विशेष: शुभ मुहूर्त से ठीक पहले जन्माष्टमी की तिथि को लेकर बड़ा कन्फ्यूजन दूर, रविवार रात को ही है रोहिणी नक्षत्र

विशेष: शुभ मुहूर्त से ठीक पहले जन्माष्टमी की तिथि को लेकर बड़ा कन्फ्यूजन दूर, रविवार रात को ही है रोहिणी नक्षत्र

Amit Sharma | Publish: Sep, 02 2018 03:35:07 PM (IST) Agra, Uttar Pradesh, India

तीन सितंबर को रात को 7.20 से नवमी तिथि है और मृगशिरा नक्षत्र है इसमें कृष्णा भगवान का जन्म नहीं हुआ है इसलिए तीन सितंबर को कृष्णा जन्मोत्स्व मानना शास्त्र सम्मत नहीं है।

 

आगरा। धर्मग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीकृष्णा का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि और बुधवार को हुआ था रोहिणी नक्षत्र में लेकिन कई बार ऐसा होता है कि हमको अष्टमी तिथि रात को नहीं मिल पाती और कई बार रोहिणी नक्षत्र नहीं हो पाता है। इस साल भी दो सितंबर को रविवार 8.48 रात तक सप्तमी तिथि है और उसको बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी और रविवार की रात को ही चंद्रमा भी रोहिणी नक्षत्र में उच्च राशि वर्षभ में ही है। ये कहना है एस्ट्रो एवं वास्तु विशेषज्ञ (भविष्य दर्शन) पुष्पित पाराशर का।

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Pushpit Parasar

एस्ट्रो एवं वास्तु विशेषज्ञ पुष्पित पाराशर का कहना है कि तिथि वार और नक्षत्र जो होने चाहिए जन्माष्टमी के लिए वो रविवार की रात्रि को ही है। इसलिए व्रत पूजन कृष्ण भगवान को झूला झुलाना यह रविवार को ही होगा।

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कृष्ण जनमोत्स्व रविवार को मनाया जाना ही सही है

तीन सितंबर को रात को 7.20 से नवमी तिथि है और मृगशिरा नक्षत्र है इसमें कृष्णा भगवान का जन्म नहीं हुआ है इसलिए तीन सितंबर को कृष्णा जन्मोत्स्व मानना शास्त्र सम्मत नहीं है।

शास्त्रों का मत

पुष्पित पाराशर के मुताबिक शास्त्रों का मत है कि सप्तमी तिथि के साथ अगर अष्टमी तिथि भी लग जाय तो ऐसे में उस दिन ही व्रत पूजन करना चाहिए। लेकिन इसमें भी वैष्णव मत वाले लोग जैसे कि मथुरा, वृंदावन (उत्तर प्रदेश), महाराष्ट्र, बिहार के लोग उदयकालीन अष्टमी तिथि को ग्रहण करते हैं रात को चाहे नवमी तिथि हो अष्टमी हो या न हो इसलिए कैलेंडर में तीन सितंबर की जन्म अष्टमी लिखी है। लेकिन कृष्ण भगवान का जन्म रोहिणी नक्षत्र अष्टमी तिथि में हुआ था इसलिए श्री कृष्णा जन्मोत्स्व रविवार को ही मनाना बिल्कुल सही है। दो सितंबर जन्माष्टमी बिल्कुल सही है रविवार को यह पर्व व्रत करना चाहिए जो सही भी है।

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