महिला शिक्षक और बालिकाओं के लिए सजा से कम नहीं है ये विद्यालय

Abhishek Saxena

Publish: Jan, 14 2018 02:59:13 PM (IST)

Agra, Uttar Pradesh, India

आगरा। जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के लिए कई बार सोशल मीडिया के सैनिकों ने मोर्चा खोला है। लेकिन, कभी प्राथमिक विद्यालयों के हालातों पर गौर नहीं किया। आगरा के रामबाग क्षेत्र के सीता नगर में गीता स्मारक प्राथमिक विद्यालय कई वर्षों से संचालित हो रहा है। यहां टीन शेड में पढ़ाई हो रही है। शिक्षिकाएं बच्चों को शिक्षा देने के लिए रोजाना अपना दायित्व निर्वहन कर रही हैं। लेकिन इस प्राथमिक विद्यालय में शिक्षण कार्य करने वाली शिक्षिकाएं और यहां पढ़ने वाली बच्चियों के लिए ये स्कूल सजा से कम नहीं है। सरकार द्वारा प्राथमिक विद्यालयों में सीबीसीई की तर्क पर शिक्षा देना प्राथमिकताओं में शामिल है। लेकिन, इस प्राथमिक विद्यालय में टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव है। सरकार और जनप्रतिनिधि ने यहां टॉयलेट बनवाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए हैं।

बच्चे और बच्चियों के साथ शिक्षिकाएं भी सजा को मजबूर
सीता नगर के गीता स्मारक प्राथमिक विद्यालय में इन दिनों तीन महिला शिक्षिकाएं हैं। वहीं 70 से अधिक बच्चे शिक्षण ले रहे हैं। इनमें से करीब 42 बालिकाएं यहां शिक्षा लेने प्रतिदिन आती हैं। मासूम बालिकाओं को जब लघुशंका या शौच आती है, तो वे या तो वे मजबूरी में घर के लिए जाती हैं या फिर सड़क किनारे उन्हें जाना पड़ता है। जो बहुत ही असहज होता है। वहीं यदि महिला शिक्षिकाओं की बात करें, तो सुबह से सत्र में नौ बजे से तीन बजे तक वे स्कूल परिसर में ही रहती है। ऐसे में स्कूल प्रागंढ़ में बुनियादी सुविधा के अभाव में वे बहुत ही असहज महसूस करती हैं। गीता स्मारक की प्रधानाध्यापिका रीना रॉय का कहना है कि इस स्कूल में पढ़ने वाली बालिकाओं के लिए टॉयलेट नहीं होने से बहुत परेशानी होती है। बालिकाओं को लघुशंका के लिए बहुत परेशानी होती है। विद्यालय के आसपास कोई सुरक्षित स्थान नहीं होने से शिक्षिकाओं के साथ बालिकाओं को लघुशंका के लिए जाना पड़ता है।
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प्राथमिक विद्यालय में जरूरी है टॉयलेट
प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारी राजीव वर्मा का कहना है कि प्राथमिक विद्यालयों में टॉयलेट अंतयंत जरूरी है। कक्षा एक से पांच तक बच्चों को टॉयलेट के लिए गीता स्मारक से काफी दूर जाना पड़ता है। जिससे उनका शिक्षण कार्य भी प्रभावित होता है। टॉयलेट आज एक बुनियादी जरूरत है। हर घर में टॉयलेट के निर्माण के लिए सरकार योजनाएं ला रही है। लेकिन, शिक्षा विभाग प्राथमिक विद्यालयों में इसकी अनदेखी कर रहा है। प्राथमिक शिक्षक संघ लगातार शिक्षा विभाग से टॉयलेट बनवाने की मांग करता रहा है।

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