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निगम में त्राहिमाम्...खाली कुर्सी बढ़ा रही ठेकेदारों और कर्मचारियों का ब्लड पे्रशर

locationअगार मालवाPublished: Feb 01, 2024 11:28:16 am

Submitted by:

manohar soni

राज्य शासन ने नहीं की नियुक्ति, महापौर ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र

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छिंदवाड़ा.नगर निगम में खाली पड़ी आयुक्त की कुर्सी इस समय ठेकेदारों और कर्मचारियों का ब्लड प्रेशर बढ़ा रही है। राज्य शासन ने राहुल सिंह के स्थानांतरण के बाद अब तक किसी दूसरे आयुक्त की नियुक्ति नहीं की है। इससे निगम में निर्माण ठेकेदारों के भुगतान, कर्मचारियों के वेतन तथा डीजल समेत अन्य खर्च के बिल रुक गए हैं। प्रभारी आयुक्त को भी भुगतान से संबंधित आहरण वितरण अधिकार नहीं दिए गए हैं।
इस समय निगम कार्यालय में आयुक्त न होने से सन्नाटा छाया हुआ है। कार्यालय के बाहर इस समय करीब 15 करोड़ रुपए के लंबित बिलों का भुगतान पाने वाले ठेकेदार चक्कर लगा रहे हैं तो अंदर कर्मचारियों के मन में दो माह के वेतन के असंतोष की चिंगारी सुलग रही है। इसके साथ ट्रैक्टरों-सफाई वाहनों में डीजल, स्ट्रीट लाइट के बिजली भुगतान के बेहिसाब खर्च अलग है।
इनके भुगतान पूरी तरह रुक गए हैं। जब तक राहुल सिंह आयुक्त रहे, तब तक कुछ न कुछ भुगतान होता रहा। इसके साथ ही राजस्व वसूली भी कड़ाई से होती रही। अचानक ट्रांसफर से पूरी व्यवस्थाएं चौपट हो गई है। राज्य शासन एक सप्ताह बाद भी अभी तक नई नियुक्ति नहीं कर पाया है। इससे जनप्रतिनिधि, ठेकेदार, कर्मचारी और आम जनता भी परेशान हो रही है।
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जनवरी माह का अंत, दो माह की तनख्वाह शेष
बुधवार को जनवरी माह का अंत हो गया। फरवरी माह लगते ही कर्मचारियों की फिर दो माह की सैलरी बकाया हो जाएगी। आयुक्त के न होने पर फिर कर्मचारी वर्ग चिंतिंत है। नगर निगम के 1900 कर्मचारियों की करीब 3.50 करोड़ रुपए तनख्वाह है। पूरे दस माह में 14 करोड़ रुपए की चुंगी क्षतिपूर्ति राशि कटौती ने अलग निगम की आर्थिक स्थिति बदहाल कर दी है। इसके अलावा बाजार अस्थायी दखल वसूली भी बंद है।
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महापौर ने सीएम से मांगा आयुक्त और बजट
नगर निगम की बदहाल आर्थिक स्थिति को देखते हुए महापौर विक्रम अहके ने सीएम डॉ.मोहन यादव को पत्र लिखते हुए तुरंत कमिश्नर की नियुक्ति और बजट की मांग की। उन्होंने कहा कि नगर निगम कमिश्नर राहुल सिंह राजपूत का स्थानांतरण पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह की निजी स्थापना में निज सहायक के पद पर पदस्थ किया गया है। इस पर वे तुरंत निगम उपायुक्त (वित्त) को प्रभार सौंपकर निगम से रिलीव हो गए। उसके बाद नए कमिश्नर की स्थापना आज दिनांक तक नहीं हो सकी है। इससे निगम के वित्तीय कार्य रूके पड़े हैं। साथ ही निगम के अतिआवश्यक कार्य भी
नहीं हो पा रहे हैं। कर्मचारियों के वेतन का भी भुगतान नहीं हो पा रहा है। इस स्थिति में तुरंत कमिश्नर के साथ बजट भी भेजा जाए।

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