देश-दुनिया के लाखों प्रेमियों को आनंदित करेगी ताज नगरी की ये "मोहब्बत"

इंग्लिश लव पोएट राजीव खंडेलवाल की प्रेम कविताओं का हो रहा विभिन्न भाषाओं में अनुवाद।
शीघ्र प्रकाशित होगा हिंदी में अनुवादित 60 कविताओं का पहला वॉल्यूम।

आगरा। ताजनगरी के प्रमुख अंग्रेजी-कवि राजीव खंडेलवाल की ख्याति पहले ही साहित्य जगत में दूर-दूर तक पहुंच चुकी है। अब उनकी अनुवादित कविताएं भी देश-दुनिया के लाखों काव्य प्रेमियों के साथ साथ सच्ची मोहब्बत करने वालों को भी रोमांचित करेंगी।कॉच शेल एंड कॉउरीज, लव इज अ लॉट ऑफ वर्क, अ मौनूमेंट टू पिजन और टाइम टू फॉरगेट सहित चार अंग्रेजी कविता संग्रहों के ऑथर राजीव खंडेलवाल की इन संग्रहों में दर्ज चुनिंदा प्रेम कविताओं का हिंदी, बंगाली, ग्रीस-यूरोप की डोमा और सर्बिया की मोंटेनैग्रिन भाषा में अनुवाद किया जा रहा है।

100 से अधिक कविताओं का हुआ अनुवाद
लुधियाना के पूर्व अंग्रेजी विभागाध्यक्ष व जाने-माने अंग्रेजी साहित्यकार- समीक्षक डॉक्टर भूपेंद्र अजीज परिहार ने जहां इनकी सौ से अधिक कविताओं का हिंदी में अनुवाद किया है, वहीं सर्बिया निवासी व नाजी नामान सम्मान विजेता ड्रेगन वुगडैलिक ने इनकी पांच कविताओं का मोंटेनेग्रिन भाषा में अनुवाद किया है।

संस्कृत के बेहद निकट है डोमा..
आज से लगभग एक हजार वर्ष पूर्व, उत्तर प्रदेश के कन्नौज से निकाले गए रोमा लोग विश्व के सौ देशों में बस गए। इनकी डोमा (रोमा) भाषा देव भाषा संस्कृत के बेहद निकट है और यह शौरसेनी और प्राकृत से उत्पन्न हुई है। उन्हीं में से भाषा और भाषाई अधिकारों के अंतरराष्ट्रीय रोमानी संघ के कमिश्नर प्रोफेसर मार्शल कोर्थिएड ने इनकी "दिवाली ग्रीटिंग्स" नामक कविता को न केवल डोमा भाषा में अनुवादित किया है, अपितु इनके पांचवे अंग्रेजी कविता संग्रह के लिए परिचय लिखने की सहमति भी दे दी है। ख्याति प्राप्त अंग्रेजी पत्रिका पोएट्री टुडे के संपादक प्रदीप चौधरी की मार्फत बंगाली भाषा में भी इनकी कविता के अनुवाद की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है।

ये बोले राजीव खंडेलवाल
कुल मिलाकर हिंदी, बंगाली, डोमा और मोंटेनैग्रिन भाषाओं के माध्यम से ताज नगरी की ये मोहब्बत दुनिया के विभिन्न देशों में रह रहे काव्य प्रेमियों का दिल छूने को आतुर है, इसमें दो राय नहीं। राजीव खंडेलवाल के अनुसार, इन सारी भाषाओं में सबसे पहले हिंदी में अनुवादित साठ कविताओं का पहला वॉल्यूम शीघ्र ही प्रकाशित होगा। उल्लेखनीय है कि राजीव खंडेलवाल को लेबनान की फाउंडेशन फॉर ग्रेटिस कल्चर जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित कर चुकी है, वहीं पालमपुर के पीसीके प्रेम के संपादन में दिल्ली के नामचीन प्रकाशक ऑथर्स प्रेस द्वारा प्रकाशित समकालीन भारतीय अंग्रेजी कवियों के इतिहास में भी इनको सम्मान पूर्वक दर्ज किया गया है।

धीरेंद्र यादव
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