इन बच्चों ने ऐसा क्या काम किया जो समाजजनों ने किया इनका सम्मान

इन बच्चों ने ऐसा क्या काम किया जो समाजजनों ने किया इनका सम्मान

Lalit Saxena | Publish: Sep, 16 2018 10:00:00 AM (IST) Agar, Madhya Pradesh, India

चार्तुमास पर्व के अंतर्गत कठोर तपस्या करने वाले तपस्वियों का वरघोड़ा शनिवार को निकाला गया।

आगर-मालवा. चार्तुमास पर्व के अंतर्गत कठोर तपस्या करने वाले तपस्वियों का वरघोड़ा शनिवार को निकाला गया। सुबह १० बजे वासुपूज्य तारकधाम जैन मंदिर से आरंभ हुए इस चल समारोह में बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए। तपस्वियों को घोड़ा, पालकी एवं हाथी पर बिठाकर निकाला गया। जगह-जगह चल समारोह में शामिल समाजजनों का तथा तपस्वियों का शहरवासियों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। तपस्या के दौर में छोटे-छोटे बच्चों का साहस भी काबिले तारिफ दिखाई दिया। तपस्वियों में तीन तपस्वी बाल्यावस्था के है।
मुनि आदर्शरत्नसागर और साध्वीवर्या गुणज्ञाश्रीजी के सानिध्य में चंदनबाला के अठ्ठम तप, संतिकरन तप, सामूहिक मासक्षमण महामृत्युंजय तप के बाद तपस्याओं के दौर में शनिवार सुबह १० बजे इंदौर-कोटा मार्ग स्थित वासुपूज्य तारकधाम मंदिर से श्रीजी की माल का व सिद्धि तप के तपस्वी हिमांशु नौलखा एवं सामूहिक अठ्ठाई तप 9 उपवास के तपस्वी सौम्य भंडारी, विरम लाड़वाराठौर, वंश घुघरिया, निलेश सुवासरावाला, सोनम घुघरिया, प्रमिला जैन, मंजुला चौधरी, रागिनी कटारिया आदि का वरघोड़ा व प्रभु की भव्य रथयात्रा निकाली गई। यह शहर प्रमुख मार्गों से होती हुई इमलीगली जैन उपाश्रय पहुंची जहां धर्मसभा का आयोजन किया गया।
समाजजनों ने प्रभु के सामने गहुली की
यहां मुनि आदर्शरत्न सागर द्वारा तप के बारे में बताते हुए तप की अनुमोदना की गई। रास्ते में प्रभु के सामने समाजजनों ने गहुली की। अनेक सामाजिक संगठनों एवं समाजजनो ने तपस्वियों का बहुमान किया। गोपाल मंदिर पर महावीर सेवा समिति द्वारा तपस्वियों का बहुमान किया गया। जैन ओसवाल भवन में रथयात्रा के लाभार्थी विमलचंद चांदमल घुघरिया एवं प्रेमचंद नौलखा परिवार द्वारा सकल जैन संघ का साधार्मिक वात्सल्य सम्पन्न हुआ। शाम को मूर्ति पूजक श्रीसंघ का साधार्मिक वात्सल्य के लाभार्थी मनोहरलाल चांदमल, दीपककुमार शांतिलाल भंडारी एवं अशोक कुमार सरदारमल घुघरिया परिवार रहे। जानकारी समाज के अशोक नाहर ने दी।
रसेंद्रिय पर नियंत्रण से करो आत्मकल्याण
जीवों की ४ गति होती है। उसमे एक भी गति ऐसी नही है जिसमें जीव ने आहार ग्रहण नही किया हो। केवल एक मनुष्य गति ऐसी है कि जिस गति में आत्मा स्वेच्छा से आहार एवं रसेंदिं्रय पर नियंत्रण करके परमात्मा महावीर के बताए तप धर्म का अनुसरण करके आत्मकल्याण की ओर विकास कर सकता है यह बात मुनि आदर्शरत्न सागर ने शनिवार को समाजजनों को प्रवचन देते हुए कही।

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