मिशनरी स्कूलों की ये मनमानी अब नहीं चलेगी, स्कूल की मान्यता होगी रद

Abhishek Saxena

Publish: Mar, 14 2018 10:51:50 AM (IST)

Agra, Uttar Pradesh, India
मिशनरी स्कूलों की ये मनमानी अब नहीं चलेगी, स्कूल की मान्यता होगी रद

छात्रों को बैग और यूनीफॉर्म स्कूली से दी जाने की शिकायत मिलने पर होगी बड़ी कार्रवाई

आगरा। मार्च के अंतिम सप्ताह में अधिकांश स्कूलों में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का परीक्षा परिणाम आ जाएगा। छात्रों के रिजल्ट आते ही छात्रों का आगे की क्लास में प्रवेश ले लिया जाएगा। इसके साथ ही स्कूल से ही छात्रों को बैग और यूनीफॉर्म दी जाती है। बुक सेलर स्कूल में ही स्टॉल लगा लेते हैं और एक स्लिप पकडा दी जाती है, जिससे कि अभिभावकों द्वारा कहीं और से किताब कॉपी न खरीदी जा सके। इसी तरह से यूनीफॉर्म के साथ होता है, यह भी स्कूल प्रबंधन ही तय करते हैं। अब इन पर लगाम लगेगी। यदि शिकायत मिली तो स्कूल की मान्यता भी रद की जा सकती है।

सरकार कक्षा एक से पहले तक बैग लेस एजुकेशन पर जोर दे रही है।
मिशनरी और कान्वेंट स्कूलों में अप्रैल में नया सत्र शुरू हो जाएगा। कान्वेंट और मिशनरी स्कूलों में नर्सरी का बैग ही तीन से पांच हजार रुपये का होता है। इसी तरह से यूनीफॉर्म भी तीन से चार हजार रुपये की मिल रही है। क्लास बढ़ने के साथ ही बैग और यूनीपफॉर्म का खर्चा भी बढ़ रहा है। योगी सरकार बनने के बाद से स्कूलों की पढ़ाई और ऐसी कमाई पर रोक लगने के लिए कड़ाई शुरू हुई थी। वहीं स्कूल में सप्लाई की जा रही किताब कॉपी को लेकर कई रिपोर्ट आ चुकी हैं, इसके अनुसार 10 रुपये की कॉपी और किताब स्कूल में 70 से 100 रुपये में अभिभावकों को मिलती है। वे बाजार से सस्ती कॉपी और किताब खरीदना चाहें तो उनसे मना कर दिया जाता है। इस खेल में स्कूल को 40 से 50 फीसद कमीशन मिलता है, इतना ही कमीशन बुक सेलर का होता है। स्कूल या निर्धारित दुकानों से किताबें व यूनिफॉर्म खरीदने को बाध्य करने वाले स्कूलों की राह इस बार मुश्किल हो सकती है। इसको लेकर राज्य सरकार गंभीर है। शिकायत पर स्कूलों पर शिकंजा कसा जाएगा। मान्यता के लिए जारी एनओसी तक निरस्त हो सकती है।

डीआईओएस ने कहा कि शासन को जाएगी रिपोर्ट
आगरा के डीआईओएस विनोद राय का कहना है कि स्कूल किताब कॉपी और यूनीफॉर्म खरीदने के लिए परिजनों पर दबाव बनाते हैं तो शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी, शासन के निर्देश पर मान्यता रदद करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। वहीं सीबीएसई के सिटी कॉआॅडिटरनेटर रामानंद सिंह का कहना है कि अभिभावकों को किताब कॉपी और और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है।

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