पिता की राजनीतिक विरासत नहीं संभाल सके उनके शहजादे, जानिये क्या रहे कारण

आगरा के पूर्व विधायक, सांसद जिनका राजनीति में चलता था सिक्का, उनका परिवार अब हुआ राजनीति से दूर।

आगरा। राजनीति हर किसी के वश की बात नहीं है, अच्छे अच्छों के पसीने छूट जाते हैं। विश्वास न हो तो बड़ा उदाहरण ये है कि जिनके पिता राजनीति के धुरंधर माने जाते थे, वे पिता की विरासत को नहीं संभाल पाये। ऐसे एक दो नहीं, बल्कि आधा दर्जन से अधिक उदाहरण हैं। कई बार संसद पहुंचे, विधानसभा चुनाव में भी परचम फहराया, लेकिन ऐसे नेताओं की संताने राजनीति से दूर हो गईं। ये हैं विधायक, जिनकी संतानें राजनीति में नहीं...

Badan singh

बदन सिंह, पूर्व विधायक

चौधरी बदन सिंह के नाम बड़ा रिकॉर्ड लगातार पांच बार विधायक बनने का है। फतेहपुर सीकरी विधानसभा क्षेत्र में चौधरी बदन सिंह के आगे चुनाव मैदान में अच्छे अच्छे धुरंधर पसीने छोड़ते थे, लेकिन उनकी संतानों ने भी राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।

सत्यपाल विकल, पूर्व विधायक
भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर आगरा पूर्व से विधायक रहे सत्यपाल विकल। अब ये विधानसभा आगरा उत्तर कहलाती है। सत्यपाल विकल की विरासत को जगन प्रसाद गर्ग ने संभाला, जो लगातार आगरा उत्तर से पांचवीं बार विधायक हैं। सत्यपाल विकल के पुत्र सुनील विकल शुरुआत में तो राजनीति में सक्रिय रहे, लेकिन राजनीति का रंग ढ़ंग देख दूर हो गये।

hardwar dubey

हरद्वार दुबे, पूर्व विधायक
आगरा छावनी से विधायक रहे हरद्वार दुबे की गिनती बड़े नेताओं में होती है। कल्याण सिंह की सरकार में वे मंत्री भी रहे। उनके पुत्र प्रांशू दुबे राजनीति में सक्रिय तो रहे, लेकिन पिता की विरासत नहीं संभाल सके। आगरा छावनी सीट सुरक्षित हुई तो यहां से बीएसपी प्रत्याशी गुटियारी लाल दुबेश ने चुनाव जीता। इसके बाद विधानसभा चुनाव 2017 में भाजपा प्रत्याशी डॉ. जीएस धर्मेश ने यहां से जीत दर्ज की।

bhagwan shankar rawat

भगवान शंकर रावत, पूर्व सांसद
भगवान शंकर रावत, आगरा से तीनबार सांसद रहे। इसके साथ ही लेखा समिति के अध्यक्ष रहे। उनके तीन पुत्र हैं, लेकिन उनमें से सिर्फ डॉ. अवधेश रावत राजनीति में सक्रिय हुये, लेकिन पिता की तरह राजनीत में अपना सिक्का न जमा सके।

nihal singh

निहाल सिंह जैन, पूर्व सांसद
पूर्व सांसद सेठ अचल सिंह की विरासत को उनके पुत्र निहाल सिंह जैन से संभालते हुए आगरा में राजनीति की लंबी पारी खेली, लेकिन उनके पुत्र मनोज वोहरा राजनीति के इस मैदान में नहीं टिक पाये। हालांकि वे कांग्रेस में सक्रिय रहे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल सकी।

राजकुमार सामा
राजकुमार सामा एक ऐसा नाम, जिनके लिये भाजपा को आगरा में खड़ा करने का पूरा श्रेय जाता है। हालांकि राजकुमार सामा कोई चुनाव नहीं जीत सके, लेकिन राजनीति में उनके नाम से हर कोई परिचित था। उनके पुत्र विजय सामा भाजपा की राजनीति में हैं, लेकिन अपने पिता का स्थान नहीं ले पाए। राजकुमार सामा के दूसरे पुत्र रंजीत सामा फिल्म निर्माण क्षेत्र में हैं।

 

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धीरेंद्र यादव
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