समाजसेवी अशोक जैन सीए का निधनः इक शख़्स सारे शहर को वीरान कर गया, देखें वीडियो

समाजसेवियों को मंत्र- आलोचनाओं से विचलित नहीं होंगे तो आत्मकल्याण होगा और सफलता प्राप्त होगी। यह बात प्रत्येक समाजसेवी को गांठ बांध लेनी चाहिए।

आगरा। खालिदी शरीफ का एक शेर है-
बिछड़ा कुछ इस अदा से कि रुत ही बदल गई
इक शख़्स सारे शहर को वीरान कर गया ..
जी हां, समाजसेवी अशोक जैन सीए के चले जाने से कुछ ऐसा ही हुआ है। समाजसेवा के क्षेत्र में शहर वीरान हो गया है। जीवन का अंतिम सत्य मौत है। हर दिन लाखों लोग मरते हैं। ऐसे विरले होते हैं जिनकी मौत पर लाखों लोग रोते हैं। समाजसेवी अशोक जैन सीए ऐसे ही विरले थे। सोमवार की रात से मंगलवार को अंतिम संस्कार होने तक हजारों लोगों ने उनके अंतिम दर्शन किए। शहर का हर मुअज्जिज शख्स श्रद्धांजलि देने पहुंचा। अशोक जैन हजारों हृदयों में हैं। वे हजारों नेत्रों की ज्योति में हैं। सैकड़ों विकलांगों में हैं। वे 450 ददा-दादियों के साथ हैं। अशोक जैन सीए समाजसेवा की ऐसी ज्योति प्रज्ज्वलित कर गए हैं जो हर किसी को प्रेरणा देती रहेगी।

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अशोक जैन सीए ऐसे समाजसेवी थे जो हर दिल अजीज थे। उन्हें 25 साल पहले हृदयाघात हुआ। किसी तरह बच गए। बस तब से बोनस की जिन्दगी मानकर अपना जीवन समाजसेवा के लिए अर्पित कर दिया। अपना जूता व्यवसाय का कारोबार अपने भाइयों राजकुमार जैन और सुनील कुमार जैन के सुपुर्द कर दिया। शहर के लोगों को अपने साथ जोड़ते चले गए। देखते ही देखते समाजसेवियों की फौज खड़ी कर दी। अशोक जैन सीए समाजसेवा के पर्याय बन गए। हर दीन-दुखी उनके लिए नारायण की तरह था। हार्ट सर्जरी से शुरू हुई समाजसेवा नेत्रदान, स्वास्थ्य शिविर, विकलांग सेवा, वाहन सेवा, धर्म सेवा में बदलती चली गई। उनकी सेवा की गूंज विदेश तक में हुई। अनेक सम्मान मिलने गए। इस बीच आलोचनाओं का दौर भी चला। वे इससे विचलित न हुए। उनका मंत्र था- आलोचना करने वालों को नजरंदाज न करें, उनकी बातों पर चिन्तन करें और अपने कम में लगे रहें। अगर आप ईमानदारी के साथ काम कर रहे हैं, तो वह दिन दूर नहीं जब आलोचक आपके साथ आ जाएंगे। अशोक जैन सीए के साथ यही हुआ।

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अशोक जैन सीए ने हर क्षेत्र के लोगों को अपने साथ जोड़ रखा था। वे पता नहीं क्या जादू करते थे कि हर किसी को अपने साथ कर लेते थे। मैं आज दोपहर में जब उनके निवास पर पहुंचा तो सैकड़ों लोग थे। संख्या पल-पल बढ़ती जा रही थी। सैकड़ों लोग श्मशान घाट पर प्रतीक्षारत थे। उनके भ्राता राजकुमार जैन और सुनील कुमार जैन के आंसू तो बंद ही नहीं हो रहे थे। हर किसी का हृदय द्रवित था। सबके मुंह पर एक ही बात थी- समाजसेवा का एक अध्याय सदा के लिए सो गया। आगरा विकास मंच के संस्थापक अध्यक्ष थे। श्री श्वेताम्बर जैन मूर्ति पूजक संघ के भी अध्यक्ष थे।

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अशोक जैन सीए ने तीन बार एंजियोप्लास्टी कराने के बाद भी समाजसेवा से मुंह नहीं मोड़ा। 1600 से अधिक हृदय ऑपरेशन कराए। नेत्रदान मिशन में 14 साल में 2000 से अधिक नेत्रदान कराए। 2010 में पौधारोपण का अभियान चलाया। तीन साल में 10 हजार पौधे लगवाए। फिर पेड़ों को बचाने का अभियान शुरू किया। ताज नेचर वॉक के सामने स्मृति वन लगाया, जिसमें हजारों पेड़ हैं। अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हरविजय सिंह वाहिया के साथ तीन बार ताज लिटरेचर फेस्टिवल कराया। डॉ. बीके अग्रवाल, सुशील जैन, डॉ. रमेश धमीजा, डॉ. सुनील शर्मा के साथ से कारवां आगे बढ़ाया। 2500 से अधिक बुजुर्गों को उनके घर भेजा जा चुका है। सौ साल से जीर्णशीर्ण हालत में पड़े विधवा आश्रम का पुनर्निर्माण कराया, जहां 100 विधवाएं रह सकती हैं। साहित्य सेवा के तहत तीन बार ताज साहित्य महोत्सव करा चुके हैं। विभिन्न संस्थाओं को कई एम्बुलेंस दिलाई हैं। 10 से 13 जनवरी से भारत का सबसे बड़ा दिव्यांग सेवा शिविर लगाया गया, जिसमें 1800 दिव्यांगों को ट्राइ साइकिल, व्हीलचेयर, जयपुर फुट, कृत्रिम हाथ, कैलीपर्स, शूज, बैसाखी, सुनने की मशीन आदि दी गईं। यह उनका अंतिम सेवा शिविर साबित हुआ। सेव वाटर अभियान भी चर्चा में रहा है। 500 साल पूर्व जैन दादाबाड़ी में आचार्य श्री हरि विजय सूरी महाराज ने अकबर को प्रबोधन दिया था। उसे जैन तीर्थस्थल के रूप में विकसित किया।

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