आगरा में लखनऊ की टीम का 'जादू' संदेह के घेरे में, घटी सैंपलिंग, उठे सवाल

-तेजी से बढ़ रहे कोरोना के मामले अचानक कम
-सपा नेता रामजी लाल सुमन ने यूपी सरकार को घेरा

By: Mahendra Pratap

Updated: 23 May 2020, 11:31 AM IST

आगरा. लखनऊ की टीम के आगरा में आने के बाद कोरोना के नए मामलों में आयी कमी से लोग हैरान हैं। वहीं टीम के रवाना होते ही यहां सैंपलिंग प्रक्रिया घट गई है। प्रमुख सचिव व आगरा के नोडल अधिकारी आलोक कुमार ने छह घंटे में कोरोना पॉजिटिव की कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग और सैंपलिंग कर 24 घंटे में रिपोर्ट उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं, लेकिन यहां सैंपलिंग और ट्रेसिंग में 24 से 36 घंटे लग रहे हैं। सैंपल कम लेने से नए मरीज मिलना भी कम हो गए हैं। बीते 10 मई से सैंपलिंग प्रक्रिया में आई इस कमी से संक्रमण की जमीनी हकीकत का पता नहीं चल पा रहा है। इससे लोगों के दिमाग में भी प्रशासन को लेकर तमाम सवाल उठने लगे हैं। हाल ही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व केंद्रीय मंत्री रामजीलाल सुमन ने भी इस मामले में यूपी सरकार को घेरा है।

जानकारी के मुताबिक 11 मई को आगरा में लखनऊ से विशेष विमान से टीम भेजी गई। 11 मई को ही रविवार को जांच के लिए भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट आयी तो नए मरीजों की संख्या 13 हो गई। उसके बाद लगातार नए मरीजों का आंकड़ा 4 से 13 के बीच ही रहा। जबकि इससे पहले तक मरीजों की संख्या ने 40 का आंकड़ा भी पार किया है। टीम के आते ही अचानक नए संक्रमितों की संख्या में आयी कमी देखकर लोग हैरान थे।

32 से सात पर आ गई संख्या :- एसएन और जालमा में रोजाना 350 सैंपल की जांच करने की क्षमता है, इसके बावजूद सैंपलिंग बहुत कम की जा रही है। 25 अप्रैल से लेकर नौ मई तक 3963 लोगों के सैंपल लिए गए। यानी औसतन रोज 264 मरीजों की सैंपलिंग की गई। जबकि 10 मई से 21 मई के बीच सिर्फ 2152 सैंपल लिए गए। यानी रोज औसतन 179 मरीजों के सैंपल लिए गए। सैंपल कम होते ही संक्रमितों का आंकड़ा भी कम हो गया। 25 अप्रैल से लेकर नौ मई तक 15 दिनों में कुल 437 मरीज मिले यानी औसतन 32 मरीज रोजाना मिले, जबकि 10 मई से 21 मई तक 12 दिनों में कुल 82 नए मामले सामने आए यानी औसतन 7 मरीज रोजाना। अचानक आंकड़े कम होने से लोगों के मन में संदेह की स्थितियां पैदा हो गईं और तमाम सवाल उठने लगे।

सपा नेता ने सरकार को घेरा :- समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व केंद्रीय मंत्री रामजीलाल सुमन ने भी आगरा में अचानक कोरोना के मामले कम होने को लेकर सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि आगरा में मुख्यमंत्री की टीम आने के बाद अचानक कोरोना के आंकड़े कम हो गए? निजी लैब में अचानक क्यों कोरोना जांच बंद कर दी गई? उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि आंकड़ों में कमी आयी है, आंकड़ोंं को व्यवस्थित तरीके से कम किया गया। लेकिन तथ्य छिपाने से महामारी और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि मृतकों के आंकड़े छिपाना और जो लोग जांच कराना चाहते हैं, उनकी जांच को टालना, ये किसी भी हाल में न्याय संगत नहीं है।

डीएम का कहना :- वहीं इस मामले में आगरा के डीएम पीएन सिंह का कहना है कि पहले केस अधिक मिल रहे थे इसलिए उन सभी के कॉन्टेक्ट सैंपलिंग होती थी। मामले ज्यादा थे इसलिए उनके संपर्क में आए लोग ज्यादा थे। सैंपल ज्यादा थे। लेकिन अब नए केस कम हैं, इसलिए सैंपलिंग भी कम है। अब स्मार्ट सैंपलिंग हो रही है। पॉजिटव की कॉन्ट्रेक्ट ट्रेसिंग से पहले उसका घर सेनिटाइज कराया जाता है। 18 घंटे से पहले सैंपलिंग हो जाती है। सुचिता मिश्रा

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