बान्द्रा-पटना एक्सप्रेस में ब्लेड से यात्रियों पर हमला कर जेबतराशी

बान्द्रा-पटना एक्सप्रेस में ब्लेड से यात्रियों पर हमला कर जेबतराशी

Sanjeev Kumar Singh | Publish: Apr, 17 2018 10:09:50 PM (IST) Surat, Gujarat, India

सूरत और उधना रेलवे स्टेशनों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्थाओं का अभाव

रोजाना ट्रेन में चढऩे से रह जाते हैं सैकड़ों यात्री

सूरत.

सूरत और उधना रेलवे स्टेशन पर ग्रीष्मावकाश की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था का अभाव देखने को मिल रहा है। अव्यवस्था का आलम यह है कि दानापुर-उधना एक्सप्रेस सोमवार रात को ढाई घंटे देरी से आई और उधना-दानापुर एक्सप्रेस को सवा तीन घंटे देरी से रवाना किया गया। वहीं बान्द्रा टर्मिनस-पटना एक्सप्रेस में सोमवार रात को जेबतराश स्लीपर कोच में चढ़ गए और ब्लेड से यात्रियों पर वार किया। इन्हें रोकने या पकडऩे के लिए सुरक्षा बलों का कोई जवान प्लेटफार्म पर मौजूद नहीं था।

उधना रेलवे स्टेशन से मंगलवार को १९०६३ उधना-दानापुर एक्सप्रेस तीन घंटे पन्द्रह मिनट की देरी से रवाना हुई। वैकेशन के चलते इस ट्रेन में स्लीपर कोच की हालत जनरल कोच से भी खराब दिखी। यात्रियों को कोच में चढऩे के लिए दरवाजे के साथ-साथ आपातकालीन (इमरजेंसी) खिड़की का भी सहारा लेना पड़ा। यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्लेटफार्म पर रेलवे सुरक्षा बल का कोई जवान मौजूद नहीं दिखा। डिंडोली निवासी राज दुबे (१४), मालिक पांडेय (२७), माया देवी (३६) की तत्काल टिकट मंगलवार को उधना-दानापुर एक्सप्रेस के एस-6 कोच में ४९, ५०, ५१ सीट कन्फर्म थी। इन्हें ट्रेन में चढऩे के लिए भारी भीड़ से होकर गुजरना पड़ा। इसी कोच में सीनियर सिटीजन महिला यात्री प्रतिभा पाठक कोच में चढ़ ही नहीं पाईं। उनका पुत्र ट्रेन में बिठाने आया था, लेकिन भीड़ देखकर घबरा गए और काफी प्रयास करने के बाद भी ट्रेन में चढ़ नहीं सके। प्रतिभा ने पत्रिका को बताया कि जनरल कोच से भी खराब हालत स्लीपर कोच की थी। प्लेटफार्म पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रेलवे सुरक्षा बल या रेलवे पुलिस का कोई जवान भी मौजूद नहीं था। उत्तर भारतीय समाज के शशि दुबे ने वृद्ध महिला की मदद के लिए थाना निरीक्षक और उनके वरिष्ठ अधिकारियों को फोन भी लगाया, लेकिन उन्होंने फोन तक नहीं उठाया।
दूसरी घटना सोमवार रात को २२९७१ बान्द्रा टर्मिनस-पटना एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में हुई, जहां तीन जेबतराश कोच में चढ़ गए और यात्रियों का सामान चोरी कर लिया। इसी बीच एक व्यक्ति को संदेह हुआ और उसने चिल्लाना शुरू कर दिया। इसके बाद स्थानीय लोगों ने उन्हें पकडऩे का प्रयास भी किया, लेकिन वह लोग फरार हो गए। यात्रियों का कहना था कि दो जने भाग गए, लेकिन एक संदिग्ध दौड़ते हुए गिर गया और काफी देर तक प्लेटफार्म पर बेहोशी का नाटक करता रहा। स्थानीय लोगों ने इधर-उधर रेलवे सुरक्षा बल या रेलवे पुलिस के जवानों को तलाश किया, लेकिन उनकी मदद के लिए कोई नहीं था। इसके बाद वह प्लेटफार्म पर गिरा हुआ व्यक्ति मौका देखकर वहां से फरार हो गया।

 

दानापुर को सवा तीन घंटे देरी से चलाया
१९०६४ दानापुर-उधना एक्सप्रेस सोमवार रात को उधना स्टेशन पर रात ११.२५ बजे के बजाए ढाई घंटे देरी से रात १.०५ बजे पहुंची थी। इस ट्रेन के देरी से पहुंचने की सूचना मिलने पर मुम्बई मंडल के अधिकारियों ने देर रात को ही कंट्रोल मैसेज पास किया, जिसमें उन्होंने उधना-दानापुर एक्सप्रेस को २ घंटे ५५ मिनट देरी से रवाना करने का निर्देश दिया। इस ट्रेन को रख-रखाव (सर्विसिंग) के लिए सूरत स्टेशन के यार्ड में भेजा जाता है। इसलिए उधना स्टेशन से देर रात २.१५ बजे उधना-दानापुर एक्सप्रेस की रैक को सूरत भेज दिया गया। वाशिंग लाइन यार्ड में ट्रेन का परीक्षण कार्य सुबह साढ़े नौ बजे पूरा हुआ और यह ट्रेन उधना स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या तीन पर ९.५० बजे पहुंची। जबकि ट्रेन को १०.३५ बजे दानापुर के लिए रवाना किया गया। इसमें ट्रेन ढाई घंटे देरी से पहुंची लेकिन उसे सवा तीन घंटे देरी से चलाया। लेकिन रेलवे ने ऑनपेपर २ घंटे ५५ मिनट रीशिड्यूल निर्धारित करने से ट्रेन में चढ़ नहीं सके यात्रियों को फुल रिफंड नहीं मिल सका।

 

आपातकालीन खिड़की से घुसे कोच में
ट्रेन प्लेटफार्म पर आते ही यात्रियों ने कोच में चढऩे की मशक्कत शुरू कर दी। लेकिन भीड़ इतनी थी कि सैकड़ों यात्री ट्रेन में चढ़ नहीं पाए। जनरल, स्लीपर और थर्ड एसी तीनों ही श्रेणियों में पैर रखने तक की जगह नहीं थी। यात्रियों को जहां से जगह मिली वहीं से कोच में घुसते हुए दिखाई दिए। दरवाजे जाम होने के बाद यात्रियों ने आपातकालीन खिड़की को ही कोच में घुसने का जरिया बना लिया। बच्चों को खिड़की से कोच में घुसाने के बाद महिलाओं को मुख्य गेट से चढ़ाने के लिए कई यात्रियों के बीच मारपीट भी हुई। इन सबके बीच प्लेटफार्म पर यात्रियों की सुध लेने वाला रेलवे का कोई अधिकारी मौजूद नहीं था। रेलवे सुरक्षा बल और रेलवे पुलिस के जवान भी प्लेटफार्म से नदारद थे।

 

एक सीट सौ-दो सौ रुपए में बिकी
सूरत और उधना स्टेशन पर यूपी-बिहार की ट्रेनों के जनरल कोच में अनाधिकृत लोगों के द्वारा बिठाए जाने का खेल दोबारा शुरू हो गया है। कुछ निश्चित लोग यात्रियों के वेष में कतार में घुस जाते हैं और ट्रेन आने पर सबसे पहले अंदर प्रवेश कर जनरल सीट रोक लेते हैं। बाद में सीट बेचने वाले यात्री से उसकी जरूरत के मुताबिक प्रति टिकट सौ से दो सौ रुपए वसूल लेते हैं। जनरल कोच में चढऩे के दौरान महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल रहते हैं। कई लोग उल्टी दिशा से ट्रेन में चढऩे का प्रयास करते हैं जिसमें कभी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है। वरिष्ठ नागरिक तथा निशक्तों को वीलचेयर में ले जाने के लिए भी प्लेटफार्म पर जगह नहीं थी।

 

इन क्षेत्रों से आते हैं यात्री
सूरत या उधना स्टेशन से उत्तरप्रदेश और बिहरा जाने वाली ट्रेनों में जिले के अलावा दक्षिण गुजरात के अलग-अलग जिलों से भी श्रमिक गांव जाने के लिए आते हैं। प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को चलने वाली उधना-दानापुर एक्सप्रेस में भरूच, अंकलेश्वर, कोसाड, सायण, उत्राण, सूरत, भेस्तान, सचिन, सचिन, नवसारी, वलसाड और वापी से भी सैकड़ों यात्री आते हैं।

 

जगह नहीं मिलने पर भी टिकट नहीं होती रद्द
सूरत-छपरा ताप्ती गंगा, सूरत-भागलपुर एक्सप्रेस, उधना-दानापुर एक्सप्रेस में यात्रा करने वाले यात्री देर रात को ही दक्षिण गुजरात के अलग-अलग शहरों से सूरत स्टेशन आ जाते हैं। रात बारह बजे के बाद यात्री जनरल टिकट लेने के लिए कतार लगाते हैं। एक-डेढ़ या दो घंटे की मशक्कत के बाद यात्री को जनरल टिकट मिलता है। ट्रेन अगले दिन रवाना होती है, इसलिए तीन घंटे बाद जनरल टिकट रद्द नहीं होती है। भीड़ के कारण ट्रेन में नहीं चढ़ पाने वाले यात्री टिकट रद्द करवाने के लिए करंट टिकट खिड़की पर आते हैं तो क्लर्क नियमों का हवाला देकर टिकट रद्द करने से इनकार कर देता है। इसमें श्रमिक वर्ग गर्मी की छुट्टी में खेती और शादी के लिए गांव जाते हैं।

 

कोच बढ़ाने और ट्रेन की मांग की
ग्रीष्मावकाश की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हॉलि-डे स्पेशल और अतिरिक्त कोच की व्यवस्था की गई है। भीड़ को देखते हुए और ट्रेन की मांग के मद्देनजर मुम्बई रेल मंडल से यूपी-बिहार की ट्रेनों में अतिरिक्त कोच लगाने तथा कोई स्पेशल ट्रेन चलाने की मांग की गई है। वाणिज्य विभाग से रोजाना ट्रेनों के वेटिंग लिस्ट सूची मंडल कार्यालय को भेजी जाती है। कोच की उपलब्धता और पाथ मिलने पर भी मंडल कार्यालय कोई निर्णय करेगा।
सी. आर. गरूड़ा, स्टेशन डायरेक्टर, सूरत

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