भगवान बनने के लिए 200 लोग कर रहे विशेष अनुष्ठान, देखें वीडियो

भगवान बनने के लिए 200 लोग विशेष अनुष्ठान कर रहे हैं। संगीतमय वातावरण में पीतवस्त्र धारण किए लोग अनुष्ठान में भाग ले रहे हैं

By: Bhanu Pratap

Updated: 07 Jun 2018, 01:07 PM IST

आगरा। क्या कोई व्यक्ति भगवान बन सकता है? जी हां, बन सकता है। विश्वास न हो तो शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, जयपुर हाउस, आगरा जाइए। यहां भगवान बनने के लिए 200 लोग विशेष अनुष्ठान कर रहे हैं। संगीतमय वातावरण में पीतवस्त्र धारण किए लोग अनुष्ठान में भाग ले रहे हैं। इस अनुष्ठान का नाम है सिद्धचक्र महामंडल विधान। तीन जून को शुरू हुआ यह अनुष्ठान 11 जून तक चलेगा। 12 साल पहले यह अनुष्ठान विहर्ष सागर महाराज ने कराया था।

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क्या है मान्यता

जैन धर्म में मान्यता है कि आम आदमी भी भगवान बन सकता है। जब आठ कर्म सिद्ध हो जाते हैं, तो व्यक्ति आत्मस्वरूप बन जाता है। फिर से किसी सांसारिक सुख की चाह नहीं रहती है। व्यक्ति सिद्ध बन जाता है। यही भगवान बनने की प्रक्रिया है।

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क्या है कथानक

जैनधर्म के ज्ञाता विजय स्वरूप जैन ने पत्रिका को बताया- एक राजा की दो पुत्रियां थीं। मैना सुंदरी और सुर संदरी। मैना सुंदरी जैन धर्म को मानती थी। सुर सुंदरी को जैन धर्म से कोई लेना-देना नहीं था। राजा ने अपनी दोनों पुत्रियों से शादी के बारे में पूछा और कहा कि जैसा वर चाहती हो वैसा ही मिलेगा। सुर सुंदरी ने अपने पिता की हां में हां मिलाई। मैना सुंदरी ने कहा कि जो वर मेरे भाग्य में होगा, वही मिलेगा। इस पर राजा क्रोधित हो गया और अपने मंत्री से कहा कि मैना सुंदरी के लिए रोगी वर ढूंढो। मंत्रियों ने पता लगाया कि राजा श्रीपाल कोढ़ी हो गए थे और राजपाट अपने भाई को देकर जंगल में थे। उनके साथ 700 लोग अन्य भी थे। वे भी कोढ़ी थे। राजा ने मैना सुंदर की उससे शादी करवा दी। हालांकि राजा को बाद में पछतावा भी हुआ। मैना सुंदरी अपने भाग्य के साथ चलने लगी। राजा की सेवा करने लगी। एक दिन वह जैन मंदिर गई तो वहां महाराज मिले। उनसे अपने पति के बारे में बताया तो महाराज ने कहा कि यह पूर्व जन्मों के कर्मों के फल है। राजा ने जैन साधु पर थूका था, इसी कारण कोढ़ी बने हैं। फिर महाराज ने सिद्ध चक्र महामंडल विधान की विधि बताई। मैना सुंदरी ने यह अनुष्ठान किया। अनुष्ठान का जल राजा और उसके साथियों पर छिड़कती थी। आठवें दिन राजा समेत सभी 700 लोग रोगमुक्त हो गए। बाद में राजा ने युद्ध करके अपना राजपाट भी हासिल कर लिया। उन्होंने बताया कि जैन धर्म में स्त्री को मोक्ष नहीं मिलता है। उसे पुरुष के रूप में आना होता है, फिर मोक्ष मिलता है। इस प्रक्रिया में मैना सुंदरी ने मोक्ष प्राप्त किया।

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क्या कर रहे हैं

सिद्ध चक्र महामंडल विधान में आठ के गुणक में अर्घ्य चढ़ाया जाता है। अर्घ्य में जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, नैवैद्य, दीप, धूप, फल आदि होते हैं। पहले दिन आठ, दूसरे दिन 16, तीसरे दिन 32, चौथे दिन 64, पांचवें दिन 128, छठे दिन 256, सातवें दिन 512 और आठवें दिन 1024 अर्घ्य चढ़ाए जाते हैं। इस प्रक्रिया में छह से सात घंटे लगते हैं। राकेश भैया के निर्देश में अनुष्ठान किया जा रहा है। 11 जून को प्रातः 5.30 बजे से विश्व शांति महायज्ञ होगा।

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कौन क्या बना है

सिद्ध चक्र महामंडल विधान के लिए नीरज जैन-रुचि सौधर्म इन्द्र, विक्रमचंद जैन-चन्द्रा जैन महायज्ञनायक, विशाल जैन-दीपा जैन कुबेर इन्द्र, पंकज जैन-पूजा जैन चक्रवर्ती, सुरेश चंद जैन-मंजू जैन ईशान इन्द्र, सुरेश चंद जैन-सुनीता जैन माहेन्द्र इन्द्र, दीपक जैन- रश्मि जैन सानत इन्द्र, विवेक जैन- रितु जैन ब्रह्म इन्द्र, महावीर जैन-छवि जैन राजा श्रेयांश बने हैं। विवेक जैन ने बताया कि पूरी निष्ठा के साथ महामंडल विधान चल रहा है। यह सर्वसिद्धकारी विधान है। सिद्ध व्यक्ति ही भगवान बनते हैं।

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