गणतंत्र दिवस स्पेशल: ये मैदान है बेहद खास, राजस्थान और मध्य प्रदेश में होने वाले आंदोलनों की बनती थी रणनीति

पुरानी चुंगी मैदान मोतीगंज आजादी से पहले की कई कहानियां समेटे हुए है।

By: धीरेंद्र यादव

Published: 15 Jan 2018, 06:03 PM IST

आगरा। पुरानी चुंगी मैदान मोतीगंज आजादी से पहले की कई कहानियां समेटे हुए है। 10 अगस्त 1942 को अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा आगरा के पुरानी चुंगी मैदान से लगा, तो अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिल गई। पत्रिका टीम ने उसी पुरानी चुंगी मैदान के आस पास के लोगों से बात की, तो लोगों ने बताया कि इस मैदान के इतिहास पर उन्हें गर्व है। उन्होंने बताया कि बुजुर्गों के मुंह इस मैदान की बहुत सी कहानियां सुनी हैं।

सिमटता चला गया मैदान
पुरानी चुंगी का मैदान आज सिमट गया है। यहां पर घने बाजार के साथ खादी आश्रम वाले के क्वार्टर बना दिए गए हैं। कभी यह मैदान बेहद बड़ा हुआ करता था। 1882 में यहां लाल पत्थरों से एक बड़ी इमारत का निर्माण किया गया था। इस इमारत की 22 सीढ़ियों से चढ़कर मुख्य बिल्डिंग तक पहुंचने का रास्ता है। इस इमारत के सामने बेहद बड़ा मैदान था, जहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, नेताजी सुभाषचंद बोस भी आए थे। यह मैदान भले ही आज सिमट गया है, लेकिन यहां के लोगों के जहन में आज भी इतिहास की वो पुरानी यादें जीवित हैं।

 

विभिन्न आंदोलन का केन्द्र रहा ये मैदान
1882 में बनी यह इमारत, जो आज 10 अगस्त 1942 की क्रांति की गवाह भी है। स्थानीय निवासी सेवानिवृत्ति शिक्षक ओम प्रकाश उपाध्याय ने बताया कि यह इमारत बेहद ऐतिहासिक है। यहां से अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन के लिए आवाज ही बुलंद नहीं हुई, बल्कि यह केन्द्र था आजादी को लेकर हुए विभिन्न आंदोलनों का। यहां से राजस्थान और मध्य प्रदेश में होने वाले आंदोलनों की रणनीति भी बना करती थी।

बदहाली पर आंसू बहा रहा ये मैदान
आज ये मैदान अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। खादी आश्रम के प्रमुख महीपाल सिंह ने बताया कि अगस्त क्रांति को लेकर तो यहां कोई कार्यक्रम नहीं होता है, लेकिन 15 अगस्त और 26 जनवरी को कांग्रेसी जरूर यहां आते हैं। उनके द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सैनानियों का सम्मान किया जाता है। मिष्ठान का वितरण किया जाता है।

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धीरेंद्र यादव
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