#SpeakUP यूपी में विकास नहीं जातिवाद का बोलबाला : प्रो. वंदना सिन्हा

#SpeakUP यूपी में विकास नहीं जातिवाद का बोलबाला : प्रो. वंदना सिन्हा

 यूपी की गिनती पिछड़े राज्यों में 

वाराणसी. उत्तर प्रदेश, देश का सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है और क्षेत्रफल की दृष्टि से इसका चौथा स्थान है। यूपी सांस्कृतिक रूप से काफी समृद्ध रहा है। संगीत, नृत्य, कला, शिल्प आदि में इस प्रदेश की बराबरी कोई नहीं कर सकता। नगीनाकारी, चिकनकारी, बनारसी सिल्क देश ही नहीं वरन विदेशों में भी मशहूर रहे हैं। विष्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक इमारतें व काशी, प्रयाग जैसे तीर्थ है। 

राजनैतिक रूप से भी यह प्रदेश काफी समृद्ध है, यहां से 80 सीटें लोकसभा और 31 सीटे राज्यसभा की हैं। अब तक 8 प्रधानमंत्री इस प्रदेश ने देश को दिए हैं, लेकिन इन सब के बावजूद यूपी की गिनती पिछड़े राज्यों में होती है और यह राज्य विकास के पैमाने पर पिछड़ा है। विकास के नाम पर यह प्रदेश बेहाल है। इसके पिछड़ने के कई कारण हैं। इन कारणों को हम सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक आदि में विभाजित कर विष्लेषण कर सकते है।

उत्तर प्रदेश में राजनैतिक स्थिरता का अभाव रहा है। यहां जाति के आधार पर राजनैतिक पार्टियां हैं, जो शासन चलाती हैं। अतः विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य करना इन राजनैतिक दलों की प्राथमिकता नहीं होती है। यूपी से सर्वाधिक प्रधानमंत्री हुए, लेकिन राज्य के विकास के लिए ठोस कार्य किसी ने भी नहीं किया। यूपी से लोकसभा व विधानसभा के माननीय सदस्यगण भी प्रदेश के विकास के मुद्दों को अधिक प्रभावशाली तरीके से संभवतः नहीं रख पाते हैं, जिससे विकास योजनाएं प्रदेश तक कम पहुंच पाती हैं।

सामाजिक कारण देखें तो उत्तर प्रदेश हिंदी भाषी क्षेत्र है, परंतु यहां धर्म एवं जाति के आधार पर अनेक स्तरों में विभाजन है। यूपी में बंटा हुआ समाज है, जहां जातिवाद तथा सम्प्रदायवाद का बोलबाला है। प्रदेश में ये चीजे योग्यता व योग्य लोगों पर हावी हो जाती है।

यूपी में शैक्षणिक पिछड़ापन भी है। राज्य में सिर्फ 67.7 प्रतिशत लोग ही साक्षर है, जो कि देश की साक्षरता दर से काफी कम है। इसके अलावा प्रदेष में उच्च तकनीकि षिक्षण संस्थान भी दक्षिण के राज्यों की तुलना में काफी कम है।

यूपी का मुख्य आर्थिक आधार कृषि एवं सेवा संबंधित कार्य हैं। प्रदेश में बड़े उद्योगों की बहुत कमी है, जबकि किसी भी राज्य में आर्थिक समृद्धि उद्योगों से ही आती है।

क्षेत्रवाद, जातिवाद, कार्य संस्कृति का अभाव, कार्य प्रतिबद्धता की कमी, भ्रष्टाचार आदि कारण से भी यहां यूपी विकास के नाम पर बेहाल है।
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