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तेन्दुपत्ता की तुड़ाई पर टिकी चार माह की रोटी...पढि़ए पूरी खबर

चालीस पार तापमान से जंगलों में खिला पत्ता,वन विभाग पांच मई से करेगा संग्रहण की औपचारिक शुरुआत

अगार मालवा

Updated: April 30, 2022 09:05:11 pm

छिंदवाड़ा. आगामी 5 मई से पूरे जिले के जंगलों में तेन्दुपत्ता की तुड़ाई शुरू हो जाएगी। इससे वनवासी अपनी चार माह की रोटी का इंतजाम करेंगे। अप्रैल में ही चालीस पार का तापमान होने पर तेन्दुपत्ता जंगलों में बेहतर गुणवत्ता के साथ आया है। इससे वन विभाग के अधिकारी अनुमान लगा रहे हैं कि पिछले साल 2021 से अधिक पत्ता संग्रहण होगा। इससे मजदूरों को अच्छी खासी मजदूरी और बोनस का लाभ होगा।
वन अधिकारियों की मानें तो मार्च के पहले और दूसरे पखवाड़े में तेन्दुपत्ता का शाखकर्तन हुआ था। उसके बाद गर्मी की तीव्रता दिखाई दी। अप्रैल में ही तापमान 42 डिग्री तक पहुंच गया। इससे जंगलों में अपेक्षा से अधिक तेन्दुपत्ता खिला। इससे देखकर वनवासी से लेकर विभागीय अमला खुश हैं। बस वे बारिश न होने की प्रार्थना कर रहे हैं। उनके मुताबिक पिछले साल 2021 में बेमौसम बारिश होने से तेन्दूपत्ता पर्याप्त मात्रा में नहीं आ पाया था और तेन्दूपत्ता की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई थी। फिर भी काफी हद तक लक्ष्य को पा लिया गया था। इस वर्ष 2022 में लक्ष्य से अधिक तेन्दुपत्ता संग्रहित होगा। पत्ता गुणवत्तायुक्त होने के साथ बम्पर उत्पादन आ सकता है। इसकी तुड़ाई के लिए तीन वनमण्डलों में 31 हजार से अधिक परिवार पंजीबद्ध है। जिन्हें तेन्दूपत्ता की मजदूरी से रोजगार मिलेगा। तेन्दूपत्ता की मजदूरी दर 2500 रुपए मानक बोरा बताई गई है।
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लघु वनोपज समितियां की तैयारियां शुरू
तेन्दुपत्ता संग्रहण के लिए लघु वनोपज समितियां तेजी से संग्रहण की तैयारियां कर रही है। परासिया डिवीजन के एसडीओ अनादि बुधोलिया ने कहा कि गर्मी से तेन्दूपत्ता का संग्रहण पहले की अपेक्षा अधिक होने की उम्मीद हैं। समिति स्तर पर पांच मई से तेन्दुपत्ता संग्रहण का काम शुरू हो जाएगा। गौरतलब है कि पूर्व वनमण्डल में 12 प्राथमिक लघु वनोपज समितियां है जिनके माध्यम से 14 हजार मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। इसी तरह दक्षिण में दस समितियों में 15 हजार तथा पश्चिम में आठ समितियों में 15 हजार मानक बोरा का लक्ष्य तय किया गया है।

The season of Tendupatta
The season of Tendupatta

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अचार से लेकर महुआ से चलती है रोजी-रोटी
जंगल वनवासियों की रोजी-रोटी का जरिया है। तेन्दुपत्ता के अलावा जिले के वनक्षेत्र में निवास करने वाले लोगों द्वारा विभिन्न लघु वनोपजों जैसे अचार गुठली, महुआ फूल, बालहर्रा, कचरिया, शहद, लाख, करंज बीज आदि का संग्रहण किया जाता है । ये वनवासी व्यापारियों को वनोपज उपलब्ध कराते हैं। जिससे सालभर उनकी रोजी-रोटी चलती है। लघु वनोपज के संग्रहण के बाद वन विभाग उसे निजी एजेंसियों को पत्ता बेचता हैं। उन्हें हर साल बोनस दिया जाता है। इन लघु वनोपज से लाखों वनवासियों की रोजी-रोटी चलती है।
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इनका कहना है..
पश्चिम वनमण्डल में तेन्दुपत्ता संग्रहण की सभी तैयारियां कर ली गई है। गर्मी के तापमान को देखकर बेहतर उत्पादन और संग्रहण की उम्मीद की जा रही है।
-ईश्वर जरांडे, डीएफओ, पश्चिम वनमण्डल।

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