तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मुस्लिमों की ये प्रतिक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक बताया तीन तलाक का फैसला, केंद्र सरकार को कानून बनाने के दिए निर्देश।

By: suchita mishra

Published: 22 Aug 2017, 12:04 PM IST

आगरा। सर्वोच्च न्यायालय ने तीन तलाक का असंवैधानिक बताया है। इस संबंध में कोर्ट ने छह माह में केन्द्र सरकार को कानून बनाने के लिए कहा है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का मुस्लिमों ने तहेदिल से स्वागत किया है। मुस्लिम बहनों के दुख-दर्द पर सकारात्मक आदेश के लिए सुप्रीम कोर्ट का आभार भी जताया है।

अब कड़ा कानून बनेः अमीर अहमद
वरिष्ठ अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता अमीर अहमद ने कहा- मैं तो बहुत पहले से कहता रहा हूं कि तीन तलाक गलत है। स्वागत योग्य है कदम सुप्रीम कोर्ट का। तीन तलाक वास्तव में महिलाओं पर अत्याचार है। जो लोग तीन तलाक की वकालत करते हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि इसकी एक प्रक्रिया है। उसका अनुपालन नहीं किया जाता है। तीन तलाक के नाम पर महिलाओं पर मर्दानगी निकाली जाती है। भारत सरकार को इस बारे में कड़ा कानून बनाना चाहिए।


बहुत अच्छा निर्णयः मौलाना रिसायत अली
मौलाना रिसायत अली का कहना है- सुप्रीम कोर्ट ने बहुत अच्छा निर्णय दिया है। हमारी सुप्रीम कोर्ट और देश के संविधान में पूरी आस्था है। तीन तलाक कतई नहीं होना चाहिए। तीन तलाक के नाम पर कुछ भी किया जा रहा है। भारत सरकार कानून बनाए ताकि तीन तलाक पर रोक लग सके।

 

मुस्लिम बहनों के दर्द को समझाः इस्लाम अब्बास
राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के राष्ट्रीय मंत्री और उत्तर प्रदेश के प्रभारी इस्लाम अब्बास ने बताया कि हम तो तीन तलाक को लेकर दो साल से अभियान चला रहे थे। हमारी पहल पर सुप्रीम कोर्ट में सात याचिकाएं प्रस्तुत की गई थीं। मंच के संयोजक इन्द्रेश जी ने पूरा मामला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अवगत कराया। इसके बाद भारत सरकार ने काम शुरू किया। सुप्रीम कोर्ट का आदेश स्वागत योग्य है। भारत में बहुत देर से हुआ है। 22 मुस्लिम देशों में पहले से ही तीन तलाक पर रोक है। ये देश इस्लामिक हैं। भारत में कट्टरपंथी मुल्लाओं की वजह से सरकारों का रुख लचीला रहा और इसी कारण लेट हुआ है। पहली बार अच्छी सरकार आई, जिसने मुस्लिम बहनों के दर्द को समझा और तीन तलाक पर रोक लगवाई।

 

तीन तलाक देने वालों को 20 साल की जेल होः अशफाक सैफी
मौलाना आजाद एजूकेशन फाउंडेशन के सदस्य अशफाक सैफी, इस्लाम अब्बास, इरफान कुरैशी, समीर अब्बास आदि ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला हमेशा नजीर बनेगा। तीन तलाक के नाम पर कट्टरपंथी हमारी बहनों का उत्पीड़न कर रहे थे। कानून बन जाने के बाद तीन तलाक लेने पर उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकेगी। उन्होंने मांग की कि तीन तलाक देने वालों को 20 साल की जेल का कानून बनाया जाए। तीन तलाक से बुरी प्रथा कोई और हो हो नहीं सकती है।

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