वर्ष में एक बार खुलते हैं इस हनुमान मंदिर के कपाट 

  वर्ष में एक बार खुलते हैं इस हनुमान मंदिर के कपाट 
Hanuman jayanti

आगरा के वजीरपुरा क्षेत्र में प्राचीन सिद्ध हनुमान मन्दिर के कपाट 200 वर्ष से सिर्फ हनुमान जयंती पर ही खुलते हैं।

आगरा। संकटमोचन, बजरंगबली, मंगलकारी, पवनपुत्र, अंजनी के लाला और श्री राम सेवक समेत न जाने कितने ही नामों से पूजे जाने वाले महाबली हनुमान जी के वजीरपुरा क्षेत्र में प्राचीन सिद्ध हनुमान मन्दिर के कपाट 200 वर्ष से सिर्फ हनुमान जयंती पर ही खुलते हैं।

250 वर्ष से पुराना है ये मंदिर 
वजीरपुरा स्थित श्री सिद्ध हनुमान मंदिर का निर्माण करीब ढ़ाई सौ साल पहले हुआ था। पहले मुगल और फिऱ अग्रेजी हुकुमत से हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए इस हनुमान मंदिर का निर्माण किया गया था। लेकिन इसकी महत्ता 1900 के बाद से ज्यादा बढ़ी। 1930 में जब अंग्रेजों का अत्याचार बढ़ा और उन्होंने भारतीयों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था तो इस मंदिर के पास बने अखाड़े पर युवा और क्रांतिकारी पूजा करने के बहाने जुटकर क्रांतिकारी रणनीतियों को तैयार किया करते थे।

राणा प्रताप के परिवार की पीढ़ियां रहीं यहां
मन्दिर के महंत बिजेंद्र उर्फ़ कल्लो गुरु के अनुसार मन्दिर का इतिहास राणा प्रताप के जन्म से भी पहले का है और सिर्फ उनके परिवार की पांच पीढ़ियां इस मन्दिर की सेवा में समय बिता चुकी हैं। पहले यहां अखाड़ा था, जिसमें शारीरिक सौष्ठव और मल्ल युद्ध कला सीखने के साथ क्रान्तिकारियों का भी ठिकाना था। आजादी के बाद सन् 1950 के बाद से यहां अखाड़ा खत्म हो गया।

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सिर्फ हनुमान जयंती पर खुलते हैं द्वार
मन्दिर के कपाट बन्द रहने के पीछे महंत कल्लो गुरु  का कहना है कि दुनिया में इतना पाप है कि लोग इनके पास आते ही भस्म हो जाएंगे। इसी सोच के लिए सिर्फ हनुमान जयंती पर ही मन्दिर में सबको प्रवेश है अन्य दिनों में बाहर से ही दर्शन किये जा सकते हैं।

वर्षों से होता रहा संगीत महोत्सव 
महोत्सव की 2005 में छपी किताब रुद्रावतार अमृत महोत्सव के अनुसार 1930 में क्रान्तिकारियों ने स्थायी मंच के निर्माण की जरूरत को देखते हुए यहां सालाना दो दिनी हनुमान जयंती संगीत महोत्सव की शुरुआत की। 86 वर्ष पहले यहां श्री हनुमान जयंती संगीत समारोह का आयोजन शुरू हुआ जिसमें सूफी संगीत की बयार बहती रही है। स्व कृष्ण दत्त पालीवाल, स्व ब्रजनाथ गोस्वामी के सहयोग से शुरू हुए इस उत्सव में प्रसिद्द कलाकार प्रेम गुप्ता, उस्ताद फैयाज खां, कत्थक नृत्याचार्य गुरु जितेंद्र महराज जैसे कलाकारों का आगमन हो चुका है। हालांकि दो वर्ष से ये संगीत महोत्सव का आयोजन बंद हो चुका है।

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इस बार हनुमान जयंती पर है विशेष संयोग  
मान्यता है कि एक बार जो इस मंदिर में आता है। उसकी सारी मनोकामनाएं खुद ही पूरी हो जाती हैं। इस बार की बात की जाये तो हनुमान जंयती पर 12 साल बाद विशेष संयोग बन रहा है। चंद्र ग्रहण मुक्त होने के साथ चैत्र शुक्ल पक्ष पूर्णिमा शुक्रवार को होने वाली इस जंयती पर ब्रज योग, सिद्ध योग और राजयोग बनने के साथ ही उधा के सूर्य, उधा के शुक्र और सिंह राशि के गुरू तथा चंद्र व सूर्य की परस्पर दृष्टि बन रही है। ये विशेष योग 12 साल बाद बन रहा है।
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