मोक्षदा एकादशी 2019: पितरों के मोक्ष दिलाने वाली आज, जानें पूजन विधि, महत्व व कथा

 

हर साल मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मोक्षदायिनी एकादशी मनायी जाती है।

By: suchita mishra

Published: 08 Dec 2019, 07:00 AM IST

हर साल मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मोक्षदायिनी एकादशी मनायी जाती है। इसे मोक्षदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन विधि विधान से पूजन करने से व्यक्ति के पाप कटते हैं। मोक्षदा एकादशी को पितरों को मोक्ष दिलाने वाली एकादशी माना जाता है। इस बार मोक्षदायिनी एकादशी 8 दिसंबर को मनायी जाएगी। ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र से जानिए इससे जुड़ी तमाम अहम बातें।

ये है पूजन विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करके पूजा स्थल पर भगवान के सामने व्रत का संकल्प लें। इसके बाद विघ्‍नहर्ता भगवान गणेश, भगवान श्रीकृष्‍ण और महर्ष‍ि वेदव्‍यास की मूर्ति या तस्‍वीर सामने रखें। घर में भगवद् गीता हो तो इसका भी पाठ करें। भगवान को धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित करें। व्रत कथा पढ़ें या सुनें। रात में कीर्तन करें। इसी के साथ भगवान से किसी प्रकार से हुई गलती के लिए क्षमा मांगे। दूसरे दिन यानी की 9 दिसंबर की सुबह किसी ब्राह्मण को भोजन खिलाकर व दक्षिणा देकर व्रत खोलें।

पितरों को मिलती नरक यातनाओं से मुक्ति
कहा जाता है कि मोक्षदा एकादशी का व्रत 23 एकादश‍ियों पर उपवास रखने के बराबर माना जाता है। इस दिन पुण्‍य पितरों को अर्पण करने से उन्‍हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। वे नरक की यातनाओं से मुक्‍त होकर स्‍वर्गलोक प्राप्‍त करते हैं।

ये है कथा
पुरातन काल में गोकुल नगर में वैखानस नाम के राजा राज्य करते थे। एक रात उन्होंने देखा उनके पिता नरक की यातनाएं झेल रहे हैं। उन्हें अपने पिता को दर्दनाक दशा में देख कर बड़ा दुख हुआ। सुबह होते ही उन्होंने राज्य के विद्धान पंडितों को बुलाया और अपने पिता की मुक्ति का मार्ग पूछा। उनमें से एक पंडित ने कहा आपकी समस्या का निवारण भूत और भविष्य के ज्ञाता पर्वत नाम के पंहुचे हुए महात्मा ही कर सकते हैं। अत: आप उनकी शरण में जाएं। राजा पर्वत महात्मा के आश्रम में गए और उनसे अपने पिता की मुक्ति का मार्ग पूछा, महात्मा ने उन्हें बताया की उनके पिता ने अपने पूर्व जन्म में एक पाप किया था। जिस का पाप वह नर्क में भोग रहे हैं।

राजा न कहा, कृपया उनकी मुक्ति का मार्ग बताएं। महात्मा बोले, मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष में जो एकादशी आती है। उस एकादशी का आप उपवास करें। एकादशी के पुण्य के प्रभाव से ही आपके पिता को मुक्ति मिलेगी। राजा ने महात्मा के कहे अनुसार व्रत किया उस पुण्य के प्रभाव से राजा के पिता को मुक्ति मिल गई और वे स्वर्ग में जाते हुए अपने पुत्र को आशीर्वाद देते हुए गए।

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