पांच हजार साल पुराने शिव मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खुले, शुरू हुआ मेला

पांच हजार साल पुराने शिव मंदिर के कपाट भक्तों के लिए खुले, शुरू हुआ मेला

Abhishek Saxena | Publish: Aug, 13 2018 08:39:40 AM (IST) Agra, Uttar Pradesh, India

प्राचीन कैलाश मंदिर में स्थापित हैं दो शिवलिंग, यमुना किनारे स्थित है कैलाश मंदिर

आगरा। पांच हजार साल पुराने शिव मंदिर के कपाट शिवभक्तों के लिए खुल गए। कैलाश महादेव का मेला शुरू हो गया। शिवभक्तों का तांता लगा हुआ है। बता दें कि इस ऐतिहासिक शिवमंदिर में यमुना के किनारे बने कैलाश मंदिर में दो शिवलिंग हैं। सोमवार सुबह तीन बजे से मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएंगे और देर रात सोमवार को महाआरती के बाद कपाट बंद होंगे।

कैलाश महादेव और बम बम भोले से गूंजा मंदिर
सोमवार सुबह कैलाश मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। इस दौरान महादेव और बम बम भोले की के जय जयकारों से मंदिर परिसर गुंजायमान हो गया। महंत महेश गिरी ने बताया कि इस मंदिर की स्थापना स्वयं महर्षि परशुराम ने की थी। कैलाश से लाए गए शिवलिंग यहां स्थापित हो गए।डीएम एनजी रवि कुमार ने कहा कि मेले भारतीय संस्कृति का प्रतीक हैं। इन मेले के माध्यम से भाईचारा और सद्भावना का संदेश मिलता है।

महादेव का श्रृंगार
मंदिर के पुजारी गौरव गिरी का कहना है कि सोमवार सुबह तीन बजे कैलाश महादेव का श्रृंगार करके मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए। इसके बाद कांवड़ियों और श्रद्धालुओं का रेला शुरू हुआ। भक्त भोलेनाथ का जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी आदि से अभिषेक करने उमड़ रहे हैं। उन्हें बेल पत्र, धतूरा आदि अर्पित से प्रसन्न कर रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था के तहत कैलाश मंदिर, मेला परिसर और यमुना के घाटों पर पुलिस बल तैनात है। मंदिर के अंदर व्यवस्था संभालने के लिए पुजारी परिवार की ओर से करीब 20 से 25 लोग रहेंगे।

मंदिर की स्थापना बढ़ाती है इसकी महिमा
मंदिर में स्थापित दो शिवलिंग मंदिर की महिमा को और भी बढ़ा देते हैं। महर्षि परशुराम के पिता जमदग्नि ऋषि का आश्रम रेणुका धाम भी यहां से पांच से छह किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार इस मंदिर का अपना अलग ही एक महत्व है। त्रेता युग में भगवान् विष्णु के छठवें अवतार भगवान् परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि कैलाश पर्वत पर भगवान शिव की आराधना करने गए। दोनों पिता-पुत्र की कड़ी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान मांगने को कहा। इस पर भगवान परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि ने उनसे अपने साथ चलने और हमेशा साथ रहने का आशीर्वाद मांग लिया। कभी-कभार जब यमुना का जल-स्तर बढ़ा हुआ होता है और यमुना में बाढ़ की स्थिति होती है तो यमुना का पवित्र जल कैलाश महादेव मंदिर के शिवलिंगों तक को छू जाता है।

Ad Block is Banned