यहां एक नहीं, दो शिवलिंग, पढ़िए रोचक कहानी

यहां एक नहीं, दो शिवलिंग, पढ़िए रोचक कहानी
kailash mahadev

दर्शन मात्र से हर मनोकामना होती है पूरी।

आगरा। पावन यमुना जी के किनारे भगवान शिव ने अपना धाम बनाने की इच्छा स्वंय जाहिर की। हम बात कर रहे हैं त्रेता युग की। भगवान परशुराम के आग्रह पर भगवान भोलेनाथ उनके साथ आगरा आए। यहां यमुना किनारे वे स्वंय ही विराजमान हो गए। इसके बाद यहां पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया। खास बात ये है कि यहां दो शिवलिंग हैं। महर्षि परशुराम और उनके पिता जमदग्नि को कैलाश पर्वत से भगवान शिव ने दो शिवलिंग प्रदान किए थे। वे ही दो शिवलिंग यहां विराजमान हैं। 

ऐसे यमुना किनारे हुई स्थापना
कहा जाता है कि त्रेतायुग में महर्षि परशुराम और उनके पिता जमदग्नि ने भगवान शिव को तपस्या से प्रसन्न किया तो शिव ने उनसे वरदान मांगने को कहा। तब परशुराम ने उनसे साथ चलने का आग्रह किया। मैं कैलाश पर्वत के कण—कण में विराजमान हूं, ये कहते हुए शिव ने पिता—पुत्र को कैलाश की धूल के कण बने एक—एक शिवलिंग हाथ में दिए, जिन्हें लेकर दोनों लोग रुनकता स्थित रेणुका माता के आश्रम जाने लगे। रात होने पर उन्होंने रुनकता से करीब चार किलोमीटर की दूरी पर यमुना किनारे विश्राम किया तो शिवलिंग को वहां रख दिया। सुबह जब उठे तो शिवलिंग वापस उठाने का प्रयास किया, लेकिन वे उसे हिला भी नहीं सके। थोड़ी देर में आकाशवाणी हुई कि मैं अचलेश्वर हूं। एक बार जहां स्थापित हो गया, फिर वहीं विराजमान हो जाता हूं। आज से आप यहीं मेरी पूजा करें। इस स्थान को कैलाशधाम नाम से जाना जाएगा। तब से इस मंदिर को कैलाशधाम के नाम से जाना जाने लगा।

ऐसे हुआ मंदिर का निर्माण
समय के साथ—साथ शिवलिंग पर मिट्टी की परत जमने लगी और ये काफी नीचे चले गए। समय—समय पर इस स्थान पर मिट्टी से दूध निकलता था। लोगों को ये देखकर काफी हैरानी हुई। एक दिन उन्होंने उस स्थान की खुदाई करा डाली तो नीचे से दो शिवलिंग निकले। साथ ही एक ताम्रपत्र मिला जिस पर महर्षि परशुराम शिवलिंग का इतिहास लिखा था। उसके बाद यहां मंदिर का निर्माण कराया गया।

लाखों की संख्या में आते हैं श्रद्धालु
श्रावण मास के तीसरे सोमवार को आगरा में कैलाश महादेव मंदिर में भक्तिों का सैलाब उमड़ेगा।लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन को पहुंचेंगे। पांच हजार वर्ष पुराने इस मंदिर की विशेषता ये है कि यहां पर एक नहीं, बल्कि दो शिवलिंग हैं। मान्यता है कि ऐसा संयोग दुलर्भ ही मिलता है। भक्त एक साथ दो शिवलिंग के दर्शन करते हैं, पूजा अर्चना की जाती है। मान्यता है, दर्शन मात्र से भगवान हर मनोकामना पूरी करते हैं। 

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