एसएसपी ने सोशल मीडिया के बढ़ते आकर्षण पर छात्रों को दिए टिप्स

एसएसपी अमित पाठक बोले, सोशल मीडिया का जरूरत से अधिक उपयोग व्यक्ति को मानसिक रूप से थका देता है

Abhishek Saxena

September, 1307:00 PM

Agra, Uttar Pradesh, India

आगरा। छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रिल्यूड पब्लिक स्कूल में साइबर क्राइम और साइबर बुलिंग विषय पर कार्यशाला हुई। कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों तथा उनके अभिभावकों को गुरुवार को साइबर क्राइम की जानकारी दी गई। इस कार्यशाला का उद्देश्य साइबर क्राइम के प्रति विद्यार्थियों को सचेत करना था। इस कार्यशाला के रिसोर्स पर्सन (वक्ता) आईटी एक्सपर्ट रक्षित टंडन थे। एसएसपी अमित पाठक ने बच्चों को यहां टिप्स दिए।

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एसएसपी अमित पाठक ने कहा कि हर कोई आज के समय में व्हाट्सएप, फेसबुक,ट्विटर, इन्स्ट्राग्राम, स्मार्ट फोन के जरिए किसी न किसी रूप में जुड़ा हुआ है। सोशल मीडिया का प्रयोग नियमित रूप से दैनिक जीवन में किया जा रहा है। सोशल मीडिया में वह आकर्षण होता है, जो युवा पीढ़ी को बहुत जल्दी अपनी गिरफ्त का शिकार बना लेता है और युवा पीढ़ी लगातार उसका प्रयोग करके उसकी आदी होती जाती है। सोशल मीडिया का जरूरत से अधिक उपयोग व्यक्ति को मानसिक रूप से थका देता है। इसके दुष्चक्र में फंसने के बाद उससे उबरना आसान नहीं होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को सचेत करते हुए कहा कि सोशल मीडिया से उन्हें दूरी बनानी चाहिए। एक निश्चित समय पर उसका सीमित प्रयोग करना चाहिए। सोशल मीडिया का बहुत अधिक प्रयोग करने पर जीवन की गति कम तथा जटिल होती जाती है। और व्यक्ति को जीवन ऊबाउ और नीरस लगने लगता है। व्यक्ति अपने आस-पास होने वाली घटनाओं और लोगो के प्रति अनभिज्ञ रहने लगता है। उन्होंने विद्यार्थी जीवन में ज्ञानार्जन करते हुए सोशल मीडिया से दूर रहकर लक्ष्य हासिल करने का साधुवाद दिया।

साइबर क्राइम बढ़ रहा
कार्यशाला में साइबर क्राइम विशेषज्ञ रक्षित टंडन ने बताया कि उत्तर प्रदेश में साइबर क्राइम की संख्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। इस क्राइम का शिकार बच्चों के साथ-साथ बड़े भी हो जाते हैं। जिसका मुख्य कारण आधुनिक तकनीक के विषय में उन्हें ज्ञान न होना है। मोबाइल, लैपटॉप, स्मार्टफोन अधिकतर लोगों के द्वारा प्रयोग किए जा रहे हैं। लेकिन, उन पर उपलब्ध ऐप्स के सही प्रयोग की जानकारी न होने से साइबर क्राइम का शिकार हो जाते हैं। लालच, व्यक्तिगत बदला लेने की भावना, दूसरों को अपमानित करने की भावना ही व्यक्ति को साइबर क्राइम करने को मजबूर करती है। इसीलिए आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता मानवीय नैतिक मूल्यों का विकास करने पर उन्होंने बल दिया। बच्चे, जिनको उपेक्षित दृष्टि से देखा जाता है व मानसिक रूप से सुदृढ़ नहीं हो पाते और क्राइम की गिरफ्त में जल्दी आ जाते हैं। माता-पिता के पास समय न होना अभिभावकों को तकनीकी ज्ञान न होना भी साइबर क्राइम का जनक हो सकता है। झूठी ID बनाना, धमकियां देना, अपशब्द लिखना, आपत्तिजनक टिप्पणी करना, आपत्तिजनक फोटो भेजना, सभी साइबर क्राइम के अंतर्गत आता है। इससे बचने के लिए उन्होंने बताया कि माता-पिता से कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए। अनजाने मित्रों से फोन पर चैटिंग नहीं करनी चाहिए। अपने ATM कार्ड का स्वयं ही प्रयोग करना चाहिए। किसी दूसरे व्यक्ति के हाथ में जाने पर हैकर आसानी से हैक कर लेते हैं और व्यक्तिगत दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। बच्चों को अवसाद से बचाने के लिए उनके साथ पर्याप्त बातचीत करनी चाहिए। सेल्फी एडिक्शन दुर्घटनाओं को बढ़ावा देती है। अतः अनावश्यक रुप से फोटो नहीं खींचने चाहिए। मोबाइल से अनावश्यक और अनुपयोगी एप्स हटा देनी चाहिए। साइबर क्राइम के जुर्म करने पर दंड तथा जुर्माना के प्रति भी उन्होंने छात्रों को जागरुक रहने और सावधानी बरतने को कहा । मोबाइल पर गेम खेलने का प्रभाव भी हमारे व्यक्तित्व पर पड़ता है। हिंसक प्रवृत्ति को जन्म देने वाले खेलों को खेलने से बचना चाहिए। मोबाइल के विभिन्न एप्स के सही प्रयोग की जानकारी से उन्होंने छात्रों को ही नहीं बल्कि अभिभावकों के साथ ही साथ शिक्षकों को भी लाभान्वित किया। मोबाइल का आवश्यकता से अधिक प्रयोग करने पर व्यक्ति समाज से अलग रहने लग जाता है और एक विशेष फोबिया का शिकार हो जाता है। इसलिए इसके सीमित प्रयोग पर बल दिया। छात्रों ने प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया। यह कार्यशाला सभी के लिए महत्वपूर्ण जानकारियों से युक्त रही जिसका सभी ने लाभ उठाया और साइबर क्राइम से बचने तथा रोकने के तरीकों को अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में निदेशक डॉ.सुशील गुप्ता, विद्यालय की कार्यवाहक प्राचार्या रूपा प्रकाश आदि मौजूद थे।

अभिषेक सक्सेना
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