Facebook, Whatsapp, Instagram आदि पर सक्रिय रहने वाले जरूर पढ़ें

Facebook, Whatsapp, Instagram आदि पर सक्रिय रहने वाले जरूर पढ़ें
Motivational story

Dhirendra yadav | Updated: 19 Jul 2019, 07:00:00 AM (IST) Agra, Agra, Uttar Pradesh, India

proper टाइम बताकर डालना यानि चोर लुटरों को आगाह करने जैसा है।

स्कूल में पैरेंट मीटिंग में गया था। वहां पर एक पुलिस अधिकारी भी आये थे। सभा भरी थी। वहां पुलिस अधिकारी ने पूछा-"आप में से कितने लोग फेसबुक का उपयोग करते हैं?"
लगभग सभी ने कहा- "हम उपयोग करते हैं।"
तब उन्होंने एक पैरेंट्स की और इशारा करते हुए पूछा- "आप के कितने फेसबुक फ्रेंड हैं?"
तब उस आदमी ने सीना ठोककर कहा- "मेरे पांच हजार फ्रेंड्स हैं।"
बाकी सभी लोग आश्चर्य से उसकी और देखने लगे।
पुलिस अधिकारी ने उसे अगला प्रश्न किया- "आप उनमें से कितने लोगों को प्रत्यक्ष पहचानते हो या उनसे मिले हो?"
अब वह थोड़ा घबराया और बोला-
" ज्यादा से ज्यादा सौ-दो सौ को।"

तब पुलिस अधिकारी ने कहा- " इतने सारे Facebook friends हैं ओर परिचय सौ दो सौ से है। हमारे बार-बार के निरीक्षण में यह पाया गया है कि हर पांच आदमियों के पीछे एक criminal mind होता है।आज के समय में घर वालों पर भी विश्वास करना कठिन हो गया है और हम बगैर सोचें समझें किसी की भी friends request आसानी से accept कर लेते हैं।
हमारे पुलिस स्टेशन में एक केस आया। जिसमें एक तीन साल की लड़की ग़ुम हो गई थी। बहुत जाँच पड़ताल की गई तब पता चला कि उस लड़की का स्कूल का पहला दिन था। उस लड़की के पिता ने लड़की को बढ़िया तैयार कर एक फोटो निकाला और facebook पर पोस्ट कर लिखा... "MY cute baby to first day of school."

चार दिन वह लड़की स्कूल गयी और पाँचवें दिन वह स्कूल से वापस नहीं आई।
जांच में पता चला कि एक आदमी facebook का फोटो लेकर स्कूल में आया था और उसने कहा मैं लड़की का चाचा हूं। घर पर प्रोब्लम हो गई है इसलिए मैं उसे लेने आया हूँ। ऐसा बोल कर स्कूल से ले गया। सघन जाँच करने पर पता चला कि वह लड़की 24 घंटे के अंदर भारत के बाहर भेज दी गई।

यह क्रिमिनल लोग ऐसे होते हैं कि फेसुबक से फोटो उठाकर फास्ट चेन द्वारा उसके डाक्यूमेंट तैयार करके रख लेते हैं और दिन तय कर घटना को अन्जाम देते हैं, बच्चों को उठाकर ले जाते हैं। उसके बाद न कोई फोन, न कोई पैसों की डिमांड। अब बताओ इसमें गलती किसकी ? अपनी एक गलती का उस पिता को कितना दुःख हुआ होगा।

हम क्यों अपेक्षा करते है कि अपने फोटो पर या बातों पर हमें Like मिले और बाहर का कोई व्यक्ति अपनी प्रशंसा करे वह भी अँगूठा बताकर दो चार comments के लिये। अपने घर के लोग तारीफ करते नहीं क्या? क्यों हम अपने कुटुम्ब के लोगों की सुरक्षा से खेल रहे हैं? हमारी आदतें, पसंद, नापसंद इतने निचले स्तर पर पहुंच गई हैं कि अब उस पर नियंत्रण करना कठिन हो गया है।

सीख
Facebook, WhatsApp , Instagram पर selfie कि हम इधर जा रहे हैं, उधर जा रहे हैं, यहां पहुंचें, वहा पहुंचें। वह भी proper टाइम बताकर डालना यानि चोर लुटरों को आगाह करने जैसा है।
प्रस्तुतिः गौरव वार्ष्णेय, आगरा

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