जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति ने सेना के लोगों को कैबिनेट में जगह दी

जिम्बाब्वे के राष्ट्रपति ने सेना के लोगों को कैबिनेट में जगह दी

Prashant Kumar Jha | Publish: Dec, 02 2017 07:49:35 PM (IST) | Updated: Dec, 02 2017 07:49:36 PM (IST) अफ्रीका

सरकारी सूत्रों के मुताबिक उच्च पदों पर तैनात वरिष्ठ सैन्य अफसरों को भी इसमें जगह दी।

हरारे: जिम्मबॉब्वे में सत्ता पटरी पर लौटने के बाद नए राष्ट्रपति इमर्सन म्नांगाग्वा ने शुक्रवार को अपनी कैबिनेट का गठन किया। गठन में राष्ट्रपति म्नांगाग्वा ने सेना के कुछ अधिकारियों को भी इसमें शामिल किया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक उच्च पदों पर तैनात वरिष्ठ सैन्य अफसरों को भी इसमें जगह दी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, म्नांगाग्वा ने जनरल सिबुसिसो मोयो को नया विदेश मंत्री बनाया है। मोयो 14 नवंबर को सेना द्वारा सत्ता पर कब्जे के बाद सरकारी टीवी पर नजर आए थे।

वायु सेना प्रमुख को कृषि मंत्री बनाया गया

जिम्बाब्वे वायु सेना के प्रमुख पेरेंस शिरि को कृषि व भूमि मंत्री बनाया गया है। शिरि 1980 के दशक में राबर्ट मुगाबे के विरोधियों के लिए चलाए गए सैन्य अभियान के लिए कुख्यात हैं। इस अभियान में बीस हजार लोग मारे गए थे। म्नांगाग्वा ने बीते सप्ताह पूर्व राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। रॉबर्ट मुगाबे ने 37 साल के शासन के बाद इस्तीफा दिया था।

इन नेताओं को भी मिली जगह

नए राष्ट्रपति ने मुगाबे के पूर्व के बहुत से कैबिनेट मंत्रियों को कैबिनेट में बनाए रखने का फैसला लिया है। उन्होंने उन सैन्य नेताओं को पद दिए हैं, जो उनका समर्थन करते रहे हैं। मोयो व शिरि के अलावा सेना के दखल के बाद मुगाबे को हटाने में मददगार शक्तिशाली पूर्व युद्ध सैनिकों की एसोसिएशन के नेताओं को भी कैबिनेट में जगह मिली है। एसोसिएशन के प्रमुख क्रिस मुत्सवांग्वा को सूचना मंत्रालय का प्रभार दिया गया है।

राजनीतिक उथल-पथल से मची तबाही
गौरतलब है कि पिछले दिनों जिम्बाब्वे में पूर्व राष्ट्रपति को मुगाबे को सेना ने नजरबंद कर लिया था। सेना ने मुगाबे के परिवार के सदस्यों कों भी गिरफ्तार कर लिया था। दरअसल राष्ट्रपति मुगाबे पर आरोप था कि उप राष्ट्रपति पद पर अपनी पत्नी को बैठाने के लिए राजनीतिक साजिश रची और उप राष्ट्रपति को पद से बर्खास्त कर दिया । जिसके बाद जिम्बाब्वे के सेना प्रमुख ने सत्ता में हस्ताक्षेप भी चेतावनी दी। इसके बाद सत्ताधारी पार्टी ने उनपर देशद्रोह की गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगा दिया।

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