जमानत मिलने पर भी सरेंडर करने पहुंचा बंदी

भवानीमंडी जेल से आरोपी को आगर जेल भेजने की अपेक्षा रिहा कर दिया

By: Gopal Bajpai

Published: 10 Feb 2018, 08:03 AM IST

आगर-मालवा. जेल से जमानत मिलने के बाद कोई व्यक्ति वापस जेल जाने के लिए निवेदन करे और खुद अपनी गिरफ्तारी देने के लिए न्यायालय में सरेंडर करने जा पहुंचे। ऐसा कभी नहीं सुना होगा लेकिन कुछ इसी प्रकार की स्थिति शुक्रवार को दिखाई दी। चोरी सहित अन्य मामलों में आगर जेल के विचाराधीन बंदी को प्रोडक्शन वारंट पर राजस्थान के चौमहेला कोर्ट से आगर जेल से भेजा गया था। वहां से बंदी को पुलिस थाना उन्हेल जिला झालावाडï़ अनुसंधान पर दे दिया। इसी बीच आरोपी के परिजनों ने भवानीमंडी सेशन कोर्ट में जमानत अर्जी लगाई और उन्हेल थाने के प्रकरण में उसे जमानत मिल गई। यहां जवाबदारों ने लापरवाही बरतते हुए आरोपी आगर जेल भेजने की अपेक्षा भवानी मंडी जेल से रिहा कर दिया। अपनी रिहाई से घबराया यह आरोपी सीधे सरेंडर करने के लिए अपने आगर स्थित वकील के पहुंचा। तब उन्हेल पुलिस हरकत में आई और आरोपी को हिरासत लेते हुए आगर जेल में दाखिल किया।
गोकुल पिता बालू निवासी बनसिंह थाना झारड़ा महिदपुर के विरुद्ध बड़ौद थाने पर चोरी का प्रकरण दर्ज था। बड़ौद पुलिस ने बालू एवं उसके साथियों को गिरफ्तार कर आगर न्यायालय में पेश किया था, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जिला जेल आगर भेज दिया गया था। २९ जनवरी को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चौमहेला राजस्थान द्वारा जारी प्रोडक्शन वारंट पर चौमहेला भेजा गया था। आगर पुलिस आरोपी को वहां छोड़कर आई थी जहां से आरोपी को प्रकरण क्रमांक ०३/१८ धारा ३४१ तथा ३८६ के तहतï् उन्हेल थाने में दर्ज प्रकरण अंतर्गत उन्हेल पुलिस को अनुसंधान के लिए सौंप दिया गया था। आरोपी के परिजनों ने भवानीमंडी स्थित सेशन कोर्ट में जमानत अर्जी लगाई तो कोर्ट ने आरोपी को जमानत दे दी।
आरोपी बोला-मुझे आगर भेज दो
भवानीमंडी स्थित जेल में जवाबदारों ने गलफत में आते हुए आरोपी को रिहा कर दिया जबकि आरोपी गोकुल वहां कहता रहा कि मुझे आगर जेल भिजवा दो। पर उसकी किसी ने नहीं सुनी। रिहाई से घबराए गोकुल समझा कि पुलिस उसे अब और अधिक उलझाएगी। इसलिए वह सीधे सरेंडर करने के लिए अपने आगर स्थित वकील राजेश माथुर के पास पहुंचा और वकील के माध्यम से न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष पेश हुआ, लेकिन न्यायिक दंडाधिकारी एक बार आरोपी को जेल भेज चुके थे और उसकी जमानत भी नहीं हुई थी ऐसी दशा में यह मामला वकीलों के बीच सुर्खियों में रहा। आखिरकार उन्हेल पुलिस को सूचना दी गई सूचना मिलते ही आनन-फानन में उन्हेल थाना प्रभारी प्रहलादसिंह चौधरी आगर पहुंचे और आरोपी को अपनी हिरासत में लेकर सीधे जिला जेल आगर में दाखिल कर दिया।
आरोपी गोकुलसिंह को २९ जनवरी को प्रोडक्शन वारंट पर चौमहेला भेजा गया था, जहां से उसे अनुसंधान पर उन्हेल पुलिस के सुपुर्द किया गया था। आरोपी ९ फरवरी को वापस आगर जेल आ चुका है ।
महेश टिकारिया, उप अधीक्षक जेल आगर
गोकुलसिंह के विरुद्ध उन्हेल थाने में प्रकरण दर्ज है और उसी प्रकरण के अंतर्गत पूछताछ के लिए प्रोडक्शन वारंट के तहतï इसकी पेशी हुई थी। पुलिस अनुसंधान बाद आरोपी को न्यायालय के आदेश पर भवानीमंडी जेल भेज दिया था। एडीजे कोर्ट से आरोपी को जमानत मिल गई थी गलफत में आरोपी रिहा होकर आगर तक आ पहुंचा। इसमें पुलिस की कोई भूमिका नहीं है ।
प्रहलाद सिंह चौधरी, थाना प्रभारी उन्हेल
गोकुलसिंह के विरुद्ध आगर न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन है और उसको जमानत नहीं मिली थी और वह आगर जेल में बंद था इसी बीच वारंट पर उसे चौमहेला भेजा गया था। नियमानुसार आरोपी वापस आगर जेल में दाखिल होना था। लेकिन उसे गलफत में रिहाई मिल गई। आरोपी के विरुद्ध ओर कोई अतिरिक्त प्रकरण दर्ज न हो इसलिए इस पूरे घटनाक्रम को मेरे द्वारा आगर न्यायालय के संज्ञान में लाया गया। उन्हेल पुलिस को सूचना देकर उनके सुपुर्द करवाया गया।
राजेश माथुर, अभिभाषक आगर

Gopal Bajpai Editorial Incharge
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