 हैं। 2012 विधानसभा चुनाव के दौरान 2,89,750 मतदाताओं ने मत दिया था। 2017 के चुनाव में 44,635 वोटर बढ़े हैं। कैंट में60 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं। अंसारी मतदाता लगभग एक लाख तीस हजार हैं। भाजपा को छोड़कर सभी दलों ने कैंट सेमुस्लिम चेहरे उतारे हैं या उतारने जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि अगर सभी दल ऐसे ही चुनावी मैदान पर डटे रहे तो कमल को खिलने से कोई नहीं रोक सकता। बताया जा रहा है कि अंसारी मतदाताओं के बीच भाजपा कैंडीडेट रघुनंदन भदौरिया की अच्छी पकड़ है। 2012 के चुनाव में इन्हें अच्छा खासा वोट मुस्लिम समुदाय का मिला था।

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