बाल श्रम के दलदल में फँसे बच्चों को बाहर निकालने पर मंथन

बिल्डिंग एंड वुड वर्कर (बीडब्लूआई) की दो दिवसीय कार्यशाला में बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने पर चर्चा

By: Bhanu Pratap

Published: 18 Dec 2018, 07:11 PM IST

आगरा। सरकार कई प्रोग्राम चला रही है, लेकिन बाल श्रम का दंश बढ़ता ही जा रहा है। देश के भविष्य कहे जाने वाले इन बच्चों के भविष्य को सुधारने के लिए फतेहाबाद रोड स्थित होटल गंगारत्न में बीडब्लूआई की दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। इस चर्चा में उत्तर प्रदेश, पंजाब और बिहार के साथ नेपाल के वो प्रतिनिधि शामिल हुए, जो बाल श्रम और श्रमिकों की दिशा और दशा को सुधारने के लिए कार्य कर रहे हैं।

यहां था आयोजन
बिल्डिंग एंड वुड वर्कर (बीडब्लूआई) की दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ होटल गंगारत्न में उत्तर प्रदेश ग्रामीण शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष तुलाराम शर्मा ने किया। बीडब्लूआई के साउथ एशिया के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. राजीव शर्मा ने आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। बताया गया कि आज किस प्रकार बाल श्रम के दलदल में बच्चे फंसते जा रहे हैं। इनकी हालत को कैसे सुधार जाए, इस पर चर्चा होनी चाहिए। सरकारों को ध्यान देना चाहिए, क्योंकि आज के बच्चे कल देश का भविष्य हैं।

tularam sharma

ये बोले वक्ता
उत्तर प्रदेश ग्रामीण मजदूर संगठन के अध्यक्ष तुलाराम शर्मा ने कहा कि सरकारों द्वारा इन बच्चों के लिए योजनाएं तो तमाम चलाई जा रही हैं, लेकिन इनका प्रचार प्रसार न होने से इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरकारों को जिम्मेदार संगठन के साथ मिलकर ऐसे बच्चों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए ठोस रणनीति तैयार करनी चाहिए, जिससे इन श्रमिकों के अधिकार सुरक्षित हो सकें।

शिक्षा के अधिकार में तमाम समस्या
बीडब्लूआई की शिक्षा अधिकारी प्रेरणा प्रसाद ने बताया कि शिक्षा के अधिकार कानून में तमाम विसंगतियां हैं। राइट टू एजूकेशन के मापदंड जो हैं, उन पर समय समय पर नजर नहीं रखी जा रही है। सरकार ने गरीब बच्चों के लिए 25 फीसद का निजी स्कूलों के लिए कोटा तो कर दिया है, लेकिन ये योजना सही ढंग से लागू नहीं हो पा रही है। इसके अलावा तमाम विसंगतियां हैं, जो गरीब के बच्चों की शिक्षा में बाधा बन रही हैं।

 

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