गजब के हुनरमंद हैं ये आईपीएस अधिकारी, अनुराग कश्यप और प्रकाश झा जैसे फिल्म ​निर्देशक भी हैं इनके हुनर के कायल

एसएसपी अमित पाठक की लेखनी के भी काफी धनी हैं। जानिए उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें।

By: suchita mishra

Updated: 15 Nov 2018, 03:34 PM IST

आगरा। वर्ष 2007 बैच के आइपीएस अधिकारी एसएसपी अमित पाठक इन दिनों पूरी चौकी को लाइन हाजिर कर देने को लेकर चर्चा में हैं। जगह जगह उनके इस कदम की सराहना की जा रही है। अपनी साफ और तेजतर्रार छवि के लिए पहचाने जाने वाले एसएसपी अमित पाठक के कुछ ऐसे हुनर हैं जिनके बारे में यदि आप जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे। जी हां, अपने काम से लगातार पुलिस की छवि को सुधारने का प्रयास करने वाले अमित पाठक कलम के भी धनी हैं। उन्हें लेखनी का बहुत शौक है।

10 से ज्यादा नाटक लिख चुके हैं
एसएसपी अमित पाठक अभी तक दस से ज्यादा नाटक लिख चुके हैं और उनका मंचन भी किया है। कुछ हास्य नाटकों के लेखन और मंचन में उनकी पत्नी व आईआरएस अधिकारी नीलम अग्रवाल ने भी उनका साथ दिया। अपने लेखन के जरिए भी वे कई बार पुलिस की छवि को सुधारने की कोशिश करते हैं। साथ ही पुलिस के सामने आने वाली चुनौतियों व घटनाओं को भी व्यंग्यात्मक ढंग से लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं। ताकि लोगों का मनोरंजन भी हो और उन तक एक मैसेज भी पहुंच जाए।

फिल्मों में दे चुके हैं डायलॉग
वर्ष 2011 में वाराणसी में उनकी मुलाकात फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप से हुई थी। उस समय अनुराग कश्यप फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर की शूटिंग के लिए वहां गए थे। उस समय उनकी स्क्रिप्ट पर काफी देर दोनों की बात हुई। बातचीत से फिल्म निर्देशक काफी प्रभावित हुए और उन्होंने अपनी अगली फिल्म में उनके कुछ डायलॉग लिए।

 

ssp and prakash jha

प्रकाश झा भी हुए कायल
गंगाजल और राजनीति जैसी प्रसिद्ध फिल्में बना चुके फिल्म निर्देशक प्रकाश झा उप्र पुलिस के कॉन्सटेबल की भूमिका पर धर्मक्षेत्र नामक एक फिल्म बना रहे हैं। कुछ माह पहले वे आगरा आए थं। इस बीच उन्होंने तमाम पुलिस कॉन्सटेबल से बातचीत की। फिर एसएसपी अमित पाठक से मिले और स्क्रिप्ट पर चर्चा की। इस बीच अमित पाठक ने पुलिस की वर्दी से लेकर रहन सहन, चाल-ढाल और उनके सैल्यूट करने के तरीके तक पर विमर्श किया। इस बीच प्रकाश झा भी उनकी बातचीत और सुझाव के कायल हुए बिना नहीं रह पाए। उनका मानना है कि जनता के सामने पुलिस की सही छवि आना जरूरी है ताकि उसका विश्वास बना रहे। जनता पुलिस में हीरो की तलाश करती है। ऐसे में फिल्मों में जो भी दिखाया जाता है जनता उसे सही मानती है।

 

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