राधास्वामी मत के गुरु दादाजी महाराज की दुनियादारों को ये चेतावनी

राधास्वामी मत के गुरु दादाजी महाराज की दुनियादारों को ये चेतावनी

Abhishek Saxena | Publish: Jul, 27 2017 07:05:00 PM (IST) Agra, Uttar Pradesh, India

विशेष सत्संग में दादाजी महाराज ने साफतौर पर कहा कि सत्संगियों को किसी आधार कार्ड की जरूरत नहीं है। यह भी बताया कि सत्संगी कैसा होना चाहिए।

आगरा। राधास्वामी मत के अधिष्ठाता और वर्तमान आचार्य दादाजी महाराज (प्रोफेसर अगम प्रसाद माथुर) के 88वें जन्मोत्सव पर देश-विदेश के हजारों श्रद्धालु आए। राधास्वामी मत के आदि केन्द्र हजूरी भवन में विशेष सत्संग हुआ। इसमें दादाजी महाराज ने साफतौर पर कहा कि सत्संगियों को किसी आधार कार्ड की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने दुनियादारों को कड़ी चेतावनी दी। कुलमालिक राधास्वामी दयाल के चरणों में प्रीति बढ़ाने को कहा। यह भी बताया कि सत्संगी कैसा होना चाहिए।
 
किसी को दुख न दें
दादाजी महाराज ने कहा - हजूर महाराज से प्रार्थना करता हूं कि आपकी सदैव रक्षा हो। आपका परमार्थी काम सहूलितय से बनें। सत्संगी को अपने सुख की प्राप्ति के लिए किसी भी अन्य व्यक्ति को दुख नहीं देना चाहिए। किसी का वाजिब हक नहीं छीनना चाहिए। सबके साथ मिलजुलकर रहने की कोशिश करनी चाहिए। साधारण दुनिया में हम लोगों को कुछ मूल्य हैं, जो सनातनी हैं, उनका पालना करना आवश्यक है और उसमें सबसे भारी है आस्था। यानी प्रीत प्रतीत कुल मालिक की होवे। मालिक की प्रीत की डोरी में बंधने का राधास्वामी मत में बहुत अच्छी तरह से से समझाया गया है। ये कहा गया है कि अपने समय का गुरु ढूंढो, उनका संग करो, दिल से उनको प्यार करना सीखो। प्रेम से बढ़कर कोई दूसरी नियामत नहीं है, जो मालिक तुमको देते हैं।
 
पापों की जड़ अहंकार
दादाजी महाराज ने कहा- काम, क्रोध, लोभ, मोह से बचो। अहंकार दिल में नहीं होना चाहिए। पापों की जड़ अहंकार है। हम लोगों को दीनता अपनानी चाहिए। हर काम में मौज को धारण करना चाहिए। मालिक की मौज हमेशा पॉजिटिव होती है। उनके यहां नेगिटिविटी है ही नहीं। आजकल अपने आप को प्रगतिशील कहने वालों का आधार ‘नो’ से होता है। वे परिणाम की ज्यादा चिन्ता करते हैं। प्रेमी पॉजिटिविटी की थ्योरी में विश्वास करता है। हम मालिक की दया के अधीन हैं। ये है हमारा जिन्दगी जीने का तरीका। परमार्थियों को ईरष्या से बचना चाहिए। जहां तक हो सके, एक दूसरे से मिलकर चलें।
 
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सत्संगी अलग से पहचाने जाएं
उन्होंने कहा- मैं आपसे कहता हूं कि आइए और मालिक के चरणों में बैठ जाएं। जिनका काम करे मेरा काज, हे सदगुरु तुमको मेरी लाज। सत्संगियों की रहनी दुनियादारों से भिन्न होनी चाहिए। अलग से पहचाने जाने चाहिए। उसके लिए आपको आधार कार्ड और परिचय पत्र की जरूरत नहीं है। आपके माथे पर स्वयं अंकित हो जाएगा। अपने आप में परिवर्तन देखेंगे। हमारा अभ्यास आँखों से ही आऱंभ होता है। हजूर महाराज के नयनों को निहारते हैं, हर क्षण उनकी दया महसूस होती है। वे रक्षक हैं, हम निपट बच्चे हैं। उनके चरण शरण में हैं।
 
राधास्वामी नाम लेकर सोएं
दादाजी महाराज ने कहा- मेरे भाई, बहन, बच्चे सब उसी कुटुम्ब के हैं, जिन्होंने आंख खोलें तो हुजूर महाराज और बोलने पर राधास्वामी के अलावा कुछ नहीं सुना। राधास्वामी नाम का सुमिरन हर एक व्यक्ति को करना चाहिए। सुबह शाम, रात दिन राधास्वामी नाम का सुमिरन कीजिए। प्रीत और प्रतीत कुलमालिक राधास्वामी दयाल के चरणों में मजबूत कीजिए। रात की नींद भी राधास्वामी नाम लेकर सोएं। आपको अपने अंदर अपूर्व शक्ति महसूस होगी। उस प्रेम और भक्ति को अपनाना है।
 
तोड़ती जाती है दुनिया जोड़ता जाता हूं मैं
राधास्वामी मत के गुरु दादाजी माराज ने कहा- मैं कुलमालिक हजूर महाराज का शुकराना अदा करना चाहता हूं कि मैंने जिन्दगी से 87 साल उनकी दया के आसरे पूरे किए। मेरे बाबा और दादी के सिखाए मार्ग पर चलकर, माता पिता के आदेश का पालन करके, बहनों औऱ भाइयों को बेहद प्यार पाकर पूरे किए हैं। जैसे मेरे बहन और भाई हैं, वैसे सबके हों। रिश्ते उल्फत की यारो खैर हो, तोड़ती जाती है दुनिया जोड़ता जाता हूं मैं। कुलमालिक टूटता हुआ देखते हैं तो फौरन मरम्मत कर देते हैं। हम लोगों को थोड़ी भिन्न जिन्दगी जीने की आदत होनी चाहिए।
 
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हमको सीकरी से क्या काम
मैं दुनियादारों को चेतावनी देता हूं कि समय है, अब भी सुधर जाओ तो। सत्ता के मद में इतना लिप्त न हो जाएं कि यहां तो यहां और अंत को चौरासी जाना पड़ेगा। जितने रागधारी होते हैं, उन्हें चौरासी में जाना होता है। जो अनुरागी हैं, सत्संगी हैं, वे अच्छे हैं। सत्ता का भोग अपने सिद्धातों से बिगाड़ देता है। जैसे सांपनाथ वैसे नागनाथ। सिर्फ शक्लें बदलने से क्या होता है? मेरा परामर्श है कि समय रहते सुधर जाओ तो अच्छा है। प्रजातंत्र में हक मारना और दूसरे के हित में काम करने की आदत भूल गए हैं। हमको सीकरी से क्या काम? हमको तो फकीरी करके मालिक से काम है। उन्होंने जो दया बख्शी है, चुम्बकीय चरण हैं, उनमें माथा झुकाकर प्रेम का रंग चढ़ता है।
 
 
मालिक सबके साथ हर वक्त मौजूद
उन्होंने कहा- पूरनधनी स्वामी जी महाराज फरमाते हैं कि मालिक सबके साथ हर वक्त मौजूद रहता है। अच्छा और बुरा जो कोई काम करता है, सबकी बर्दाश्त करता है। जब उसकी मर्जी होगी, तब उससे वह काम नहीं करावेगा। किसी के कहने से कोई नहीं मानेगा। नाहक क्यों किसी को दुखाना। जिसको अपने ऊपर श्रद्धा और प्रतीत होवे, उसके समझाने में दोष नहीं है औऱ वही मानेगा। इस कलयुग में तीन बातों से जीव का उद्धार होगा- एक- सद्गुर की शरण, दूसरे साध संत और तीसरे नाम का सुमिरन और श्रवण। बाकी सब झगड़े की बातें हैं। जीव संसार में तमशा देखने के लिए भेजा गया था, पर यहां आन कर मालिक को भूल गया और तमाशे में लग गया। जैसे लड़का बाप की अंगुली पकड़े हुए मेला देखने के लिए बाजार में निकला और अंगुली छोड़ दी और मेले में लग गया। सो न मेले का आनंद रहा और न ही बाप मिलता है। इसी तरह से जो अपने सद्गुरु की अंगुली पकड़े हुए हैं, उनको दुनिया में भी आनंद है और उनका परमार्थ भी बना हुआ है। जिनके वक्त के सदगुरु की भक्ति नहीं है, वे यहां भी दर बदर मारे-मारे फिरते हैं और अंत को चौरासी जावेंगे। जिन्दगी वही सुफल है जो सदगुरु सेवा और मालिक के भजन में लगे। धन वही सुफल है, जो सदगुरु की सेवा में खर्च होवे। जो सदगुरु की प्रीत और उनका निश्चय करेगा, उसको सद भी मिलेगा। काम क्रोध, लोभ, मोह अहंकार की जड़ और आशा तृष्णा की मैल अंतःकरण में है, यह मैल सद्गुरु की प्रीत से जावेगी और प्रेम आवेगा। प्रेम आवेगा, तभी काम पूरा हुआ।
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