किशोर विद्यार्थियों को पढ़ाने से पहले उनके मनोविज्ञान को जानें शिक्षक, देखें तस्वीरें

किशोर विद्यार्थियों को पढ़ाने से पहले उनके मनोविज्ञान को जानें शिक्षक, देखें तस्वीरें
Prelude public school

Bhanu Pratap Singh | Updated: 14 Jul 2019, 07:58:00 AM (IST) Agra, Agra, Uttar Pradesh, India

-किशोर अवस्था बचपन और व्यस्कता के बीच एक संक्रमणकालीन चरण

-प्रिल्यूड पब्लिक स्कूल दयालबाग में किशोर शिक्षा कार्यक्रम पर कार्यशाला

-राष्ट्रीय किशोर शिक्षा कार्यक्रम की राष्ट्रीय वक्ता गीतांजलि कुमार ने सिखाए गुर

आगरा। किशोर अवस्था एक व्यक्ति के जीवन की बहुत ही विशेष होती है। जहाँ एक व्यक्ति आत्म पहचान की भावना को मानता है और उत्साह, आदर्शवाद, आत्म संदेह और चिन्तासहित भावनाओं के असंख्य चिह्नों के द्वारा चिह्नित किया जाता है। यह कहना है श्रीमती गीतांजलि कुमार का। वे प्रिल्यूड पब्लिक स्कूल में शिक्षण एवं प्रशिक्षण आयाम के तहत कार्यशाला को संबोधित कर रही थीं। इस कार्यशाला का विषय किशोर शिक्षा कार्यक्रम था।

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कार्यशाला का उद्देश्य

कार्यशाला में अतिथि वक्ता के रूप में श्रीमती गीतांजलि कुमार को आमंत्रित किया गया। गीतांजलि कुमार एक बहुचर्चित परामर्शदात्री एवं मोटिवेशनल स्पीकर हैं। वर्तमान में वे मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा एम. एच. आर. डी.- एनसीईआरटी- यूएनएफपीए के संयुक्त तत्वाधान में संचालित राष्ट्रीय किशोर शिक्षा कार्यक्रम हेतु राष्ट्रीय वक्ता के रूप में कार्यरत हैं। इस कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को किशोर अवस्था के छात्र-छात्रओं को सटीक आयु के अनुरूप एवं सांस्कृतिक दृष्टि से संगत शिक्षा प्रदान करने हेतु प्रशिक्षत करना था। कार्यशाला का शुभारम्भ अतिथि वक्ता को विद्यालयी परम्परा का निर्वहन करते हुए विद्यालय निदेशक डॉ. सुशील गुप्ता द्वारा नवांकुर भेंट कर स्वागत के साथ हुआ।

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शिक्षक समझें

कार्यशाला के प्रथम सत्र में अतिथि वक्ता गीतांजलि कुमार ने बताया कि किशोर अवस्था बचपन और व्यस्कता के बीच एक संक्रमणकालीन चरण हैं और कई शारीरिक, भावनात्मक, संज्ञानात्मक, और व्यावहारिक परिवर्तनों की विशेषता है। अतः इस आयु वर्ग के छात्र-छात्राओं को शिक्षा प्रदान करने हेतु शिक्षकों को उस आयु वर्ग के मनोविज्ञान को जानना नितांत आवश्यक है।

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किशोर मूल्यवान संसाधन

द्वितीय सत्र में गीतांजलि कुमार ने विभिन्न गतिविधियों एवं क्रियाकलापों के माध्यम से विभिन्न शिक्षणविधियों को कक्षा कक्ष में प्रयोग में लाने के लिए प्रेरित किया। आगे उन्होंने बताया किशोर शिक्षा कार्यक्रम विद्यालयों में गुणवत्ता सुधार के लिए एक बड़ी पहल है। किशोर अवस्था शिक्षा के मार्गदर्शक सिद्धांत स्पष्ट रूप से बताते है कि किशोरों को एक सकारात्मक और मूल्यवान संसाधन के रूप में पहचाना जाना चाहिए जिसे एक समस्या के रूप में मानने के बजाय सम्मान और सराहना की आवश्यकता है। कार्यक्रम विद्यालय प्राचार्या श्रीमती याचना चावला के कुशल निर्देशन में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती मोना काबरा ने किया। कार्यक्रम प्रभारी श्रीमती सबीने बैजल के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यशाला का समापन हुआ।

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