मजदूरों की आवाज बुलंद करने के लिए संसद का हुआ घेराव

केन्द्र सरकार की मजदूर विरोधी दमनकारी नीतियों के खिलाफ ट्रेड यूनियनों द्वारा संसद पर घेराव किया गया।

By: धीरेंद्र यादव

Published: 12 Nov 2017, 04:16 PM IST

आगरा। जो मजदूर अपना खून पसीना बहाकर हमारे लिए घर निर्माण का काम कर रहे हैं। सरकारी इमारतें बना रहे हैं, उन्ही श्रमिकों के बारे में सरकार ठोस कदम नहीं उठा रही है। ये कहना है कि उत्तर प्रदेश ग्रामीण मजदूर संगठन के अध्यक्ष तुलारा शर्मा का। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार की मजदूर विरोधी दमनकारी नीतियों के खिलाफ ट्रेड यूनियनों द्वारा संसद पर घेराव किया गया।


आवाज हुई बुलंद
इस घेराव में इंडियन नेशनल रूलर लेबर फैडरेशन एवं उत्तर प्रदेश ग्रामीण मजदूर संगठन व उत्तर प्रदेश असंगठित क्षेत्र मजदूर संगठन के हजारों मजदूरों ने वरिष्ठ समाजसेवी एवं श्रमिक नेता तुलाराम शर्मा के नेतृत्व में तीवन दिवसीय महापड़ाव कार्यकम में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के हित में लिए ठोस कानून बनाने, न्यूनतम वेतन बढ़ाने, समााजिक सुरक्षा सहित 12 सूत्रीय मांगे केन्द्र सरकार के समक्ष रखी गईं।

ये रहे मौजूद
इस कार्यक्रम में तुलाराम शर्मा के अलावा हेमलता दिवाकर गोला, फिरोजाबाद से हरी सिंह सविता, जेएल श्रीवास्तव बीडब्लूआई दिल्ली के ओम प्रकाश गोला। श्रुति सोमवीर, संजय शर्मा, राजगोपाल, राजू, आदि लोों ने प्रदेश के करोड़ों असंगठित श्रमिकों के हितों में आर्थिक व समाजिक नीतियां लागू किए जाने की मांग की।

ये हैं प्रमुख मांगें
1.असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को कम से कम 500 रुपये प्रतिदिन मजदूरी दी जाए।2.15 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन कम से कम हो।
3.आठ घंटे अधिक काम पर ओवर टाइम दिया जाए।
4.ग्राम पंचायत स्तर पर लघु सचिवालय बनाए जाएं।
5.लेबर चौक पर बैठने के लिए मजदूरों के बैठने के लिए स्थाई जगह तथा श्रमिक सहायता केन्द्र खोले जाएं।
6.श्रमिक महिलाओं को समान कार्य का समान वेतन दिया जाए।
7. बाल श्रमिकों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए शिक्षा प्रशिक्षण केन्द्र खोले जाएं।
8. शहर और ग्रामीण क्षेत्र में श्रमिक कॉलोनियां बनाई जाएं।

 

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धीरेंद्र यादव
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