Sawan का तीसरा सोमवार:  शिव आराधना के लिए अंग्रेज कलक्टर ने की थी छुट्टी

Sawan का तीसरा सोमवार:  शिव आराधना के लिए अंग्रेज कलक्टर ने की थी छुट्टी
kailash temple, agra

शहर के स्कूल और सरकारी कार्यालय भी रहते हैं बंद 

आगरा। सावन माह के तीसरे सोमवार को आगरा के कैलाश मंदिर में भगवान शिव की पूजा अर्चना करने के लिए हजारों श्रद्धालु आते हैं। शहर में इस दिन स्थानीय स्तर से अवकाश रहता है। सभी सरकारी और गैर सरकारी संस्थान बंद रहते हैं। दूर-दराज से लोग कैलाश मेला और भगवान कैलाश के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। शिव का जलाभिषेक और पूजा अर्चना कर मन्नत मांगते हैं। कैलाश मेले के दिन अवकाश क्यों होता है इसके पीछे एक कहानी है।

कलेक्टर ने घोषित किया था अवकाश
महंत निर्मल गिरी ने बताया कि अंग्रेजों के शासनकाल में एक कलेक्टर थे। उनके कोई संतान नहीं थी। उन्होंने हर स्थान पर पूजा-अर्चना कर मन्नत मांगी, लेकिन उन्हें संतान की प्राप्ति नहीं हुई। जिसके बाद वे आगरा के कैलाश मंदिर आए। यहां उन्होंने संतान के लिए भगवान शिव से मन्नत मांगी। भगवान शिव की कृपा से उन्हें संतान की प्राप्ति हुई। जिसके बाद से कलेक्टर ने आगरा में कैलाश मेले वाले दिन स्थानीय अवकाश की घोषणा की थी। पंडित गिरि ने बताया कि आज भी कैलाश मंदिर पर कोई भी मन्नत मांगता है, तो वह पूरी होती है।

श्रावण मास में पूजा का है विशेष महत्व
महंत निर्मल गिरी ने बताया कि सावन मास में भगवान को शिव की पूजा अर्चना का विशेष महत्व होता है। इस मास में पूजा अर्चना करने से भगवान शिव सभी भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं। भगवान शिव को सावन में हर दिन विल्वपत्र और गंगाजल चढाने से सभी मन्नत पूरी होती हैं। भगवान शिव का सोमवार को दुग्धाभिषेक करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

पहले लिखे जाते थे कैलाश मेले पर निबंध
कैलाश मंदिर पर लगने वाले मेले पर पहले स्कूलों में निबंध लिखे जाते थे। बच्चों को सावन के तीसरे सोमवार के लिए होमवर्क करने के लिए दिया जाता था, जिसमें कैलाश मेले की महत्ता और कैलाश मंदिर पर भगवान शिव की कहानी का वर्णन बताया जाता था। पंडित निर्मल गिरि ने बताया कि उस दौरान कहानी और निबंध लिखने के लिए होड़ मचा करती थी। बच्चे जानकारी एकत्रित करने के लिए आया करते थे। अब कॉपी, किताबों में कैलाश मेले पर निबंध लिखने की परम्परा देखने को नहीं मिलती है। इससे लोगों को कैलाश मेले के बारे में जानकारी का अभाव है।

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