गुरुद्वारा पर वितरित की गई दुआ के साथ दवा, देखें वीडियो

शरद पूर्णिमा की रात गुरुद्वारा गुरु का ताल पर मरीजों का सैलाब उमड़ पड़ा। वहां गुरु ग्रंथ साहब की वाणी के साथ दवा का वितरण किया गया।

Dhirendra yadav

October, 0602:47 PM

Agra, Uttar Pradesh, India

आगरा। शरद पूर्णिमा की रात गुरुद्वारा गुरु का ताल पर मरीजों का सैलाब उमड़ पड़ा। वहां गुरु ग्रंथ साहब की वाणी के साथ दवा का वितरण किया गया। जिन्हें प्राप्त करने के लिए देश के कई प्रांतों के मरीज आए थे। ऐतिहासिक गुरुद्वारा गुरु का ताल पर 43 साल से प्रति वर्ष शरद पूर्णिमा पर दमा की दवा का वितरण किया जाता है। उसी श्रंखला में बुधवार को भी देश के विभिन्न नगरों के मरीज इस दवा को लेने पहुंचे, जिनकी संख्या तीन हजार से अधिक थी। दवा वितरण से पहले भाई नंदलाल दीवान हॉल में मासिक दीवान का आयोजन किया गया। उसके बाद गाय के दूध से बनी खीर में दवा डालकर उसका वितरण किया।

यहां से आए दवा लेने
दवा प्राप्त करने के लिए उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, बिहार आदि प्रांतों से मरीज आए थे, जिन्हें बाबा प्रीतम सिंह के निर्देशन में दवा का वितरण किया। इसके बाद परहेज की जानकारी दी। उसमें बताया गया कि दवा ग्रहण करने के बाद 40 दिन तक परहेज करना होगा। पेट खराब करने वाली वस्तुओं के अलावा खंट्टी, तली हुई, ठंडी वस्तुओं के सेवन करना वर्जित है। गुरुद्वारा गुरु का ताल मीडिया प्रभारी मास्टर गुरनाम सिंह एवं समन्वयक बंटी ग्रोवर ने बताया कि ये दवा देशी जड़ी बूटियों से बनी है और खुद संत बाबा प्रीतम सिंह अपनी देख रेख में तैयार करवाते हैं।


वहीं पूर्णिमासी के मासिक दीवान में कीर्तन एवं कथा की धारा बही। हजूरी रागी कुलदीप सिंह कोमल ने पंचम पातशाही श्री गुरु अर्जुन देव ने बताया कि मन की अवस्था क्या है, मन की अवस्था से ही गुरु मिलते हैं और गुरु सब जानते हैं। इस दौरान बाबा प्रीतम सिंह, जोगा सिंह, अमर सिंह, हरपाल सिंह, नरेन्द्र खनूजा, रंजीत सिंह, टीटू सिंह, हरबंस सिंह, बलवीर सिंह, नरेन्द्र सिंह मौजूद रहे। बता दें कि गुरुद्वारा गुरु का ताल पर 1971 से संत बाबा साधू सिंह मोनी द्वारा यह दवा गाय के दूध में बनी खीर में डालकर दी जाती हैं। स्वांस, दमा, एलर्जी की यह दवा साल में सिर्फ एक बार शरद पूर्णिमा वाले ही दिन ही मिट्टी के सकारे में डालकर वितरित की जाती है। दवा का अनुपात मरीज की उम्र एवं मर्ज की स्थिति को देखकर निर्धारित होता है।

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धीरेंद्र यादव
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