देवकी नंदन ठाकुर के बाद SC/ST एक्ट के खिलाफ इस बड़े संत ने खोला मोर्चा, सरकार के लिए खड़ी हो सकती है बड़ी परेशानी

देवकी नंदन ठाकुर के बाद SC/ST एक्ट के खिलाफ इस बड़े संत ने खोला मोर्चा, सरकार के लिए खड़ी हो सकती है बड़ी परेशानी

suchita mishra | Publish: Sep, 11 2018 12:44:13 PM (IST) Agra, Uttar Pradesh, India

SC/ST एक्ट में संशोधन के खिलाफ देवकी नंदन ठाकुर के बाद द्वारका-शारदापीठ और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ने भी मोर्चा खोल दिया है।

आगरा। SC/ST एक्ट में संशोधन के बाद केंद्र सरकार की मुश्किलें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। सवर्ण समाज व ओबीसी समाज इस एक्ट के विरोध 6 सितंबर को भारत बंद कर चुका है। इसके अलावा मथुरा के जाने माने कथावाचक देवकी नंदन ठाकुर भी इस एक्ट के खिलाफ सवर्णों की आवाज बनकर सामने आ गए हैं। देवकी नंदन का सवर्णों के साथ होना सरकार के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं है क्योंकि देवकी नंदन ठाकुर लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। देश के कई हिस्सों में उनके काफी शिष्य हैं। देवकी नंदन ठाकुर के बाद SC/ST एक्ट के खिलाफ इस लड़ाई में अब एक और बड़ा नाम जुड़ गया है। दरअसल द्वारका-शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने भी इस एक्ट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती का कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा संशोधित रूप में लाया गया SC/ST एक्ट भारतीय समाज में विघटन का कारण बनेगा। उनका कहना है कि ये कानून सवर्णों को शोषित करने वाला कानून है। इसे हर हाल में वापस लिया जाना चाहिए।

इसके अलावा शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने जातिगत आरक्षण पर पर भी बयान दिया है। द्वारका-शारदापीठ और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ने कहा कि आरक्षण को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके बजाए समाज के हर वर्ग को उन्नति का समान अवसर देकर समाज सेवा के योग्य बनाया जाना चाहिए, तभी सभी की भलाई संभव है। उनके प्रतिनिधि द्वारा जारी बयान में यह जानकारी दी गई है। बयान के अनुसार, स्वामी ने कहा कि जिन्हें शिक्षा, नौकरी, तरक्की सभी में आरक्षण की विशेष सुविधा मिल रही हो, उन्हें कोई क्या सता पाएगा? उन्होंने पूछा कि जब वे आरक्षण का लाभ उठाकर उच्च पदों पर बैठे हैं, तो क्या उन्हें सता पाना सम्भव भी है। उन पर कोई कैसे अत्याचार करेगा। उन्होंने कहा कि नेताओं को हर व्यक्ति, हर वर्ग के कल्याण के लिए सोचना चाहिए, न कि केवल किसी वर्ग विशेष के लिए।

 

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