लोकसभा टिकट को लेकर कांग्रेसी बैचेन, सोशल मीडिया पर निकाली भड़ास

लोकसभा टिकट को लेकर कांग्रेसी बैचेन, सोशल मीडिया पर निकाली भड़ास

Harish Divekar | Publish: Mar, 16 2019 06:00:00 AM (IST) Bhopal, Bhopal, Madhya Pradesh, India

दिग्विजय के भाई लक्ष्मण सिंह ने पर्यवेक्षकों पर साधा निशाना, तो पूर्व नेताप्रतिपक्ष बोले पार्टी ने मुझे बनाया फुटबाल

 

लोकसभा चुनाव के टिकटों का दिल्ली में फैसला होने के ठीक पहले कांग्रेस में दिग्गज नेताओं का असंतोष फूट पड़ा है। शुक्रवार को तीन दिग्गज नेताओं ने अपनी पीड़ा जाहिर की। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह ने पार्टी पर्यवेक्षकों की भूमिका को ही कटघरे में ला दिया। जबकि, पूर्व मंत्री मुकेश नायक ने पैसे लेकर पिछले चुनाव में नेता खड़े होने को लेकर पत्र सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने अलग मनचाही सीट नहीं मिलने का दर्द बयां किया। पढि़ए किसका क्या दर्द...

लक्ष्मण सिंह-

सिंह ने ट्वीट में लिखा कि चुनाव से पहले पार्टी के पर्यवेक्षक आ जाते हैं, जो अधिकतर वोट घटा देते हैं। इन्हें देखकर एक फिल्म याद आती है- हम, तुम और वो। हम यानी नेता, तुम यानी पूज्यनीय मतदाता और वो यानी..? लक्ष्मण के इस ट्वीट पर जमकर रिट्वीट भी हुए।

इससे पहले भी लक्ष्मण ने लिखा था कि लोकसभा चुनाव में नया चेहरा जो कभी चुनाव नहीं लड़ा हो उसे अवसर देना चाहिए।

पुराने चेहरों पर दांव खेलना हानिकारक होगा। नेताओं की पत्नियों को लड़ाना तो अत्यंत हानिकारक होगा।

मुकेश नायक-
जातिवाद से मुक्त होकर चुनाव होना चाहिए। पिछले चुनाव में नेताओं ने पैसे लेकर अपने उम्मीद्वार खड़े किए। इसमें नहीं लड़ाने का रेट अलग था। उन्होंने लिखा कि देश की समृद्ध विविधता अगड़े-पिछड़े-दलित में बदल गई है। इसके नेता अपने वर्ग में असुरक्षा जगाकर संगठित करते हैं। फिर संख्याबल के आधार पर हिस्सेदारी मांगने लगते हैं। अब यह हिस्सेदारी स्तरहीन और पैसे पर आधारित हो गई है। पत्रिका से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह पत्र समाज की जागरूकता के लिए है। देश को जातिवाद आधारित चुनाव से मुक्त होना चाहिए।

 

अजय सिंह-

पूर्व नेता-प्रतिपक्ष अजय सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पिछली बार सीधी से टिकट मांगा था, लेकिन सतना से मिला था। अब कही से टिकट मांगने की कोई ईच्छा नहीं रही। फैसला पार्टी पर छोड़ दिया है। पार्टी जहां से कहेगी, वहां से चुनाव लड़ लूंगा। जैसा कहेगी वैसा कर लूंगा, जिधर भेजेगी वहां चला जाऊंगा। फुटबाल की तरह हूं। गौरतलब है कि अजय की हार पिछली बार प्रदेश में सबसे कम ८६८८ वोटों से थी। इसमें भितरघात की आशंका जताई गई थी। इसलिए इस बार अजय सतना से चुनाव नहीं लडऩा चाहते। हाल ही में अजय चुरहट से विधानसभा चुनाव भी हार चुके हैं।

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