2030 तक भारत मधुमेह की राजधानी और मोटापा वाला देश बन जाएगा

एपीकॉन 2020 में मधुमेह, ह्रदय रोग सहित गैर संचारी रोगों की रोकथाम और इलाज पर हुई चर्चा
देश विदेश से जुटे डॉक्टरों ने दवाओं से ज्यादा रोकथाम पर दिया जोर, 2030 तक बिगड जाएंगे हालात

आगरा। मधुमेह, ह्रदय रोग, घुटनों में दर्द, गुर्दा रोग, फैटी लिवर की समस्या की जड़ मोटापा है। भारत में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। 2030 तक भारत मधुमेह की राजधानी और मोटापा वाला देश बन जाएगा। एसोसिएशन ऑफ फिजीशियन ऑफ इंडिया के 75वें वार्षिक सम्मेलन एपीकॉन में पहले दिन सोमवार को ब्रज और मुगलिया थीम पर सजाए गए होटल केएनसीसी फतेहाबाद रोड पर मधुमेह, ह्रदय रोग सहित गैर संचारी रोगों की रोकथाम और इलाज पर चर्चा की गई।

शुरू हुए वैज्ञानिक सत्र
यहां नौ जनवरी तक आयोजित एपीकॉन में देश विदेश के 12 हजार से अधिक चिकित्सक चर्चा करेंगे। एपीकॉन सिटी में एपीकॉन में वैज्ञानिक सत्र का शुभारंभ सुबह 8.30 बजे डॉ. एमसी गुप्ता ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। यहां 12 हॉल में एक साथ वैज्ञानिक सत्र शुरू हुए। एसोसिएशन ऑफ फिजीशियन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. केके पारीक ने बताया कि पिछले कुछ सालों में हर तीसरा मरीज हाई ब्लड प्रेशर का शिकार हो रहा है और मधुमेह चार गुना तक बढ़ गया है। यह आराम तलब जीवनशैली और खूब खाना, वह भी मैदा और पैक्ड फूड खाने से हो रहा है। 10 से 15 साल की उम्र में बच्चे मोटापे के शिकार हो रहे हैं। खेलकूद गतिविधि खत्म हो गई हैं। बच्चे और बड़े मोबाइल पर लगे रहते हैं। इससे मोटापा बढ़ रहा है और हालात भयावह होते जा रहे हैं। इन हालातों में भारत जैसे देश में दवाओं से ज्यादा जीवनशैली में बदलाव की जरूरत है। डॉ. जीएस वंडर ने मधुमेह के मरीजों में हार्ट डिजीज और हार्ट फेल्यर पर व्याख्यान दिया। डॉ. बीएन पटेल ने इंसुलिन इनीशिएशन, डॉ. प्रभात पांडेय ने टीबी की नई दवाओं पर चर्चा की।

चोरी होने पर चल रहा पता
एपीकॉन के आयोजन सचिव डॉ. पीके माहेश्वरी ने बताया कि मधुमेह, ह्रदय रोग हर व्यक्ति के स्वास्थ्य के चोर हैं लेकिन पता नहीं चलता है। चोरी होने यानी हार्ट अटैक पडने, ब्रेन स्ट्रॉक होने पर इसका पता चलता है। तब तक देर हो चुकी होती है। एपीकॉन में गैर संचारी रोगों की रोकथाम के लिए मरीज और लोगों को जागरूक करने पर भी चर्चा की जा रही है। बताया कि ब्लड प्रेशर के साथ अलग-अलग बीमारियों पर अलग-अलग दवाएं देने के लिए एपीआई की गाइड लाइन जनरल में प्रकाशित होने वाली हैं। मसलन बीपी के साथ यदि किडनी की समस्या है या फिर शुगर की या हृदय रोग हैे। सभी स्थिति के लिए अलग-अलग दवाएं हैं। जो मरीजों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगी।

वजन कम करने की गलत दवा हो रहीं घातक
एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर के डॉ. सीएल नवल ने बताया कि मोटापा के शिकार लोग वजन कम करने के लिए कई तरह की दवाएं ले रहे हैं। ये दवाएं वजन कम करने के साथ मानसिक स्वास्थ्य को बिगाड़ रही हैं। इससे सुसाइड के केस भी बढ़े हैं। वजन कम करने की कई दवाएं बंद कर दी गई हैं। मगर, नई दवा आ गई हैं, ये दवाएं बीएमआई 30 होने पर दी जा रही हैं। बीएमआई 40 होने के साथ अन्य बीमारी होने पर मोटापा कम करने के लिए सर्जरी की जरूरत होती है। यह भी दो तरह से की जा रही हैं, एक में अमाशय का आकार कम कर दिया जाता है, इससे तीन महीने में 42 फीसद तक वजन कम हो रहा है। दूसरी तकनीकी में फैट को अवशोषित करने की क्षमता खत्म कर दी जाती है। इससे खाने के साथ शरीर में पहुंचा फैट बाहर निकल जाता है लेकिन इसकी कुछ सीमाएं हैं।

आगरा के डॉक्टरों के नाम पर बनाए गए हॉल
एपीकॉन में हॉल आगरा डॉक्टरों के नाम पर बनाए गए हैं। डॉ. एसके माथुर, डॉ. एमपी मल्होत्रा, डॉ. एनएन गुप्ता, प्रो. एमसी गुप्ता, डॉ. एनएल पटनी, डॉ. केएन गौर, डॉ. जीपी इन्हलेंस हॉल, डॉ. जीएन व्यास हॉल, डॉ. ब्रज किशोर हॉल बनाए गए हैं।

देश विदेश से जुटे चिकित्सक
एपीकॉन में देश विदेश से चिकित्सक जुटे हैं, 30 देश के चिकित्सक एपीकॉन में शामिल होने के लिए आए हैं। विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न बीमारियों पर एक हजार से अधिक व्याख्यान दिए जा रहे हैं। मेडिकल विद्यार्थियों द्वारा 1200 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं।

Show More
धीरेंद्र यादव
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned