पत्रिका के कारण इन ग्रामीणों की सालों पुरानी मुराद हुई पूरी

पत्रिका के कारण इन ग्रामीणों की सालों पुरानी मुराद हुई पूरी

Ashish Sikarwar | Updated: 12 Jun 2019, 10:00:00 AM (IST) Agar Malwa, Agar Malwa, Madhya Pradesh, India

आगर विकासखंड के ग्राम लखमनखेड़ी के ग्रामीण भीषण जल संकट का सामने कर रहे थे। जलसंकट के कारण ग्रामीण और मवेशी मजबूरन एक ही गड्ढे का पानी पी रहे थे ।

आगर-मालवा. आगर विकासखंड के ग्राम लखमनखेड़ी के ग्रामीण भीषण जल संकट का सामने कर रहे थे। जलसंकट के कारण ग्रामीण और मवेशी मजबूरन एक ही गड्ढे का पानी पी रहे थे । जवाबदारों का इस ओर कोई ध्यान नहीं थाद्ध ऐसे में इन ग्रामीणों की पीड़ा की आवाज बना पत्रिका। जब यह मामला पत्रिका ने जिम्मेदारों के सामने लाने के लिए प्रमुखता के साथ समाचार प्रकाशित किया। इसके बाद अधिकारियों ने ग्रामीणों की सुध लेने के लिए मौका मुआयाना किया। उसके बाद मंगलवार को पीएचई ने लखमनखेड़ी से खेड़ा तक पाइप लाइन बिछाकर पानी पहुंचा दिया। पानी मिलते ही ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे। गा्रमीणों ने पत्रिका का तहे दिल से शु्िरया अदा किया।
ग्रामीणों ने पत्रिका को धन्यवाद देते हुए कहा कि यदि पत्रिका नहीं होता तो शायद हमारी आवाज जवाबदार अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाती। पत्रिका ने हमारी आवाज को जवाबदारो तक पहुंचाने का कार्य किया है। पत्रिका हमारी आवाज बना है।
ग्राम पंचायत जेतपुरा के ग्राम लखमनखेड़ी की आबादी करीब ८०० से अधिक है। आबादी का एक हिस्सा गांव के मझरे खेड़ा में रहता है। दोनों ही आबादी क्षेत्र में इन दिनों भीषण जल संकट है। लखमनखेड़ी की बात की जाए तो यहां के सभी हैंडपम्प दम तोड़ चुके हैं। गांव में एक निजी कुआ है जिससे लखमनखेड़ी के ग्रामीणों को पानी मिल रहा है लेकिन वह भी काफी मशक्कत के बाद मिल पाता है। यहां कुआ सिर्फ आधा घंटा पानी देता है उसके बाद उसमे वापस पानी एकत्रित होने के लिए ३ घंटे से अधिक का समय लगता है। ऐसी दशा में आधे से अधिक ग्रामीणों को पानी ही नहीं मिल पाता है। खेतों पर बने कुओं से जैसे-तैसे पानी की पूर्ति की जाती है। खेड़ा में तो दयनीय स्थिति का सामना ग्रामीणों को करना पड़ रहा है। पत्रिका की टीम ने गांव में जाकर वहां के भयावह हालातों का जायजा लिया। मौके पर ग्रामीणों की पीड़ा को महसूस जिम्मेदारों को जगाने के लिए 'कंठ तर करने की पथरीली डगर, शोपीस बने हैंडपंप...Ó शीर्षक से ८ जून को खबर प्रकाशित की थी। उसके बाद ९ जून को जिम्मेदार अधिकारियों ने यहां पर आकर ग्रामीणों की पीड़ा जानी और ग्रामीणों को पेयजल आपूर्ति का आश्वासन दिया। मंगलवार को आखिरकार ग्रामीणों की इस जटिल समस्या का समाधान हो गया। पीएचई ने यहां पाइपलाइन खिचवाकर ग्रामीणों को पानी मुहैया कराना शुरू कर दिया।
इस गांव में नहीं है कोई जलस्रोत
लखमनखेड़ी एवं खेड़ा के बीच करीब 500 मीटर की दूरी है । खेड़ा में पानी का कोई स्रोत नहीं है। खेड़ा एवं लखमनखेड़ी के बीच से निकल रही नदी के एक कोने में इन ग्रामीणों ने गड्ढ़ा कर रखा है। इसे ग्रामीण भाषा में झरी कहा जाता है। इसी झरी से ग्रामीण अपनी प्यास बुझा रहे थे। जिस गड्ढे में मवेशी पानी पीते हैं उसी गड्ढे का पानी ग्रामीणों को भी मजबूरन पीना पड़ रहा था।
प्रतिवर्ष निर्मित होती है समस्या
लखमनखेड़ी के खेड़े में प्रतिवर्ष पेयजल समस्या निर्मित होती है लेकिन जवाबदार अधिकारी-कर्मचारी लखमनखेड़ी एवं खेड़े की दूरी को माध्यम बनाकर इस समस्या को नजर अंदाज कर देते हैं। जवाबदारों का कहना है कि खेड़े में ट्यूबवेल कराए गए लेकिन पानी नहीं निकला। वहीं अधिकारियों का तो यह भी कहना है कि लखमनखेड़ी में भी कोई जल समस्या नही ंहै। 4 हैण्डपम्प चालू हैं लेकिन धरातल पर सभी हैंडपम्प बंद है और एक निजी कुएं के सहारे ग्रामीण पानी हासिल कर रहे हंै। खेड़ा एवं लखमनखेड़ी की दूरी भले ही कम हो लेकिन व्यवहारिक कठिनाइयों का सामना ग्रामीणों को करना पड़ता है। महिलाएं पहाडऩ़ुमा उबड़-खाबड़ रास्ते सूखी टिल्लर नदी पार कर लखमनखेड़ी तक पहुंच तो जाती है लेकिन जब तक ये महिलाएं गांव में पहुंचती हैं वहां के कुए से भी पानी नहीं मिल पाता है।

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