फिर गीत गा जाइये, हे अटल फिर से आ जाइये

फिर गीत गा जाइये, हे अटल फिर से आ जाइये

Bhanu Pratap Singh | Publish: Sep, 16 2018 11:49:57 PM (IST) Agra, Uttar Pradesh, India

कविताओं के माध्यम से दी अटल जी को श्रद्धांजलि

आगरा। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की मासिक पुण्य तिथि पर आज सभी विधानसभा क्षेत्रों में काव्यांजलि कार्यक्रम में कविताओं के माध्यम से अटल जी को श्रद्धांजलि दी गई। एक शाम अटल जी के नाम में कविताओं द्वारा जहाँ अटल जी की कविताओं का पाठ किया गया, वहीं कवियों ने प्रेरणा लेकर स्वरचित कविताओं का पाठ भी किया।

शब्दों से वर्णन संभव नहीं

आगरा दक्षिण विधानसभा में काव्यांजलि कार्यक्रम गुलाब वाटिका नॉर्थ ईदगाह कॉलोनी पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ अटल जी के चित्र पर पुष्प अर्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर मुख्यवक्ता आचार्य हरिओम, विधायक योगेन्द्र उपाध्याय, महानगर अध्यक्ष विजय शिवहरे, बृजक्षेत्र उपाध्यक्ष प्रमोद गुप्ता ने किया। मुख्य वक्ता आचार्य हरिओम ने अटल जी के जीवन और कृतित्व पर बोलते हुए कहा विरोधी भी चादर ढ़कर अटल जी को सुनने जाते थे। अटल जी के बारे में शब्दों से वर्णन सम्भव नहीं है ।

 

आज भी हमारे बीच

विधायक योगेन्द्र उपाध्याय ने काव्यांजलि कार्यक्रम का विषय रखते हुए कहा कि अटल जी उदार हृदय के साथ-साथ अटल निर्णय के धनी और प्रखर राजनेता के साथ-साथ प्रखर वक्ता, प्रखर कवि, प्रखर सम्पादक के रूप में विश्वभर में धाक जमाने वाले एकमात्र व्यक्तित्व थे। उनसे देश के करोड़ों कार्यकर्ता प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में जुटे हैं। अटल जी न कभी हारे और न कभी थके। हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानुँगा, काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूँ, गीत नया गाता हूँ, गीता नया गाता हूँ.. जैसी कविताओं के माध्यम से आज भी वे हमारे बीच में हैं ।

कवियों ने दी श्रद्धांजलि

कवि राजबहादुर ने स्वयं रचित मुक्तक और छन्दों के द्वारा अटल जी को श्रृद्धांजलि दी। कवि शिवशंकर बहल ने गीत नहीं गाता हूँ, बेनकाब चेहरे हैं, दाग बड़े गहरे हैं, टूटता तिलिस्म आज, सच से भय खाता हूँ.. कविता का पाठ किया। कवि अमीआधार निडर ने गीत नया गाता हूँ, अटल जी की कविता और स्वयं रचित मुक्तकों के द्वारा अटल जी को श्रद्धांजलि दी । कवयित्री रुचि चतुर्वेदी ने स्वयं रचित कविताओं के माध्यम से श्रद्धांजलि देते हुए श्रोताओं को भावुक कर दिया। कवि योगी सूर्यनाथ ने कहा- फिर गीत गा जाइये, हे अटल फिर से आ जाइये, मिलकर देते हैं सब, तुमको श्रद्धासुमन। कवि पदम गौतम ने कहा- मैं भारत की माँटी को वंदन करता हूँ, लहरों में डूब जायें, किनारा नहीं होता ।

ये रहे मौजूद

काव्यांजलि कार्यक्रम में ब्रजक्षेत्र मीडिया सम्पर्क प्रमुख के0के0 भारद्वाज, सुनील कर्मचंदानी, लोकेश शर्मा, रितेष शुक्ला, मंगल सिंह, मनेाज वर्मा, राजीव लवानिया, पिंकी सक्सैना, ग्रीस भारद्वाज, वीरेन्द्र श्रीवास्तव, शिवकुमार राजौरा, अनीता खरे, अनुराग चतुर्वेदी, कन्हैयालाल कुशवाहा, उमेश पेरवानी, जगदीश उप्रैती, उषा शर्मा, मंजू वाश्र्णेय, सुनील उपाध्याय आदि सहित कार्यकर्ता एवं अटल प्रेमी मौजूद रहे। काव्यांजलि कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व महापौर इंन्द्रजीत आर्य एवं संचालन दीपक खरे ने किया।

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