Ganesh Chaturthi 2017: जानिए क्यों लगाते हैं गणपति को 21 मोदक का भोग

Ganesh Chaturthi 2017 पर पढें 21 मोदक का भोग लगाने के पीछे की मान्यता और इसका महत्व।

By: suchita mishra

Published: 18 Aug 2017, 01:15 PM IST

Ganesh Chaturthi से लेकर Anant Chaudas तक हर साल गणेशोत्सव का आयोजन धूमधाम से किया जाता है। दस दिनों के इस त्योहार को भक्त गणपति के जन्मदिन के रूप में मनाते हैं। गणेश चतुर्थी के दिन गणपति को ढोल नगाड़ों के साथ घर में लाकर स्थापित किया जाता है। दस दिनों का उनका विधि विधान से पूजन कर स्वागत किया जाता है। दसवें दिन यानी अनंत चौदस के दिन लोग उन्हें जल में विसर्जित करते हैं। इस बार यह त्योहार 25 सितंबर से शुरू होकर 5 अक्टूबर तक चलेगा।

माना जाता है कि दसवें दिन विसर्जन के बाद गणपति अपने माता पिता यानी भगवान शिव और माता गौरी के पास लौट जाते हैं। इस दस दिनों के दौरान भगवान गणेश की सेवा में कई तरह के पकवान बनाकर भोग लगाया जाता है। इन पकवानों में 21 मोदक को या मोदक के 21 टुकड़े करके रखने की परंपरा है। आइए जानते हैं कि इस परंपरा के पीछे मान्यता क्या है —

इस पूरे प्रकरण के पीछे गणेश और माता अनुसुइया की कहानी प्रचलित है। कहा जाता है कि एक बार गणपति भगवान शिव और माता पार्वती के साथ अनुसुइया के घर गए। उस समय गणपति, भगवान शिव और माता पार्वती तीनों को काफी भूख लगी थी तो माता अनुसुइया ने भोलेनाथ से कहा कि मैं पहले बाल गणेश को भोजन करा दूं, बाद में आप लोगों को कुछ खाने को देती हूं। वह लगातार काफी देर तक गणपति को भोजन कराती रहीं, लेकिन फिर भी उनकी भूख शांत नहीं हो रही थी, इससे वहां उपस्थित सभी लोग हैरान थे। इधर भोलेनाथ अपनी भूख को नियंत्रित किए बैठे थे।

आखिर में अनुसुइया ने सोचा कि उन्हें कुछ मीठा खिलाया जाए। भारी होने के कारण मीठे से शायद गणपति की भूख मिट जाए। ये सोचकर उन्होंने गणेश भगवान को मिठाई का एक टुकड़ा दिया, जिसको खाने के बाद उन्होंने जोर से एक डकार ली और उनकी भूख शांत हो गई। उसी समय भोलेनाथ ने भी जोर जोर से 21 बार डकार ली और कहा उनका पेट भर गया है।

बाद में देवी पार्वती ने अनुसूया से उस मिठाई का नाम पूछा जो उन्होंने बाल गणेश को परोसी थी। तब माता अनुसुइया ने कहा कि इस मिठाई को मोदक कहते हैं। तब से भगवान गणेश को 21 मोदक का भोग लगाने की परंपरा शुरू हो गई। माना जाता है कि ऐसा करने से गणपति के साथ—साथ सभी देवताओं का पेट भरता है और वे प्रसन्न होते हैं।

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