तिरंगे में लिपटकर आया शव, रो पड़ा पूरा गांव

तिरंगे में लिपटकर आया शव, रो पड़ा पूरा गांव

Abhishek Saxena | Publish: Sep, 02 2018 03:47:17 PM (IST) Agra, Uttar Pradesh, India

पुणे खिड़की इलाके में सूबेदार पद से रिटायर्ड डिफेंस सिक्योरिटी कोर में तैनात हवलदार की मौत

आगरा। साल 1981 में जब बाचाराम पुत्र राजाराम सेना में भर्ती हुए थे तो उन्हें जम्मू कश्मीर में तैनाती मिली थी। इस दौरान उन्होंने कई बार दुश्मन के दांत खट्टे किए। सेना से कई मेडल भी मिले और 2005 में सूबेदार पद से रिटायर हुए। इसके बाद भी देश सेवा का जज्बा कम नहीं हुआ और उन्होंने डिफेंस सिक्योरिटी कोर में हवलदार के पद पर नौकरी की। पुणे के खिड़की इलाके में तैनात बाचाराम की आंत के इंफेक्शन के चलते मृत्यु हो गई। इसके बाद उनका शव आगरा के उनके गांव विक्रमपुर लाया गया। जहां उन्हें अंतिम विदाई दी गई।

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डिफेंस सिक्योरिटी कोर ज्वाइन की, 15 अगस्त को कराया था भर्ती
बाचाराम ने डिफेंस सिक्योरिटी कोर ज्वाइन की इसके बाद वे पुणे में तैनात थे। बताया गया है कि 15 अगस्त को उन्हें आंत में इंफेक्शन हो गया। जिसके बाद उन्हें पुणे क कमांड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार हुआ। लेकिन, दूसरे आॅपरेशन के बाद उनकी मृत्यु हो गई। सेना की यूनिट बाचाराम का तिरंगे में लिपटा शव लेकर पहुंची तो उनके अंतिम दर्शन को आसपास के गांवों के लोग भी पहुंचे गए। घर के पास ही खेत में उनका अंतिम संस्कार किया गया। यहां पर उनकी यादों का स्मारक बनाने का निर्णय लिया गया, जिसमें उनकी वीरगाथा अंकित होगी।

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बच्चों की इच्छा कि सेना में जाकर करें देश सेवा
उनकी पत्नी मीरा ने बताया कि 28 अगस्त को फोन पर हुई थी। बाचाराम के पुत्र विपिन, भोला और पुत्री आरती हैं। बाचाराम के बड़े भाई शिवकुमार भी सेना में थे। बाचाराम के पुत्र और पुत्रियों ने सेना में जाकर देश सेवा करने का संकल्प लिया है।

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