बाह और पिनाहट में पानी की दहशत, टीलों पर खड़े होकर गुजारी रात

बाह और पिनाहट में पानी की दहशत, टीलों पर खड़े होकर गुजारी रात
Flood in Chambal

Dhirendra yadav | Updated: 18 Aug 2019, 06:18:23 PM (IST) Agra, Agra, Uttar Pradesh, India

-कोटा बैराज से रविवार को भी छोड़ा गया पानी
-एक दर्जन गांवों का सम्पर्क मार्ग पानी में डूबा
-घरों में घुसा पानी, स्टीमर सेवा चालू की गई

आगरा। राजस्थान और मध्य प्रदेश में भारी बारिश के चलते चम्बल नदी उफान पर है। पिनाहट और बाह के गांवों में दहशत है। शनिवार की रात चंबल का जलस्तर खतरे के निशान को छू चुका है। दर्जनभर गांवों के संपर्क मार्ग पूरी तरीके से डूब चुके हैं। घरों में भी पानी घुसने लगा है। ग्रामीणों ने ऊंचे टीलों पर खड़े होकर दहशत भरी रात गुजारी। करीब आधा दर्जन गांवों की बिजली भी काट दी गई है। अंधेरे में डूबे रहे ये गांव सीमित राशन और पानी के भरोसे हैं। हालांकि प्रशासन ने की टीम भी गांव का निरीक्षण कर रही हैं। गोहरा, गुड़ा, रानीपुरा, भटपुरा में वन विभाग के स्टीमर सेवा चालू कर दी गई है। स्टीमर के सहारे इन गांवों में डॉक्टर की टीम जरूरी सामान केरोसिन आदि की व्यवस्था की गई है। कछियारा, रेहा, बीच का पुरा, उमरैठा पुरा आदि गांव मैं भी प्रशासन की टीम चौकी बनाकर निगरानी कर रही है।

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जलस्तर और बढ़ा
चंबल नदी में चारों तरफ पानी पानी नजर आ रहा है। किसानों की हजारों बीघा फसल जलमग्न हो गई है। टीलों पर चढ़कर रात गुजारने को मजबूर किसान और दहशत के बीच शनिवार को फिर से 9682 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। रविवार की शाम चम्बल में पिनाहट तक पहुंच गया। इसके साथ ही तटवर्ती गांवों में खतरा और बढ़ गया। पहले से ही चंबल का पानी खतरे के निशान को छू चुका है। ऐसे में और तेजी से आ रहे पानी से चंबल में क्या हालात होंगे इसे सोच कर ग्रामीण दहशत में हैं। प्रशासन के भी हाथ-पांव फूले हुए हैं ।

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घरों में कैद
आगरा जनपद के बाह क्षेत्र के गोहरा, गुड़ा, रानीपुरा, भटपुरा, उमरैठा पुरा, बीच का पुरा, रेहा, कच्छीआरा, डोंगरा गांव में ग्रामीणों के साथ साथ स्कूल जाने वाले मासूम बच्चे भी घरों में कैद हो गए हैं। उन्होंने पहली बार अपने आशियाने के आसपास इतना भीषण पानी देखा है। अजय कुमार और प्रदीप कुमार ने बताया कि पूरी रात यह नौनिहाल जागते रहे इन गांवों में चारों ओर से पानी भर गया है। अब तो घर में भी पानी आना शुरू हो गया है। बड़ी मेहनत से ग्रामीणों ने चंबल के तटवर्ती क्षेत्र में बाजरे की फसल बोई थी। फसल पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। ऐसे में चंबल के जलीय जीवों के गांवों में घुसने के आसार बन गए हैं। लोगों में इसको लेकर भी दहशत का माहौल है। रात भर लाठी-डंडों क्लारी को हाथ में लेकर अपने पशु और बच्चों की रखवाली करते नजर आए।

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रविवार को भी पानी छोड़ा गया
बाह के उप जिलाधिकारी महेश प्रकाश गुप्ता ने बताया कि चंबल नदी में रोजाना लगातार राजस्थान के कोटा बैराज से पानी छोड़ा जा रहा है, नदी में पानी बढ़ने की संभावना है। गुरुवार को 113000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। शुक्रवार को 9618 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। रविवार को भी कोटा बैराज से करीब 7000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। कोटा बैराज से लगातार छोड़े जा रहे पानी से चंबल में और हालात बिगड़ने की संभावना है। पहले से ही यह गांव पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में हैं। ऐसे में लगातार पानी छोड़े जाने पर गांवों में हालात और खराब होंगे। प्रशासन द्वारा तटवर्ती इलाकों में लेखपालों एवं ग्राम पंचायत सचिवों को चौकियां बनाकर तैनात किया गया है। चंबल के जलस्तर पर निगाह बनाने के साथ ग्रामीणों को सुविधा मुहैया कराने के लिए निर्देशित किया गया है। खेड़ा राठौर के गांव गोहरा में चंबल के पानी से गांव का रास्ता बंद हो जाने के कारण प्रशासन द्वारा स्टीमर संचालन किया गया है। प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है। जिन गांवों से तहसील मुख्यालय से संपर्क कट गया है, उनका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी तैनात की गई है।

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