रामायण, महाभारत, संविधान लिखने वाले पंडित नहीं हैं, जानिए गांधी के कुलदेवता का नाम

-साहित्य उत्सव एवं राष्ट्रीय पुस्तक मेला में बीसवीं सदी के प्रमुख वैचारिक अधिष्ठान विषय पर आयोजित की गई गोष्ठी

-गांधी, सुभाषचंद्र बोस, डॉ. हेडगेवार, पं. दीनदयाल उपाध्याय, अम्बेडकर व लोहिया के जीवन से परिचित कराया

आगरा। राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. रजनीश त्यागी ने संविधान रचयिता डॉ. भीमराव आंबेडकर के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि डॉ. आम्बेडकर ने भारत में जाति का ताना बाना सुदृढ़ होने के बारे में बताते हुए कहा था कि रामायण लिखने के लिए भारत ने वाल्मीकि, महाभारत के लिए वेद व्यास और संविधान के लिए डॉ. अम्बेडकर को चुना, जो तीनों पंडित नहीं है। ईसाई व इस्लामिक संगठनों द्वारा बहुत दबाव डालने पर भी उन्होंने धर्मांतरण करने के बजाय बौद्ध धर्म को चुना। उनके इस ऋण को भारत कभी नहीं चुका सकता।

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लोहिया के विचार

डॉ. रजनीश त्यागी आगरा साहित्य उत्सव एवं राष्ट्रीय पुस्तक मेला में बीसवीं सदी के प्रमुख वैचारिक अधिष्ठान विषय पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने डॉ. हेडगेवार व पं. दीनदयाल उपाध्याय के जीवन पर प्रकाश डाला। डॉ. रामनोहर लोहिया के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि लोहिया कहते थे कि भारत की नारी को सावित्री जैसे नहीं द्रोपदी जैसा होना चाहिए। संचालन डॉ. सुषमा सिंह ने किया।

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गांधी के कुलदेवता श्रीराम थे

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. शिवशंकर अवस्थी ने कहा कि पराधीनता काल में हमें नहीं पता था कि क्या करना है। अंग्रेज हमें एक देश नहीं, उपमहाद्वीप मानते थे, जहां विभिन्न संस्कृति हैं। गांधी जी ने हमें एक सूत्र में बांधा और बताया कि एक देश और एक संस्कृति है। गांधी जी के कुल देवता श्रीराम थे, हमेशा विपरीत परिस्थिति में वह श्रीराम का ही स्मरण करते थे।

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साउथ अफ्रीका में 23 साल रहे

उन्होंने कहा कि एक कम्पना का मुकदमा लड़ने साउथ अफ्रीका गए गांधी जी ने वहां भारतीय तमिल और तेलुगू लोगों की मजदूरी प्रथा को समाप्त कराया। लगभग 23 वर्ष रहकर वहां उन्होंने भारतीय मूल के लोगों के लिए संघर्ष किया। प्रो. अवस्था ने गांधी जी द्वारा चलाए गए असहयोग, सत्याग्रह, भारत छोड़ो जैसे आंदोलन के बारे में विस्तार से चर्चा की।

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Bhanu Pratap
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