चूंकि ये वोटर नहीं, इसलिए किसी के एजेंडे में नहीं

suchita mishra

Publish: Nov, 14 2017 03:47:44 (IST)

Agra, Uttar Pradesh, India
चूंकि ये वोटर नहीं, इसलिए किसी के एजेंडे में नहीं

निकाय चुनावों में वोट के लालच में प्रत्याशी लुभावने वादे करके वोटर को रिझा रहे हैं। बच्चे उनके वोटर नहीं, इसलिए उनके विकास के लिए इनके एजेंडे में नही

आगरा। उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका है। मेयर तथा पार्षद पद के लिए नामांकन भरा जा चुका है। प्रत्याशी अपनी-अपनी तरह से मतदाताओं को रिझाने में लगे हुए हैं। वोटर के हाथ जोड़ना, पैर छूना, और दूसरी गतिविधियों से वोटर को रिझाना जारी है। आज भी बिजली, सड़क, खरंजा, पानी और नाली के नाम पर वोट मांगे जा रहे हैं। इन्हीं मुद्दों को प्रत्याशियों ने अपने एजेंडे में शामिल किया है। बच्चे आज भी असुरिक्षत है। हर रोज बच्चे लापता हो रहे हैं। लापता बच्चों का लगातार ग्राफ बढ़ता जा रहा है। बच्चियां यौन शोषण की शिकार हो रही हैं। बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं मिल पा रही है। संरक्षण गृहों में भी बच्चों की स्थिति ठीक नहीं है। किशोरों में अपराध की प्रवृत्ति बढ़ रही है। बच्चों के इन मुद्दों की ओर किसी का ध्यान नहीं है।

बाल अधिकारों के संरक्षण में लगे चाइल्ड राइट एक्टिविस्ट और महफूज संस्था के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के समन्वयक नरेश पारस बाल अधिकारों से जुडे़ मुद्दों को प्रत्याशियों के ऐजेंडे में जुड़वाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। वह इस संबंध में आगरा के विधायक जगन प्रसाद गर्ग , विधायक योगेन्द्र उपाध्याय और विधायक चौधरी उदयभान सिंह से मिल चुके हैं। उनको मांगपत्र सौंप कर विधानसभा में बच्चों से संबंधित मुद्दों को उठवाने का आग्रह कर चुके हैं। सिर्फ आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। निकाय चुनाव में मैदान में उतरे प्रत्याशियों को भी बाल अधिकारों से जुड़े मुद्दों को शामिल करने के लिए उम्मीदवारों से संपर्क कर रहे हैं।

इसलिए किसी का ध्यान नहीं
नरेश पारस कहते हैं कि बच्चे वोटर नहीं हैं इसलिए किसी भी राजनीतिक दल के ऐजेंडे में बच्चों के मुद्दे शामिल नहीं हैं। राजनीति लोग उन्हीं के मुद्दों को अपने ऐजेंडे में शामिल करते हैं, जो वोट देते हैं। बच्चे वोट नहीं देते हैं, इसलिए उनकी ओर किसी का ध्यान नहीं है।


ये हैं बाल अधिकारों से जुड़े मुद्दे
1. बच्चे केवल घर और स्कूल में ही खेल पाते हैं। शहर कंकरीट का जंगल बनता जा रहा है। पार्कों पर अवैध कब्ज और पार्किग बना ली गई हैं। बच्चे पार्कों में खेल नहीं पाते हैं, जिससे उनका शारीरिक विकास नहीं हो पाता है। शहर के सभी पार्कों को कब्जा मुक्त कराकर बच्चों के लिए झूले इत्यादि लगवाएं जाएं।
2. जनपद में बड़ी संख्या में बच्चे लापता हैं। उनकी तलाश कराई जाए।
3. शहर में कई बाल संरक्षण गृह ऐसे संचालित हैं जिनका किशोर न्याय अधिनियम में पंजीकरण नहीं है, जिससे बाल गृह में रहने वाले बच्चों की जानकारी प्रशासन को नहीं हो पाती है। शहर के सभी बाल संरक्षण गृहों को किशोर न्याय अधिनिम में पंजीकृत कराया जाए।
4. शहर के अधिकांश सरकारी स्कूल में बाउंड्रीवाल, शौचालय और बिजली का कनेक्शन नहीं हैं। इस समस्या का समाधान कराया जाए।
5. शहर की सड़कों पर बड़ी संख्या में बच्चे भीख मांग रहे हैं। भिक्षावृत्ति से मुक्त कराकर उनको शिक्षा से जोड़कर पुनर्वासित किया जाए।
6. नगर निगम द्वारा संचालित कई स्कूल खुले में चल रहे हैं। उनमें स्कूल की इमारत का निर्माण कराया जाए।
7. हर वार्ड में बाल सुरक्षा समिति के गठन का प्रावधान है, जिससे बच्चों की सुरक्षा के मुद्दे मुखर हो सकें। अभी तक वार्डों में बाल सुरक्षा समितियां नहीं हैं। सभी वार्डों में बाल सुरक्षा समितियां बनाई जाएं।
8. बाल संरक्षण गृह, स्कूल आदि का आपके द्वारा समय-समय पर निरीक्षण किया जाए।

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned