बुआ बबुआ गठबंधन को मिली जीत के बावजूद भाजपा संभालेगी इस पद की कमान

बुआ बबुआ गठबंधन को मिली जीत के बावजूद भाजपा संभालेगी इस पद की कमान

Abhishek Saxena | Publish: Mar, 14 2018 05:23:58 PM (IST) | Updated: Mar, 14 2018 05:27:05 PM (IST) Agra, Uttar Pradesh, India

सालों से जिला पंचायत अध्यक्ष पद से दूर रही है भारतीय जनता पार्टी, निर्विरोध चुने गए अध्यक्ष को भाजपा ने दिया है समर्थन

आगरा। गोरखपुर और फूलपुर के उपचुनाव में भले ही बुआ और बबुआ का जादू चला हो लेकिन, जिला पंचायत के चुनाव में करारी हार झेलनी पड़ी। आगरा में जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर काबिज होने में भाजपा को दो दशक लंबा इंतजार करना पड़ा है। हालांकि यहां निर्विरोध चुने गए अध्यक्ष को भाजपा ने अपना समर्थन दिया है। निर्विरोध चुने गए अध्यक्ष राकेश बघेल की औपचारिक घोषणा 15 मार्च को प्रशासन द्वारा की जाएगी। बता दें कि अध्यक्ष का पद सपा का तख्ता पलट कर भाजपा समर्थित अध्यक्ष ने कब्जाया है।

सत्ता बदली तो बदले गए जिपंअ
सत्ता परिवर्तन का सीधी असर जिला पंचायत के पदों देखने को मिला है। पिछले कुछ सालों की बात की जाए तो ऐसा ही देखने को मिला है। जब बहुजन समाज पार्टी सत्ता में थी, तब बसपा का जिपंअ बना। इसके बाद सपा सत्ता में आई तो अविश्वास प्रस्ताव से कुर्सी छीन ली गई। अब भाजपा की सरकार है तो सपा की कुर्सी से तख्ता पलटकर भाजपा ने इस पद पर कब्जा किया। भारतीय जनता पार्टी के सबसे कम कार्यकाल के अध्यक्ष रमेश वमा्र रहे थे। वे सिर्फ 16 दिन इस पद पर रहे। गौरतलब है कि जिला पंचायत अध्यक्ष का पद आजादी से पहले बना था। तब अध्यक्ष का कार्यकाल एक साल का था। अब तक 18 जिला पंचायत अध्यक्ष रहे। भारतीय जनता पार्टी को पहलीबार इस चुनाव में 1969 में जीत मिली थी, जब रमेश वर्मा 16 दिन के लिए अध्यक्ष बने थे। इसके बाद 1995 में जीत हासिल हुई थी। उस समय चंदन सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष चुने गए। वहीं प्रेम कुमारी परमार ने भाजपा की पहली महिला जिला पंचायत अध्यक्ष बनी थीं। प्रेम कुमारी परमार का नाम उन नामों में भी शामिल है, जिन्होंने पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा किया था।

15 मार्च को घोषणा करेगा जिला प्रशासन
जिला पंचायत अध्यक्ष के पद के लिए भारतीय जनता पार्टी ने राकेश बघेल को अपना समर्थन दिया है। 15 मार्च को इस पद पर राकेश बघेल की औपचारिक घोषणा जिला प्रशासन द्वारा की जाएगी। भाजपा को फूलपुर और गोरखपुर में हार का सामना करना पड़ा है। वहीं दूसरी ओर जिला पंचायत अध्यक्ष पर निर्विरोध मिली जीत कुछ मैली सी पड़ गई है।

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