बाल गृह की चारदीवारी में रहने वाले बेसहारा बच्चे भी अब ग्रहण कर सकेंगे शिक्षा, देखें वीडियो

बाल गृह की चारदीवारी में रहने वाले बेसहारा बच्चे भी अब ग्रहण कर सकेंगे शिक्षा, देखें वीडियो
बाल गृह

Dhirendra yadav | Updated: 11 Jul 2019, 11:20:30 AM (IST) Agra, Agra, Uttar Pradesh, India

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के हस्तक्षेप के बाद अब होगा इन बच्चों का बाहर के स्कूल में एडमिशन

आगरा। बाल गृह की चारदीवारी के पीछे जीवन व्यतीत करने वाले बच्चों को अब बाहरी दुनिया देखना का अवसर मिलेगा। ये बच्चे भी साधारण बच्चों की तरह स्कूल जा सकेंगे। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के हस्तक्षेप के बाद राजकीय बाल गृह के 13 बच्चों का सरकारी स्कूल में एडमिशन कराया गया है। ऐसा पहली बार हुआ है कि बाल गृह के बच्चों का किसी बाहरी स्कूल में दाखिला हुआ है।

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यहां है राजकीय बाल गृह
विष्णु काॅलोनी शाहगंज स्थित राजकीय बाल गृह में ऐसे बच्चे रहते हैं, जिनके माता-पिता नहीं हैं अथवा उन्होंने उनको छोड़ दिया है। यहां दस वर्ष तक की आयु के बच्चों को रखा जाता है। सरकार द्वारा उनका पालन पोषण किया जाता है। महफूज सुरक्षित बचपन संस्था के समन्वयक नरेश पारस ने पांच साल पूर्व इन बच्चों में शिक्षा की ललक पैदा की थी। इन बच्चों को पढ़ाने के लिए अपने अथक प्रयासों से बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा एक शिक्षा मित्र नियुक्त कराया जो बाल गृह आकर इन बच्चों को नियमित पढ़ा रहा है लेकिन इस पढ़ाई से बच्चों को कक्षा का प्रमाण पत्र नहीं मिल रहा था। आगे बढ़ने के लिए कक्षा का प्रमाण पत्र होना बहुत जरूरी है। इसी उद्देश्य से नरेश पारस ने बीएसए के माध्यम से बाल गृह के सामने सरकारी स्कूल में आठ बच्चों का दाखिला कराया जो पढ़ने जाने लगे। बड़े होने पर दो बालिकाओं का कानपुर तथा एक बालक का फिरोजाबाद के बाल गृह में स्थानांतरण कर दिया गया।

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देखना चाहते हैं बाहर की दुनिया
बाल गृह के अन्य दस बच्चे जिनकी आयु दस वर्ष से अधिक थी, वो भी बाहर के स्कूल में पढ़ने जाना चाहते थे। वो भी बाहर की दुनिया देखना चाहते थे। वो भी बाहर के दोस्त बनाना चाहते थे। बाल गृह के कर्मचारियों ने स्कूल में बच्चों का दाखिला कराने का प्रयास किया लेकिन स्कूल प्रधानाचार्य ने यह कहकर दाखिला देने से इंकार कर दिया कि उनके यहां स्टाफ कम है। इस पर नरेश पारस ने बीएसए तथा जिलाधिकारी को पत्र लिखे लेकिन फिर भी दाखिला नहीं हो सका। नरेश पारस ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग को पत्र लिखा। इस पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने जिलाधिकारी आगरा को पत्र लिखकर बच्चों को दाखिला दिलाने के निर्देश दिए।

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इन बच्चों को मिलेगा एडमिशन
बाल आयोग के हस्तक्षेप पर शैक्षिक सत्र 2019-20 में एक जुलाई 2019 को बाल गृह के दस बच्चे जिनकी उम्र पांच वर्ष से अधिक है, का प्रवेश श्रीराम प्रसाद कन्या पाठशाला रामपुरी शाहगंज आगरा में करवा दिया गया। साथ ही मानसिक रूप से अविकसित/मंदबुद्धि बालक बालिकाओं को स्वाबलंबी बनाने के उद्देश्य से शाहगंज स्थित आध्यांत फाउंडेशन फाॅर आॅटिज्म स्कूल में तीन बच्चों का प्रवेश दिलाया गया है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों को बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा नियुक्त शिक्षा मित्र रजनीश सिंह द्वारा अनौपचारिक शिक्षा प्रदान की जा रही है। वर्तमान में संस्था मेे कुल 42 बच्चे आवासित हैं, जिनमें से विद्यालय जाने योग्य बच्चों को संस्था से बाहर भेजा जाता है तथा शेष बच्चों को संस्था परिसर में शिक्षा मित्र द्वारा शिक्षित किया जाता है। बाल गृह का सुरक्षा गार्ड बच्चों को स्कूल छोड़ने और लेने जाता है। बच्चे अपने जैसे अन्य बच्चों से मिलकर बहुत खुश हैं। वो उनसे बाहरी दुनिया के रोचक किस्से सुनते हैं और घर परिवार की जानकारी लेते हैं।

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