भारत और हिमालय क्षेत्र के देशों के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आगरा में

-हिमालय-हिन्द महासागर और दुनिया के देशों के बीच लंबे समय से खोए हुए संबंधों का पता लगाएंगे
-पूर्वी अफ्रीका के तटीय देश, भारतीय क्षेत्र तक, अरब, श्रीलंका, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया से प्रतिनिधि आएंगे
-जल संकट, प्रदूषण, वन संरक्षण, मानव-तस्करी और आतंकवाद जैसे वैश्विक मुद्दों पर बहुपक्षीय सहयोग की तलाश

आगरा। राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच (FANS) के राष्ट्रीय महासचिव गोलोग बिहारी ने बताया कि नए भारत (India) के उदय और विश्व मंच पर इसके निहितार्थ के महत्व पर विचार-विमर्श के लिए आगरा में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 28 एवं 29 सितम्बर 2019 को आयोजित करने जा रहा है। यह सम्मेलन विविध विषयों पर समुद्री मार्गों के अध्ययन से संबंधित विषयों पर केंद्रित होगा। यह न केवल महासागर के पार के देशों के बीच वर्तमान संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि सहयोग के नए पुलों और निरंतर संबंधों और बातचीत के लिए एक मिसाल कायम करेगा। इस सम्मेलन के माध्यम से हिमालय-हिन्द महासागर (Himalaya-Indian Ocean ) और दुनिया के देशों के बीच लंबे समय से खोए हुए संबंधों का पता लगाने और उनके बीच सहयोग और विनिमय के नए रास्ते पर विचार-विमर्श किया जाएगा। सम्मेलन में बहुआयामी हिमालय-हिन्द महासागर की दुनिया का चित्र स्पष्ट होगा।

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आठ विषयों पर होगा मंथन
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि हिन्द महासागर में सांस्कृतिक, वाणिज्यिक और धार्मिक संबंधों की विविधता का दस्तावेजीकरण करने के लिए पुरातात्विक और ऐतिहासिक शोध का आयोजन, पूर्वी अफ्रीका के तटीय देशों से लेकर भारतीय क्षेत्र तक, अरब प्रायद्वीप, श्रीलंका, इंडोनेशिया, आस्ट्रेलिया तक के लिए होगा। इस सम्मेलन के माध्यम से हम विभिन्न माध्यमों को समझाने का भी प्रयास करेंगे, जिनके माध्यम से भारतीय संस्कृति विदेशों में फैले और भारत और हिमालय क्षेत्र के देशों के बीच व्यापार की मात्रा में वृद्धि हो।

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दो दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन कुछ प्रमुख मुद्दों पर चर्चा और विचार-विमर्श को केंद्रित किया जाएगा।
1.उन समुद्री व्यापार मार्गों की पहचान, जिसके माध्यम से व्यापारी गए और हिमालय और हिन्द महासागर क्षेत्र में भारतीय संस्कृति का प्रसार करने वाले पहले सांस्कृतिक राजदूत बने।
2.हिन्द महासागर क्षेत्र में भारतीय संस्कृति के प्रसार में प्राचीन विश्वविद्यालयों, शिक्षकों और मिशनरियों की भूमिका का विश्लेषण ।
3.एशिया सहित ऑस्ट्रेलिया व अफ़्रीकी हिन्द महासागर तटीय देशों में भारतीय संस्कृति के प्रसार तथा शांति के धर्म के रूप में कई देशों में बौद्ध धर्म के प्रसार का विश्लेषण। तथा इन देशों की भाषा और साहित्य पर संस्कृत भाषा के प्रभाव का अध्ययन करना।
4.भारत सहित हिमालय-हिन्द महासागर चक्रीय देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग पर विचार तथा महत्वपूर्ण अवसरों की खोज और हिमालय-हिन्द महासागर क्षेत्र के देशों के साथ भारत के व्यापार संबंधों की चुनौतियों के समाधान हेतु विचार करना।
5.हिमालय-हिन्द महासागर क्षेत्र के देशों के लिए संभावित भविष्य के परिदृश्य और इन देशों के साथ भारत के सहयोग का संभावित मॉडल क्या हो सकता है।
6.समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा साथ ही व्यापार और निवेश सुविधा तथा शैक्षणिक, विज्ञान और तकनीकी सहयोग तथा पर्यटन प्रोत्साहन पर विचार विमर्श।
7.जल संकट, प्रदूषण, वन संरक्षण, मानव-तस्करी और आतंकवाद जैसे वैश्विक मुद्दों से निपटने में बहुपक्षीय सहयोग की तलाश करना।
8.सामाजिक और आर्थिक समस्याओं के लिए नवीन विचारों का आदान-प्रदान तथा पड़ोसी देशों के विकास में भारत की भूमिका पर विचार।

भारत कभी खतरा नहीं बना
राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच आगरा चैप्टर के अध्यक्ष स्क्वाड्रन लीडर एके सिंह ने कहा कि भारत महाभारत काल से व्यावसायिक रूप से बाहरी दुनिया के संपर्क में था। भले ही भारत तीन तरफ से समुद्र और उत्तर में हिमालय से घिरा हो, लेकिन यह रचना भारतीयों को दुनिया के बाकी हिस्सों के साथ बातचीत करने में रुकावट नहीं बनी। वास्तव में वे दूर-दूर व्यापार करने गए और बदले में इन दूर देशों से घर के विचारों, छापों, रीति-रिवाजों और परंपराओं को भी लाए। हालांकि, इस संपर्क का सबसे उल्लेखनीय पहलू दूनिया के विभिन्न हिस्सों में, विशेष रूप से सम्पूर्ण एशिया में भारतीय संस्कृति और सभ्यता का प्रसार रहा है। इस प्रसार में जो सबसे उल्लेखनीय है, वह यह है कि भारतीय किसी व्यक्ति या समाज के जीवन पर विजय या खतरा नहीं बनता था, बल्कि भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों की स्वैच्छिक स्वीकृति की छाप छोड़ता था। आगरा इस ऐतिहासिक सम्मेलन में आने वाले लोगों के स्वागत के लिए तैयार है।

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संबंधों को मजबूत करेंगे
राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के राष्ट्रीय सचिव डॉ. रजनीश त्यागी ने कहा कि हमारा उद्देश्य हिमालय-हिन्द महासागर क्षेत्र के देशों के बीच संबंधों को मजबूत करना है। उन सभी के साथ जुड़ने के लिए इतिहास और जीवन मूल्यों को साझा किया जा रहा है। भारत के साथ वाणिज्य और व्यापारिक संबंधों की बहुत लंबे समय तक अनदेखी की गई। 21 वीं सदी को एक एशियाई शताब्दी मानते हुए, भारत इस भविष्यवाणी को एक वास्तविकता बनाने में सबसे आगे है तथा यह कांफ्रेंस मील का पत्थर साबित होगी।

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नया इतिहास रचेगा
राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के महासचिव इंजीनियर दिवाकर तिवारी ने बताया कि 2024 में 5 ट्रिलियन यूएस डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दृष्टि के साथ नए भारत (प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शुरू की गई अवधारणा) ने एक संकेत भेजा है कि यह दुनिया के सभी देशों के साथ व्यापार के लिए खुला है। यह प्रधानमंत्री के द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों और योजनाओं जैसे मेक इन इंडिया, कौशल भारत आदि में भी देखा जा सकता है। भारत में विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने और आने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए प्रधानमंत्री ने पूरे विश्व में संदेश दिया है और एक स्पष्टता का संदेश दिया है। भारत के साथ व्यापार करने के लिए दुनिया को बुलाना है। यह सम्मेलन इस दृष्टिकोण से आगरा में एक नया इतिहास रचेगा और उत्तर प्रदेश की धरती पर अपने तरह का एक विशेष आयोजन होगा। इस दौरान कर्नल जी.एम. खान, समाजसेवी रविंद्र पाल सिंह टिम्मा, डॉ. अमी आधार निडर जी उपस्थित रहे।

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धीरेंद्र यादव
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