ईको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं घर पर ही बनाएंगे बच्चे

मिट्टी के साथ पूजन सामग्री से देंगे गजाजन को आकार

By: prashant sahare

Published: 18 Aug 2017, 05:48 PM IST

छिंदवाड़ा. प्रथम पूज्य की आराधना के पर्व गणेशोत्सव का बच्चों को खास इंतजार रहता है। आकर्षक और चटक रंगों के साथ गजानन की विभिन्न आकर्षक मुद्राओं की मूर्तियों को खरीदने में उनकी रुचि रहती है, लेकिन दो-तीन वर्ष से शहर के आम नागरिकों के साथ बच्चे भी प्रतिमाओं को लेकर सजग हो गए हैं।


ईको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं को वे स्थापित करने की बात कह रहे हैं।

मिट्टी से गणेश प्रतिमा बनाने के लिए स्कूलों में चलाए पत्रिका के अभियान और इसी के साथ पूजन सामग्री से बनने वाले गजानन को लेकर भी उनमें उत्सुकता है। पत्रिका विभिन्न आकार प्रकार की गणेश प्रतिमाओं को खुद अपने हाथों से तैयार करने की कला सिखाने फिर शहरवासियों के बीच पहुंचने वाला है। स्कूली बच्चों को इस बात का इंतजार हो रहा है कि इस बार फिर मिट्टी और पूजा की सामग्रियों से भगवान की प्रतिमाएं अपने हाथों से वे बनाना सीखें। शहर की विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में पिछले वर्ष पत्रिका ने जो अभियान चलाया बच्चे बेहद सकारात्मक तरीके से उस अभियान से जुड़े।


इन संस्थाओं के संचालकों ने फिर से पत्रिका की टीम को इस बार आमंत्रित किया है। कुछ बच्चे तो ऐसे हैं जिन्होंने पिछले वर्ष प्रतिमा बनाने की तरीके को अपने दिमाग में रखा और इस वर्ष प्रतिमाओं को बनाने और उसे सजाना-संवारना भी शुरू कर दिया है।
इस बार पत्रिका की इस मुहिम से शहर के कई कलाकर भी जुडऩे को आतुर दिख रहे हैं। कला में रुचि रखने वाले युवा स्कूलों और शहर में अन्य स्थानों पर सृजन अभियान में अपनी कला को बच्चों के साथ बांटने पत्रिका के साथ रहने उत्सुक दिख रहे हैं। बच्चों के जुड़ाव और नई कला को सीखने के प्रति उनके लगाव को देखते हुए उनके परिवारजन भी उन्हें प्रेरित कर रहे हैं। इस अभियान के पीछे पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना मुख्य उद्देश्य है।


निशक्त विद्यालय की दिव्यांग बालिकाएं पूजन सामग्री से देती हैं आकार
शहर में शुभम निशक्त विद्यालय की बालिकाएं पूजन सामग्री से भगवान गणेश की एेसी प्रतिमाएं बनाती हैं कि देखने वाले हतप्रत रह जाते हैं। सुपारी, हल्दी गांठ, खारिख के बीज, लौंग का उपयोग तो उनके आकार के लिए होता है तो रंगरोगन के लिए सिंदूर, हल्दी कुमकुम का इस्तेमाल किया जाता है। पूजा के धागे से उनका शृंगार होता है। इन बालिकाओं के प्रतिभा देखकर सभी आश्चर्यचकित भी रहते हैं। इतनी आसानी और सुलभ उपलब्ध होने वाली चीजों से बनने वाली प्रतिमाओं के प्रति लोगों में खास रुचि दिख रही है।

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