अकबर के ख्वाबों की नगरी, फतेहपुर सीकरी

15 वर्षों में योजना तैयार करके बनवाया था अकबर ने।

By: suchita mishra

Published: 27 Apr 2017, 05:40 PM IST

आगरा। फतेहपुर सीकरी आगरा से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित है। हिंदू और पारसी  वास्तुकला के समावेश को संजोए फतेहपुर सीकरी में जैसे ही आप प्रवेश करते हैं, आपके दिमाग में तमाम सवाल खलबली मचाने लगते हैं। बेहद खूबसूरत और लाल पत्थरों से निर्मित इस नगरी को क्यों बसाया गया? यह इतने कम समय में वीरान क्यों हो गया? वगैरह वगैरह। हम आपको बताते फतेहपुर सीकरी से जुड़े कई रोचक तथ्य—

अकबर को ऐसे आया महल बनाने का खयाल

दरअसल मुगल बादशाह बाबर ने राणा सांगा को सीकरी नमक स्थान पर हराया था और इस जगह​ पर अपना अधिकार कर लिया। कहा जाता है कि एक बार अकबर संतान प्राप्ति की अर्जी लेकर अजमेर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह गए। जाते समय सीकरी में अकबर की मुलाकात सूफी फकीर शेख सलीम चिश्ती से हुई। फकीर ने अकबर से कहा बेटा तू मेरे ठहरने का बंदोबस्त कर दे, तेरी मुराद पूरी होगी। उस समय अकबर ने उनका इंतजाम सीकरी में ही करवा दिया। कुछ समय बाद अकबर बेगम जोधाबाई गर्भवती हो गईं, अकबर ने उन्हें फकीर के पास ही भेज दिया। जोधा को पुत्र हुआ। उसके बाद 
अकबर ने खुश होकर कहा कि जहां मेरे पुत्र ने जन्म लिया, मैं वहां एक नगर बसाउंगा। उसके बाद फतेहपुरी सीकरी को बनाने की योजना तैयार हुई।  


Fatehpur Sikri

नगर की योजना में लगे 15 साल

फतेहपुर सीकरी को अकबर के सपनों का नगर कहा जाता है क्योंकि इसे उन्होंने पूरी लगन से बनवाया था। ​इसकी योजना को तैयार करने में ही उन्हें 15 वर्ष लग गए। फतेहपुर सीकरी के निर्माण से पहले मुगलों की राजधानी आगरा थी लेकिन इसके बाद अकबर ने राजधानी को नए नगर में स्थानांतरित कर लिया था। 1571 से 1585 तक फतेहपुर सीकरी मुगलों की राजधानी रही। पहले इसका नाम फतेहबाद था, लेकिन 1573 में अकबर ने यहीं से गुजरात को फतह करने के लिए कूच किया था। गुजरात पर विजय पाकर लौटते समय उसने सीकरी का नाम ‘फतहपुर’ यानी विजय नगरी रख दिया। जिसे आज हम फतेहपुर सीकरी के नाम से जानते हैं। लेकिन इस क्षेत्र में पानी की किल्लत और कुछ अन्य राजनीतिक कारणों के चलते अकबर यहां लंबे समय तक नहीं रह पाए और 1585 में इसे छोड़कर लाहौर को राजधानी बना लिया।

पर्यटकों को लुभाती ये जगह

बुलंद दरवाजा : इसका निर्माण बादशाह ने गुजरात विजय के उपलक्ष्य में करवाया था। यह 176 फुट ऊंचा दरवाजा एशिया का सबसे ऊंचा दरवाजा है। दरवाजे पर कुरान की आयतों को बड़े अरबी अक्षरों में उकेरा गया है। 

दीवान-ए-खास : फतेहपुर सीकरी में ही अकबर ने नवरत्न नियुक्त किए थे। वे अक्सर दीवान—ए—खास में  नवरत्नों से मंत्रणा करते थे। बाहर से एक मंजिला दिखने वाली ये ​इमारत अंदर से दो मंजिला है। 

दीवान-ए-आम : यहां अकबर जनता दरबार लगाते थे। उनकी फरियाद और शिकायतों का समाधान यहीं बैठकर करते थे। 

ख्वाब महल : यहां वे शयन करते थे। इसी महल में तानसेन और बैजूबावरा का संगीत सुना करते थे। 

Fatehpur Sikri

पंचमहल : पांचमंजिला बनी इस इमारत का लुत्फ वे शाम को उठाते थे।यह इमारत 176 खंभों पर टिकी है। प्रत्येक खंभे पर अलग अलग कलाकृति देखने को मिलती है। साथ ही खम्भों पर बना प्रत्येक मंजिल का कमरा नीचे वाली मंजिल के कमरे से आकार में छोटा है। इसका उपयोग शाही हरम में रहने वाली महिलाओं के विलास और मनोरंजन के लिए किया जाता था।  

हिरन मीनार इमारत : यहां हिरन के सींगों की तरह उभरे हुए पत्थर पर्यटकों के आकर्षण का विषय हैं।

शेख सलीम चिश्ती की दरगाह : शेख सलीम चिश्ती की दरगाह सफ़ेद संगमरमर से बनी है। इसका निर्माण 1581 में पूरा हुआ था। यहां देश-विदेश से श्रद्धालु आकर मज़ार के दर्शन करते हैं। यहां की नक्काशीदार खिड़कियों में लाल धागा बांधकर वे मन्नत मांगते हैं। खासतौर पर यहां संतान प्राप्ति की कामना की जाती है। 

जोधाबाई का महल : इस महल में अकबर की हिंदू रानियां रहती थीं। इस में हिंदुओं और मुस्लिमों की शिल्पकला का सुंदर संयोजन देखने को मिलता है। 

 

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